23 जुलाई 2026
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'प्रशस्त' ऐप से दिव्यांग बच्चों की पहचान करें शिक्षक: धर्मेंद्र प्रधान की NEP 2020 के तहत अपील

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'प्रशस्त' ऐप से दिव्यांग बच्चों की पहचान करें शिक्षक: धर्मेंद्र प्रधान की NEP 2020 के तहत अपील

सारांश

'प्रशस्त' ऐप महज एक डिजिटल टूल नहीं — यह दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का व्यवस्थित प्रयास है। NEP 2020 के तहत NCERT द्वारा विकसित यह ऐप 21 प्रकार की दिव्यांगताओं की स्क्रीनिंग करता है और UDID पोर्टल से जोड़कर बच्चों को परीक्षा में विशेष सुविधाएँ दिलाता है।

मुख्य बातें

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 23 जुलाई 2026 को शिक्षकों से 'प्रशस्त' ऐप के ज़रिए दिव्यांग बच्चों की शुरुआती पहचान का आग्रह किया।
NCERT द्वारा समग्र शिक्षा अभियान के तहत विकसित यह ऐप 21 प्रकार की दिव्यांगताओं की स्क्रीनिंग करता है।
स्क्रीनिंग के बाद बच्चों को UDID पोर्टल के माध्यम से प्रमाण-पत्र, रियायतें और परीक्षा में विशेष सुविधाएँ मिलती हैं।
यह पहल 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' , शिक्षा का अधिकार अधिनियम और NEP 2020 के अंतर्गत शुरू की गई है।
ओडिशा के BJP सांसदों ने अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने का संकल्प लिया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 23 जुलाई 2026 को देशभर के शिक्षकों से आग्रह किया कि वे 'प्रशस्त' ऐप के ज़रिए स्कूली बच्चों में सीखने की अक्षमताओं और दिव्यांगता की पहचान शुरुआती चरण में ही करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अंतर्गत यह पहल अलग-अलग क्षमताओं वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए शुरू की गई है।

मुख्य घटनाक्रम

शिक्षा मंत्री ने यह बात संसद की कार्यवाही स्थगित होने के दौरान ओडिशा के भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसदों के साथ हुई बैठक में कही। बैठक में राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में कठिनाइयों का सामना कर रहे बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

प्रधान ने कहा, 'हमारा मुख्य मकसद शुरुआती चरण में संघर्ष कर रहे बच्चों की पहचान करना, उन्हें सही तरीकों से पढ़ाना और उनके शैक्षिक नतीजों में सुधार लाना है।'

'प्रशस्त' ऐप क्या है और यह कैसे काम करता है

समग्र शिक्षा अभियान के तहत राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा विकसित 'प्रशस्त' (Pre-Assessment Holistic Screening Tool) ऐप स्कूलों को 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' के अंतर्गत मान्यता प्राप्त 21 प्रकार की दिव्यांगताओं के लिए बच्चों की स्क्रीनिंग करने में सक्षम बनाता है।

इस प्रक्रिया में सामान्य शिक्षक प्रारंभिक स्क्रीनिंग करते हैं, जबकि विशेष शिक्षक मामलों की पुष्टि और वर्गीकरण करते हैं। टूल को इस तरह तैयार किया गया है कि किसी बच्चे पर गलत लेबल न लगे। स्क्रीनिंग के बाद बच्चों को 'यूनिक डिसेबिलिटी आईडी' (UDID) पोर्टल के माध्यम से प्रमाण-पत्र, रियायतें और परीक्षाओं में विशेष सुविधाएँ प्राप्त हो सकती हैं।

सांसदों की प्रतिबद्धता और समावेशी शिक्षा का लक्ष्य

बैठक में ओडिशा के BJP सांसदों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने का संकल्प लिया, ताकि स्कूल इस ऐप को अपनाएँ और दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। प्रधान ने इस पहल को 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' और NEP 2020 के तहत समावेशी शिक्षा की दिशा में एक ठोस कदम बताया।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में दिव्यांग छात्रों की समय पर पहचान और सहायता एक दीर्घकालिक चुनौती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती पहचान और उचित हस्तक्षेप से स्कूल छोड़ने की दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है और सीखने के नतीजों में सुधार हो सकता है। 'प्रशस्त' पहल को स्कूल स्तर पर समावेशी तौर-तरीकों को व्यवस्थित रूप से लागू करने की एक सुविचारित कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

आगे क्या होगा

यह पहल NEP 2020 के व्यापक समावेशी शिक्षा ढाँचे का हिस्सा है और इसे देशभर के सरकारी स्कूलों में लागू किए जाने की योजना है। ओडिशा के सांसदों द्वारा जागरूकता अभियान की प्रतिबद्धता इस बात का संकेत है कि राज्य स्तर पर इसके क्रियान्वयन को गति मिल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है — भारत के सरकारी स्कूलों में विशेष शिक्षकों की भारी कमी को देखते हुए यह सवाल उठता है कि स्क्रीनिंग के बाद की सहायता कितनी सुलभ होगी। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 को एक दशक होने को है, फिर भी ग्रामीण स्कूलों में UDID नामांकन दर अत्यंत कम है। ऐप-आधारित समाधान तब तक अधूरे रहेंगे जब तक ज़मीनी स्तर पर प्रशिक्षित जनशक्ति और बजटीय प्रतिबद्धता नहीं बढ़ती।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'प्रशस्त' ऐप क्या है और इसे किसने बनाया?
'प्रशस्त' (Pre-Assessment Holistic Screening Tool) एक डिजिटल स्क्रीनिंग टूल है जिसे NCERT ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत विकसित किया है। यह ऐप स्कूलों को 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' के अंतर्गत मान्यता प्राप्त 21 प्रकार की दिव्यांगताओं के लिए बच्चों की स्क्रीनिंग करने में सक्षम बनाता है।
'प्रशस्त' ऐप से दिव्यांग बच्चों को क्या फायदा होगा?
स्क्रीनिंग के बाद बच्चों को UDID पोर्टल के माध्यम से दिव्यांगता प्रमाण-पत्र, सरकारी रियायतें और परीक्षाओं में विशेष सुविधाएँ मिल सकती हैं। इससे उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना और स्कूल छोड़ने की दर कम करना आसान होगा।
धर्मेंद्र प्रधान ने यह अपील किस संदर्भ में की?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 23 जुलाई 2026 को संसद की कार्यवाही स्थगित होने के दौरान ओडिशा के BJP सांसदों के साथ हुई बैठक में यह बात कही। बैठक में राज्य के विकास और दिव्यांग बच्चों की शिक्षा पर विशेष चर्चा हुई।
'प्रशस्त' ऐप किस कानूनी और नीतिगत ढाँचे के तहत काम करता है?
यह पहल 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016', 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' और NEP 2020 के अंतर्गत समावेशी शिक्षा के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए शुरू की गई है। NEP 2020 में अलग-अलग क्षमताओं वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है।
स्कूलों में 'प्रशस्त' ऐप की स्क्रीनिंग प्रक्रिया कैसे होती है?
पहले सामान्य शिक्षक ऐप के माध्यम से प्रारंभिक स्क्रीनिंग करते हैं। इसके बाद विशेष शिक्षक मामलों की पुष्टि और वर्गीकरण करते हैं, ताकि किसी बच्चे पर गलत लेबल न लगे और सही सहायता सुनिश्चित हो सके।
राष्ट्र प्रेस
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