6 अक्टूबर 2026
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संस्कृत है भारतीय भाषाओं का 'सुनहरा धागा': उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का LBSNSU दीक्षांत संबोधन

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संस्कृत है भारतीय भाषाओं का 'सुनहरा धागा': उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का LBSNSU दीक्षांत संबोधन

सारांश

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने LBSNSU के दीक्षांत समारोह में संस्कृत को भारतीय एकता का 'सुनहरा धागा' बताया और ₹500 करोड़ के ज्ञान भारतम मिशन के ज़रिए पांडुलिपि विरासत को भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने का आह्वान किया। NAAC ए++ विश्वविद्यालय से AI युग में प्रौद्योगिकी को संस्कृत-संरक्षण से जोड़ने का संदेश दिया।

मुख्य बातें

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 6 अक्टूबर 2026 को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (LBSNSU) के द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
संस्कृत को भारत की भाषाओं को एक भव्य माला में पिरोने वाला 'सुनहरा धागा' बताया।
विश्वविद्यालय की एनएएसी ए++ ग्रेड और 44 वर्ष पुरानी विद्यापीठ पंचांग प्रकाशन परंपरा की सराहना की।
ज्ञान भारतम मिशन के तहत ₹500 करोड़ के प्रारंभिक कोष से पांडुलिपि संरक्षण एवं प्रलेखन का उल्लेख किया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और अष्टदशी योजना को संस्कृत पुनरुत्थान का आधार बताया।
तीन प्रकाशनों — 'अम्नाय कल्पतरु' , 'विद्यामित्रम' और 'शोध प्रभा' — का विमोचन किया।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के कुतुब इंस्टीट्यूशनल एरिया स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (LBSNSU) के द्वितीय दीक्षांत समारोह में संस्कृत को भारत की अनेक भाषाओं को एकता के सूत्र में पिरोने वाला 'सुनहरा धागा' बताया। उन्होंने स्नातक छात्रों, उनके अभिभावकों, संकाय सदस्यों एवं विश्वविद्यालय समुदाय को बधाई दी और मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित लोगों को 'नशीली दवाओं के बहिष्कार' की शपथ भी दिलाई।

विश्वविद्यालय की उपलब्धियाँ और शास्त्री जी को श्रद्धांजलि

राधाकृष्णन ने विश्वविद्यालय को एनएएसी की सर्वोच्च ग्रेड (ए++) प्राप्त करने और भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध क्षेत्रों में शोध करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि यह संस्थान संस्कृत अध्ययन के लिए एक अग्रणी अंतरराष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करे — ठीक वैसे जैसा विश्वविद्यालय के संस्थापक, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने कल्पना की थी।

उन्होंने शास्त्री जी के अमर नारे 'जय जवान, जय किसान' को याद करते हुए कहा कि यह केवल एक नारा नहीं था, बल्कि भारत के सीमा रक्षण और खाद्य सुरक्षा के प्रति अटल संकल्प की अभिव्यक्ति थी।

संस्कृत संरक्षण और पांडुलिपि विरासत

उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय के उन प्रयासों की सराहना की जिनके तहत सुभाषितों के माध्यम से परिसर में संस्कृत को जीवित रखा जा रहा है, विद्यापीठ पंचांग के प्रकाशन की 44 वर्ष पुरानी परंपरा निभाई जा रही है और प्राकृत एवं वास्तु शास्त्र जैसे शास्त्रीय विषयों की शिक्षा दी जा रही है।

उन्होंने ज्ञान भारतम मिशन का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि ₹500 करोड़ के प्रारंभिक कोष के साथ शुरू की गई यह पहल भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत को देश और दुनिया के लोगों तक पहुँचाने का कार्य कर रही है। उन्होंने शिक्षकों और छात्रों से अप्रकाशित संस्कृत पांडुलिपियों की खोज, संरक्षण, आलोचनात्मक संपादन और प्रकाशन का बीड़ा उठाने का आग्रह किया, ताकि दुर्लभ ग्रंथ लुप्त न हों।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और सभ्यतागत विकास

राधाकृष्णन ने इस बात पर बल दिया कि भारत का विकास उसकी सभ्यतागत विरासत से जुड़ा रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और अष्टदशी योजना जैसी पहलों ने संस्कृत के पुनरुत्थान और भारतीय ज्ञान प्रणाली के संवर्धन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर प्राचीन भाषाओं के संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।

