सौरभ शुक्ला: हर नए किरदार को नए अनुभव की तरह जीना चाहिए, पुरानी सफलताओं का बोझ नहीं उठाना चाहिए

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सौरभ शुक्ला: हर नए किरदार को नए अनुभव की तरह जीना चाहिए, पुरानी सफलताओं का बोझ नहीं उठाना चाहिए

सारांश

फिल्म उद्योग में कलाकारों पर पुराने किरदारों की सफलता का दबाव होता है। सौरभ शुक्ला का कहना है कि असली कलाकार वही है जो हर नए किरदार को एक नए अनुभव के रूप में जीता है। जानें उनके विचारों के पीछे की सोच।

Key Takeaways

  • हर नए किरदार को नए अनुभव के रूप में जीना चाहिए।
  • अपने पुराने काम का बोझ नहीं उठाना चाहिए।
  • जुनून के साथ काम करने से प्रदर्शन में सुधार होता है।
  • क्लासिक फिल्में योजना बनाकर नहीं, बल्कि ईमानदारी से बनाई जाती हैं।
  • दबाव में आकर काम का आनंद नहीं लिया जा सकता।

मुंबई, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। फिल्म उद्योग में जब किसी कलाकार का किरदार दर्शकों में लोकप्रिय हो जाता है, तो उस पर आगे ऐसे ही रोल निभाने का दबाव बढ़ जाता है। कई कलाकार इस दबाव के कारण अपने भविष्य के प्रोजेक्ट्स में खुद को सीमित कर लेते हैं। इस संदर्भ में दिग्गज अभिनेता सौरभ शुक्ला का कहना है कि असली कलाकार वही होता है, जो अपने पिछले काम का बोझ लिए बिना हर नए किरदार को एक नए अनुभव के रूप में जीता है।

राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान जब सौरभ से पूछा गया कि क्या यादगार भूमिकाएं निभाने के बाद कलाकार पर एक अलग जिम्मेदारी आ जाती है, तो उन्होंने कहा, "कलाकार को अपने पुराने किरदारों या उनकी सफलता का दबाव नहीं लेना चाहिए। अगर कोई कलाकार हर नए काम में यह सोचता है कि उसे अपने पिछले काम से बेहतर करना है या उसी स्तर को बनाए रखना है, तो वह अपने काम का आनंद नहीं ले पाएगा।"

अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए सौरभ ने क्रिकेट का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, "सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर, एमएस धोनी और विराट कोहली जैसे महान खिलाड़ी हर गेंद को खेल का हिस्सा मानकर खेलते हैं। वे इस दबाव में नहीं रहते कि उन्हें अपने पुराने रिकॉर्ड्स को दोहराना है। इसी तरह, एक कलाकार को भी हर नए किरदार को बिना किसी दबाव के निभाना चाहिए।"

उन्होंने आगे कहा, "जब कोई कलाकार अभिनय करता है, तो उसे अपने पुराने काम का बोझ नहीं उठाना चाहिए। कलाकार को इस बात की खुशी होनी चाहिए कि उसे कुछ नया बनाने का मौका मिल रहा है। हर किरदार एक नया अनुभव होता है और उसे उसी तरह जीना चाहिए। यदि कलाकार जुनून के साथ काम करेगा, तो उसका प्रदर्शन अपने आप बेहतर हो जाएगा।"

उन्होंने यह भी कहा, "क्लासिक फिल्में कभी भी योजना बनाकर नहीं बनाई जातीं। जब कोई कलाकार ईमानदारी से और दिल से काम करता है, तो वही काम बाद में क्लासिक बन जाता है।"

Point of View

जिससे उनकी कला में नवीनता और ताजगी बनी रहती है।
NationPress
02/04/2026

Frequently Asked Questions

क्या कलाकारों पर पुरानी सफलताओं का दबाव होता है?
जी हां, कई कलाकारों पर अपने पिछले सफल किरदारों को दोहराने का दबाव होता है।
सौरभ शुक्ला का क्या मानना है?
सौरभ शुक्ला का मानना है कि असली कलाकार वही है जो हर नए किरदार को एक नए अनुभव के रूप में जीता है।
क्या क्लासिक फिल्में योजना बनाकर बनाई जाती हैं?
नहीं, सौरभ का कहना है कि क्लासिक फिल्में ईमानदारी से किए गए काम से बनती हैं।
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