राजनाथ सिंह का आह्वान: संस्कृत श्लोक और कंप्यूटर कोड दोनों जानें नई पीढ़ी के विद्यार्थी
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को अयोध्या में श्रीनारायण संस्कृत महाविद्यालय के नए भवन का उद्घाटन करते हुए कहा कि देश को ऐसे विद्यार्थियों की ज़रूरत है जो संस्कृत के श्लोकों की व्याख्या करने के साथ-साथ कंप्यूटर के कोड को भी समझ सकें। उन्होंने वेदों की गहराई और आधुनिक विज्ञान की भाषा — दोनों में दक्षता को भारत के भविष्य की बुनियाद बताया।
मुख्य संबोधन की बातें
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा, 'परम्परा को संरक्षित करने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि उसे वर्तमान समय की जरूरतों से जोड़ दिया जाए। आने वाली पीढ़ी को केवल अतीत जानना पर्याप्त नहीं है। उसे अतीत से शक्ति लेकर भविष्य का निर्माण करना है।'
उन्होंने जोड़ा कि वेदों से लेकर उपनिषद तक, दर्शन से लेकर व्याकरण तक, आयुर्वेद से लेकर गणित तक और न्याय से लेकर मीमांसा तक — भारतीय ज्ञान-परम्परा का विशाल भंडार संस्कृत के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रवाहित होता रहा है और विश्व की बौद्धिक परंपराओं को समृद्ध करता रहा है।
शिक्षा नीति पर सरकार का रुख
रक्षा मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने संस्कृत के अध्ययन को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर विशेष बल दिया है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय भाषाओं और शास्त्रीय ज्ञान को पाठ्यक्रम में अधिक महत्व देने की पहल चल रही है।
गौरतलब है कि भारत की सभ्यता में ज्ञान को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर, उसे परम्परा और संस्कार के माध्यम से समाज के व्यवहार में उतारने की अनूठी रीत रही है — इसी बात को राजनाथ सिंह ने रेखांकित किया।
अयोध्या की संत परंपरा को श्रद्धांजलि
रक्षा मंत्री ने कहा कि अयोध्या एक बार फिर अपने प्राचीन गौरव को प्राप्त कर रही है और आज जब पूरी दुनिया भारत की संस्कृति का पुनरुत्थान देख रही है, तब यह नगरी उसका केंद्र बन रही है।
उन्होंने कहा कि हमारे संत भारतवर्ष के स्मृतिकार हैं — भारत की स्मृतियाँ इन्हीं संतों के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रवाहित होती रही हैं। राजनाथ सिंह ने यह भी स्मरण कराया कि संतों ने जेल की यातनाएँ सहीं और प्राणों की आहुति तक दी।
राम जन्मभूमि और संत बलिदान
राजनाथ सिंह ने कहा कि रामलला आज अपने भव्य मंदिर में विराजमान हैं और इस पुण्य उपलब्धि के पीछे उन संतों का त्याग एवं बलिदान है जो 500 से अधिक वर्षों से श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े विभिन्न आंदोलनों की सहयोगी संत परंपरा का हिस्सा रहे।
उन्होंने अयोध्या की पुण्यभूमि पर उपस्थित सभी को इन संतों के बलिदान का स्मरण कराया और कहा कि वर्षों का संघर्ष आज एक भव्य रूप में हमारे सामने है।
आगे की दिशा
श्रीनारायण संस्कृत महाविद्यालय के नए भवन के उद्घाटन के साथ अयोध्या में संस्कृत शिक्षा की एक नई अध्याय की शुरुआत हुई है। रक्षा मंत्री के इस संबोधन से यह संकेत मिलता है कि सरकार भारतीय ज्ञान-परंपरा और आधुनिक तकनीकी शिक्षा के समन्वय को नीतिगत प्राथमिकता देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।