युवाओं को संदेश और नई प्रकाशनों का विमोचन

स्नातकों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने उनसे आजीवन सीखने और अपने आचार्यों व माता-पिता द्वारा दिए गए मूल्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में उन्होंने छात्रों को संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रौद्योगिकी का सकारात्मक उपयोग करने की सलाह दी।

उन्होंने युवाओं को मादक पदार्थों से दूर रहने, सोशल मीडिया का विवेकपूर्ण उपयोग करने और पढ़ने, कौशल विकास तथा वास्तविक संबंध बनाने में समय लगाने की नसीहत दी। समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने तीन प्रकाशनों — 'अम्नाय कल्पतरु', 'विद्यामित्रम' और 'शोध प्रभा' (जुलाई-सितंबर 2026) — का विमोचन भी किया।

समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुरली मनोहर पाठक, विशिष्ट विद्वान, आचार्य, संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में संस्कृत प्रेमी उपस्थित रहे। गौरतलब है कि यह विश्वविद्यालय का केवल दूसरा दीक्षांत समारोह था — जो संस्था की बढ़ती शैक्षणिक परिपक्वता का संकेत देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु असली प्रश्न यह है कि संस्कृत को जीवंत भाषा बनाए रखने की व्यावहारिक रणनीति क्या है। ज्ञान भारतम मिशन का ₹500 करोड़ का कोष पांडुलिपि संरक्षण के लिए एक सकारात्मक कदम है, लेकिन भारत में लाखों अप्रकाशित पांडुलिपियों की तुलना में यह राशि सीमित है। NAAC ए++ जैसी उपलब्धियाँ संस्थागत गुणवत्ता दर्शाती हैं, फिर भी संस्कृत स्नातकों के लिए रोज़गार के व्यावहारिक मार्ग और शोध के वैश्विक प्रकाशन का प्रश्न अनुत्तरित रहता है — बिना इसके, भाषा का पुनरुत्थान महोत्सवों तक सीमित रहने का जोखिम है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने संस्कृत को 'सुनहरा धागा' क्यों कहा?
राधाकृष्णन ने कहा कि प्रत्येक भारतीय भाषा ने राष्ट्र को समृद्ध किया है, लेकिन संस्कृत वह 'सुनहरा धागा' है जो इन सभी भाषाओं के मोतियों को एक भव्य माला में पिरोता है। उनके अनुसार संस्कृत भारत की सभ्यतागत और भाषायी एकता का आधार है।
ज्ञान भारतम मिशन क्या है और इसका बजट कितना है?
ज्ञान भारतम मिशन एक केंद्रीय पहल है जिसका उद्देश्य भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत का संरक्षण, प्रलेखन और उसे सुलभ बनाना है। इसकी शुरुआत ₹500 करोड़ के प्रारंभिक कोष के साथ की गई है ताकि अप्रकाशित पांडुलिपियाँ भारत और विश्व के लोगों तक पहुँच सकें।
लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय को कौन-सी मान्यता मिली है?
विश्वविद्यालय को एनएएसी की सर्वोच्च ग्रेड ए++ प्राप्त हुई है। यह विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राकृत, वास्तु शास्त्र और संस्कृत के विविध क्षेत्रों में शोध करता है और 44 वर्षों से विद्यापीठ पंचांग प्रकाशित कर रहा है।
राधाकृष्णन ने छात्रों को AI युग में क्या सलाह दी?
उपराष्ट्रपति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में छात्रों को संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रौद्योगिकी का सकारात्मक उपयोग करना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया के विवेकपूर्ण उपयोग और पढ़ने, कौशल विकास तथा वास्तविक संबंध बनाने में समय लगाने की भी नसीहत दी।
LBSNSU दीक्षांत समारोह में कौन-से प्रकाशन जारी किए गए?
समारोह में उपराष्ट्रपति ने तीन प्रकाशनों का विमोचन किया — 'अम्नाय कल्पतरु' , 'विद्यामित्रम' और 'शोध प्रभा' (जुलाई-सितंबर 2026 अंक)। ये प्रकाशन विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों को प्रतिबिंबित करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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