ममता बनर्जी के बयानों पर अयोध्या के संत समाज का आक्रोश, बोले— 'अराजकता फैलाकर सत्ता पाने की साजिश'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली में दिए गए भाषण को लेकर राजनीतिक विवाद तेज़ हो गया है। 2 नवंबर 2026 को अयोध्या के संत समाज ने उनके वक्तव्यों पर कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए उन्हें देश में अस्थिरता फैलाने का प्रयास बताया।
संतों के आरोप और प्रतिक्रिया
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बनर्जी ने कथित तौर पर साजिश के तहत कट्टरपंथी बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारतीय नागरिकता दिलाने में भूमिका निभाई। परमहंस आचार्य ने माँग की कि ममता बनर्जी के सभी कार्यों की उच्च स्तरीय जाँच होनी चाहिए।
परमहंस आचार्य ने कहा, 'आज ममता बनर्जी चुनाव आयोग के अधिकारियों और ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठा रही हैं। यह उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत है। जो व्यक्ति भारतीय संविधान और कानून व्यवस्था पर ही सवाल खड़ा कर रहा हो, वह राष्ट्रहित के खिलाफ काम कर रहा है।'
सीताराम दास का इंडिया गठबंधन पर निशाना
अयोध्या के संत सीताराम दास ने भी ममता बनर्जी और इंडिया गठबंधन के नेताओं को आड़े हाथों लिया। उनका आरोप था कि गठबंधन के नेता अराजकता और अशांति फैलाकर सत्ता हथियाना चाहते हैं।
सीताराम दास ने कहा, 'ममता बनर्जी ने दिल्ली में जिस तरह के बयान दिए हैं, उससे लगता है कि इन नेताओं की बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी है। ये लोग देश में दंगा और अराजकता फैलाकर कुर्सी पाना चाहते हैं, लेकिन देश की जनता इन्हें नकार रही है। ये लोग नक्सलवादी सोच को बढ़ावा देकर देश को तोड़ना चाहते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग और मतदाता सूची शुद्धिकरण में जुटे अधिकारियों पर सवाल उठाकर ममता बनर्जी भारतीय संविधान को ही कठघरे में खड़ा कर रही हैं।
रामलीला मैदान में विवादित बयान
गौरतलब है कि रविवार को रामलीला मैदान में रैली के दौरान ममता बनर्जी की जुबान फिसली थी। उन्होंने कहा, 'हमारा बंगाल लूट लिया, हम दिल्ली से लूट...' — हालाँकि तत्काल सँभलते हुए उन्होंने जोड़ा, 'हम लूटेंगे नहीं, हम लोकतंत्र बचाएंगे।' यह क्षण सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ और राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया।
काफिर वाले बयान पर राजनीतिक विभाजन
ममता बनर्जी के एक अन्य वक्तव्य — 'जो काफिर हैं, हर रोज डरते हैं' — को लेकर भी विवाद गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। वहीं समाजवादी पार्टी का कहना है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया गठबंधन की एकता और उसके आख्यान की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
आगे क्या
संत समाज की यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि ममता बनर्जी के दिल्ली भाषण की राजनीतिक परछाईं उत्तर प्रदेश तक पहुँच गई है। भाजपा इस विवाद को चुनावी संदर्भ में भुनाने की कोशिश कर रही है, जबकि इंडिया गठबंधन के घटक दल फिलहाल असहमत संकेत दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बनर्जी इन आरोपों का औपचारिक जवाब देती हैं या नहीं।