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पश्चिम बंगाल में चुनावी बयानबाजी: ईसीआई और तृणमूल कांग्रेस के बीच बढ़ी तल्खी

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पश्चिम बंगाल में चुनावी बयानबाजी: ईसीआई और तृणमूल कांग्रेस के बीच बढ़ी तल्खी

सारांश

पश्चिम बंगाल में चुनाव को लेकर ईसीआई और तृणमूल कांग्रेस के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

मुख्य बातें

ईसीआई और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है।
तृणमूल कांग्रेस ने ईसीआई के बयान को चुनौती दी है।
चुनाव की प्रक्रिया पर दोनों पक्षों के बयानों का असर हो सकता है।

कोलकाता, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में चुनाव को लेकर इलेक्शन कमीशन और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक संवाद तीव्र हो गया है।

बुधवार को इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ईसीआई) ने एक आधिकारिक बयान जारी किया, जिसमें तृणमूल कांग्रेस पर राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को बिना डर, हिंसा, धमकी और लालच के आयोजित कराने की जिम्मेदारी पर प्रश्न उठाए गए।

इस बयान के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में ईसीआई के मुख्यालय पहुंचा और चीफ इलेक्शन कमिश्नर (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की। पार्टी ने हाल ही में संपन्न हुए ज्यूडिशियल एडज्यूडिकेशन प्रोसेस में बड़ी संख्या में वोटर्स के नाम हटाए जाने की शिकायत की।

मीटिंग के बाद, ईसीआई ने हिंदी और इंग्लिश में एक बयान जारी किया, जिसका शीर्षक था: “ईसीआई की तृणमूल कांग्रेस से सीधी बात।”

बयान में कहा गया, “इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव निश्चित रूप से होंगे: बिना डर, बिना हिंसा, बिना धमकी, बिना लालच, बूथ जैमिंग और सोर्स जैमिंग के।”

तृणमूल कांग्रेस ने ईसीआई के बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया दी और पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल पर बंगाली और अंग्रेजी में एक जवाबी बयान पोस्ट किया। इस बयान की शीर्षक थी: “भारतीय चुनाव आयोग से हमारी सीधी बात।”

इसमें पार्टी ने लिखा, “इस बार चुनाव होने चाहिए: दिल्ली के नियंत्रण से मुक्त, राजनीतिक भेदभाव से मुक्त, चुनिंदा टारगेटिंग से मुक्त, और दोहरे मापदंडों से मुक्त।”

इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या एक संवैधानिक संस्था ऐसे चुनौतीपूर्ण शब्दों के साथ बयान जारी कर सकती है।

पार्टी ने कहा, “क्या एक न्यूट्रल संवैधानिक संस्था से ऐसे व्यवहार की उम्मीद की जा सकती है? सीधे शब्दों में कहें तो: अब अपना मास्क उतारो!

यह विवाद यह स्पष्ट करता है कि पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले ईसीआई और तृणमूल कांग्रेस के बीच तनावपूर्ण राजनीतिक संवाद जारी है। दोनों पक्ष सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रख रहे हैं, और यह बहस चुनाव के दौरान प्रशासन और राजनीतिक प्रक्रिया पर प्रभाव डाल सकती है।

बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और राज्यसभा में पार्टी के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने सीईसी पर मीटिंग के दौरान ‘नॉन-कोऑपरेशन’ का आरोप लगाया। ओ’ब्रायन ने कहा कि सीईसी ने उनके साथ बुरा व्यवहार किया और उन्हें 'गेट लॉस्ट' कहने के बाद बाहर जाने के लिए कहा।

ईसीआई कार्यालय से बाहर आने के बाद ओ’ब्रायन ने मीडिया से कहा, “हम मीटिंग में कुछ भी कह नहीं पाए। वहां कोई चर्चा नहीं हुई। ऐसा लगा कि सीईसी केवल खुद से बात कर रहे थे।”

हालांकि, ईसीआई के अंदर के सूत्रों का कहना है कि सीईसी ने बार-बार तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधियों से अनुरोध किया कि वे बातचीत के दौरान अपनी आवाज ऊंची न करें और अनुचित या अपमानजनक भाषा का उपयोग न करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि पश्चिम बंगाल में चुनावी राजनीति में तनाव बढ़ रहा है। ईसीआई और तृणमूल कांग्रेस के बीच यह टकराव न केवल राजनीतिक संवाद को प्रभावित कर सकता है, बल्कि यह चुनावी प्रक्रिया को भी गंभीर रूप से चुनौती दे सकता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में ईसीआई और तृणमूल कांग्रेस के बीच क्या विवाद है?
ईसीआई ने तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि वह चुनाव को बिना डर और हिंसा के आयोजना करने में असफल है।
तृणमूल कांग्रेस ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
तृणमूल कांग्रेस ने ईसीआई के बयान का विरोध करते हुए कहा कि चुनाव दिल्ली के नियंत्रण से मुक्त होने चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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