सत्तनकुलम हिरासत में मौतों के मामले में नौ पुलिसकर्मियों को मिली मौत की सजा

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सत्तनकुलम हिरासत में मौतों के मामले में नौ पुलिसकर्मियों को मिली मौत की सजा

सारांश

मदुरै की अदालत ने सत्तनकुलम हिरासत में हुई मौतों के मामले में नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। यह निर्णय हिरासत में हिंसा के खिलाफ राष्ट्रीय बहस को पुनर्जीवित करता है।

Key Takeaways

  • मौत की सजा का फैसला हिरासत में हिंसा के खिलाफ सख्त संदेश है।
  • जयराज और बेनिक्स की मौत ने व्यापक आक्रोश पैदा किया।
  • सीबीआई द्वारा निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई की गई।
  • अदालत ने इस मामले को 'दुर्लभतम' श्रेणी में रखा।
  • साक्ष्यों का जानबूझकर विनाश किया गया था।

मदुरै, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मदुरै की प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने सोमवार को 2020 में हुई सत्तनकुलम हिरासत में मौतों के संबंध में दोषी पाए गए नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई। इस निर्णय ने हिरासत में होने वाली हिंसा पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस को फिर से जीवित कर दिया है।

यह मामला व्यापारी पी. जयराज (58) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) की मौत से संबंधित है, जिनकी पुलिस हिरासत में कथित तौर पर अमानवीय यातनाओं के कारण मृत्यु हुई थी। न्यायालय ने 23 मार्च, 2026 को सभी नौ आरोपियों को दोषी ठहराया था, लेकिन सजा पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

सजा सुनाते समय, अदालत ने अभियोजन पक्ष की इस दलील को स्वीकार किया कि यह अपराध 'दुर्लभतम' श्रेणी में आता है, जिसके लिए मृत्युदंड उचित है।

सजा सुनाने की प्रक्रिया के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और पीड़ितों के परिवार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील दोनों ने अधिकतम सजा की मांग की।

उन्हें तर्क दिया कि पीड़ितों को रात भर सत्तनकुलम पुलिस स्टेशन के भीतर अमानवीय यातनाएं दी गईं, जबकि उन्होंने कोई गंभीर अपराध नहीं किया था।

उन्होंने कहा कि इस क्रूरता के लिए कानून के तहत सबसे कठोर सजा उचित मानी जानी चाहिए।

यह मामला 2020 में पूरे देश में व्यापक आक्रोश पैदा कर चुका था, जिसके बाद मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच ने स्वतः संज्ञान लिया।

इसके बाद, निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए तत्कालीन एआईएडीएमके सरकार ने इस मामले की जांच राज्य पुलिस से सीबीआई को सौंप दी।

शुरुआत में, इस मामले में 10 पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया था। हालांकि, उनमें से एक, विशेष सब-इंस्पेक्टर पॉलदुरई की मुकदमे के दौरान कोविड-19 से संक्रमित होने के कारण मृत्यु हो गई, जिससे नौ पुलिसकर्मियों पर मुकदमा चलाया गया।

सीबीआई ने सितंबर 2020 में अपना प्राथमिक आरोप पत्र दाखिल किया, जिसके बाद अगस्त 2022 में एक पूरक आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया, जिसमें घटनाक्रम और जुटाए गए साक्ष्यों का विस्तृत विवरण दिया गया था।

जांच के अनुसार, जयराज को 19 जून, 2020 की शाम को कामराज प्रतिमा के पास स्थित उनकी दुकान से उठाया गया। उनके बेटे बेनिक्स को गिरफ्तारी की सूचना मिलने पर वह बाद में पुलिस स्टेशन पहुंचे और अधिकारियों के साथ झड़प के बाद उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया।

दोनों को कथित तौर पर रात भर हिरासत में गंभीर यातनाएं दी गईं। सीबीआई ने बताया कि पीड़ितों को बेरहमी से पीटा गया, उन्हें अपना खून साफ करने के लिए मजबूर किया गया और बाद में उन्हें एक झूठे मामले में फंसा दिया गया।

गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और वीडियो फुटेज के विश्लेषण सहित साक्ष्यों से पता चलता है कि अपराध के सबूतों को जानबूझकर नष्ट करने का प्रयास किया गया था।

Point of View

बल्कि यह भी दर्शाता है कि कानून का उल्लंघन करने वालों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। समाज की सुरक्षा और न्याय की स्थापना के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
NationPress
08/04/2026

Frequently Asked Questions

सत्तनकुलम मामले में क्या हुआ था?
सत्तनकुलम मामले में व्यापारी पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी, जो कथित तौर पर क्रूर यातनाओं के कारण हुई।
किस अदालत ने सजा सुनाई?
मदुरै की प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने इस मामले में सजा सुनाई।
सजा की मात्रा क्या थी?
नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई गई है।
इस मामले का सामाजिक प्रभाव क्या है?
यह मामला हिरासत में हिंसा के खिलाफ राष्ट्रीय बहस को बढ़ावा देता है और न्याय प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है।
क्या इस मामले में कोई और आरोपी था?
हां, शुरुआत में 10 पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया था, लेकिन उनमें से एक की मौत हो गई।
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