'प्रशस्त' ऐप से दिव्यांग बच्चों की पहचान करें शिक्षक: धर्मेंद्र प्रधान की NEP 2020 के तहत अपील
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 23 जुलाई 2026 को देशभर के शिक्षकों से आग्रह किया कि वे 'प्रशस्त' ऐप के ज़रिए स्कूली बच्चों में सीखने की अक्षमताओं और दिव्यांगता की पहचान शुरुआती चरण में ही करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अंतर्गत यह पहल अलग-अलग क्षमताओं वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए शुरू की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
शिक्षा मंत्री ने यह बात संसद की कार्यवाही स्थगित होने के दौरान ओडिशा के भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसदों के साथ हुई बैठक में कही। बैठक में राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में कठिनाइयों का सामना कर रहे बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
प्रधान ने कहा, 'हमारा मुख्य मकसद शुरुआती चरण में संघर्ष कर रहे बच्चों की पहचान करना, उन्हें सही तरीकों से पढ़ाना और उनके शैक्षिक नतीजों में सुधार लाना है।'
'प्रशस्त' ऐप क्या है और यह कैसे काम करता है
समग्र शिक्षा अभियान के तहत राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा विकसित 'प्रशस्त' (Pre-Assessment Holistic Screening Tool) ऐप स्कूलों को 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' के अंतर्गत मान्यता प्राप्त 21 प्रकार की दिव्यांगताओं के लिए बच्चों की स्क्रीनिंग करने में सक्षम बनाता है।
इस प्रक्रिया में सामान्य शिक्षक प्रारंभिक स्क्रीनिंग करते हैं, जबकि विशेष शिक्षक मामलों की पुष्टि और वर्गीकरण करते हैं। टूल को इस तरह तैयार किया गया है कि किसी बच्चे पर गलत लेबल न लगे। स्क्रीनिंग के बाद बच्चों को 'यूनिक डिसेबिलिटी आईडी' (UDID) पोर्टल के माध्यम से प्रमाण-पत्र, रियायतें और परीक्षाओं में विशेष सुविधाएँ प्राप्त हो सकती हैं।
सांसदों की प्रतिबद्धता और समावेशी शिक्षा का लक्ष्य
बैठक में ओडिशा के BJP सांसदों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने का संकल्प लिया, ताकि स्कूल इस ऐप को अपनाएँ और दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। प्रधान ने इस पहल को 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' और NEP 2020 के तहत समावेशी शिक्षा की दिशा में एक ठोस कदम बताया।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में दिव्यांग छात्रों की समय पर पहचान और सहायता एक दीर्घकालिक चुनौती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती पहचान और उचित हस्तक्षेप से स्कूल छोड़ने की दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है और सीखने के नतीजों में सुधार हो सकता है। 'प्रशस्त' पहल को स्कूल स्तर पर समावेशी तौर-तरीकों को व्यवस्थित रूप से लागू करने की एक सुविचारित कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या होगा
यह पहल NEP 2020 के व्यापक समावेशी शिक्षा ढाँचे का हिस्सा है और इसे देशभर के सरकारी स्कूलों में लागू किए जाने की योजना है। ओडिशा के सांसदों द्वारा जागरूकता अभियान की प्रतिबद्धता इस बात का संकेत है कि राज्य स्तर पर इसके क्रियान्वयन को गति मिल सकती है।