5 अक्टूबर 2026
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राजनाथ सिंह का आह्वान: संस्कृत श्लोक और कंप्यूटर कोड दोनों जानें नई पीढ़ी के विद्यार्थी

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राजनाथ सिंह का आह्वान: संस्कृत श्लोक और कंप्यूटर कोड दोनों जानें नई पीढ़ी के विद्यार्थी

सारांश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अयोध्या से एक सशक्त संदेश दिया — परंपरा और प्रौद्योगिकी का समन्वय ही नई पीढ़ी की असली ताकत है। संस्कृत श्लोक और कंप्यूटर कोड — दोनों एक साथ। यह महज एक उद्घाटन भाषण नहीं, बल्कि भारत की शिक्षा नीति की दिशा का स्पष्ट संकेत है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 5 अक्टूबर 2026 को अयोध्या में श्रीनारायण संस्कृत महाविद्यालय के नए भवन का उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को संस्कृत श्लोक और कंप्यूटर कोड — दोनों की समझ होनी चाहिए।
सरकार ने संस्कृत अध्ययन को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर विशेष बल देने की बात कही।
राजनाथ सिंह ने 500 से अधिक वर्षों की संत परंपरा और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में उनके बलिदान को याद किया।
वेद, उपनिषद, आयुर्वेद, गणित, दर्शन — सभी को संस्कृत के माध्यम से आधुनिकता से जोड़ने का आह्वान किया गया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को अयोध्या में श्रीनारायण संस्कृत महाविद्यालय के नए भवन का उद्घाटन करते हुए कहा कि देश को ऐसे विद्यार्थियों की ज़रूरत है जो संस्कृत के श्लोकों की व्याख्या करने के साथ-साथ कंप्यूटर के कोड को भी समझ सकें। उन्होंने वेदों की गहराई और आधुनिक विज्ञान की भाषा — दोनों में दक्षता को भारत के भविष्य की बुनियाद बताया।

मुख्य संबोधन की बातें

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा, 'परम्परा को संरक्षित करने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि उसे वर्तमान समय की जरूरतों से जोड़ दिया जाए। आने वाली पीढ़ी को केवल अतीत जानना पर्याप्त नहीं है। उसे अतीत से शक्ति लेकर भविष्य का निर्माण करना है।'

उन्होंने जोड़ा कि वेदों से लेकर उपनिषद तक, दर्शन से लेकर व्याकरण तक, आयुर्वेद से लेकर गणित तक और न्याय से लेकर मीमांसा तक — भारतीय ज्ञान-परम्परा का विशाल भंडार संस्कृत के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रवाहित होता रहा है और विश्व की बौद्धिक परंपराओं को समृद्ध करता रहा है।

शिक्षा नीति पर सरकार का रुख

रक्षा मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने संस्कृत के अध्ययन को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर विशेष बल दिया है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय भाषाओं और शास्त्रीय ज्ञान को पाठ्यक्रम में अधिक महत्व देने की पहल चल रही है।

गौरतलब है कि भारत की सभ्यता में ज्ञान को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर, उसे परम्परा और संस्कार के माध्यम से समाज के व्यवहार में उतारने की अनूठी रीत रही है — इसी बात को राजनाथ सिंह ने रेखांकित किया।

अयोध्या की संत परंपरा को श्रद्धांजलि

रक्षा मंत्री ने कहा कि अयोध्या एक बार फिर अपने प्राचीन गौरव को प्राप्त कर रही है और आज जब पूरी दुनिया भारत की संस्कृति का पुनरुत्थान देख रही है, तब यह नगरी उसका केंद्र बन रही है।

उन्होंने कहा कि हमारे संत भारतवर्ष के स्मृतिकार हैं — भारत की स्मृतियाँ इन्हीं संतों के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रवाहित होती रही हैं। राजनाथ सिंह ने यह भी स्मरण कराया कि संतों ने जेल की यातनाएँ सहीं और प्राणों की आहुति तक दी।

राम जन्मभूमि और संत बलिदान

राजनाथ सिंह ने कहा कि रामलला आज अपने भव्य मंदिर में विराजमान हैं और इस पुण्य उपलब्धि के पीछे उन संतों का त्याग एवं बलिदान है जो 500 से अधिक वर्षों से श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े विभिन्न आंदोलनों की सहयोगी संत परंपरा का हिस्सा रहे।

उन्होंने अयोध्या की पुण्यभूमि पर उपस्थित सभी को इन संतों के बलिदान का स्मरण कराया और कहा कि वर्षों का संघर्ष आज एक भव्य रूप में हमारे सामने है।

आगे की दिशा

श्रीनारायण संस्कृत महाविद्यालय के नए भवन के उद्घाटन के साथ अयोध्या में संस्कृत शिक्षा की एक नई अध्याय की शुरुआत हुई है। रक्षा मंत्री के इस संबोधन से यह संकेत मिलता है कि सरकार भारतीय ज्ञान-परंपरा और आधुनिक तकनीकी शिक्षा के समन्वय को नीतिगत प्राथमिकता देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या देश के संस्कृत महाविद्यालयों में आज वह बुनियादी ढाँचा और शिक्षक-क्षमता मौजूद है जो इस दोहरी दक्षता को व्यावहारिक बना सके। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की बात तो है, लेकिन संस्कृत संस्थानों में STEM विषयों के एकीकरण की गति अभी भी धीमी है। अयोध्या में एक भवन का उद्घाटन प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, परंतु नीतिगत निवेश और पाठ्यक्रम सुधार के ठोस आँकड़ों के बिना यह वक्तव्य महज एक प्रेरणादायी भाषण बनकर रह सकता है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजनाथ सिंह ने अयोध्या में क्या उद्घाटन किया?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 5 अक्टूबर 2026 को अयोध्या में श्रीनारायण संस्कृत महाविद्यालय के नए भवन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने संस्कृत शिक्षा को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ने का आह्वान किया।
राजनाथ सिंह ने विद्यार्थियों से क्या अपेक्षा जताई?
राजनाथ सिंह ने कहा कि नई पीढ़ी के विद्यार्थियों को संस्कृत श्लोक और कंप्यूटर कोड — दोनों की समझ होनी चाहिए। उनके अनुसार, वेदों की गहराई और आधुनिक विज्ञान की भाषा में एक साथ दक्षता ही भारत के भविष्य की नींव है।
संस्कृत को लेकर सरकार की नीति क्या है?
रक्षा मंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार ने संस्कृत के अध्ययन को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर विशेष बल दिया है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस व्यापक ढाँचे का हिस्सा है जिसमें भारतीय भाषाओं और शास्त्रीय ज्ञान को पाठ्यक्रम में अधिक स्थान देने की बात कही गई है।
अयोध्या की संत परंपरा का उल्लेख क्यों किया गया?
राजनाथ सिंह ने कहा कि अयोध्या की संत परंपरा 500 से अधिक वर्षों से श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े आंदोलनों की सहयोगी रही है। उन्होंने उन संतों के त्याग और बलिदान को याद किया जिनकी वजह से रामलला आज अपने भव्य मंदिर में विराजमान हैं।
भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत का क्या संबंध है?
राजनाथ सिंह के अनुसार, वेद, उपनिषद, दर्शन, व्याकरण, आयुर्वेद, गणित, ज्योतिष, न्याय और मीमांसा — भारतीय ज्ञान-परंपरा का विशाल भंडार संस्कृत के माध्यम से ही पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ा और विश्व की बौद्धिक परंपराओं को समृद्ध किया।
राष्ट्र प्रेस
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