उदित राज का बड़ा बयान: सावरकर की 'पुण्यभूमि' परिभाषा मुसलमानों-ईसाइयों को करती है अलग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस प्रवक्ता उदित राज ने 6 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में सावरकर की हिंदुत्व परिभाषा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वीर सावरकर के 'पुण्यभूमि' फॉर्मूले के तहत भारत मुसलमानों और ईसाइयों के लिए जन्मभूमि तो है, लेकिन पुण्यभूमि नहीं — और इसीलिए यह हिंदुत्व नहीं, बल्कि समाज को बाँटने वाली सोच है। उनकी यह प्रतिक्रिया कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के हिंदुत्व पर दिए गए बयान की पृष्ठभूमि में सामने आई है।
सावरकर की परिभाषा पर सवाल
उदित राज ने कहा कि सावरकर के 'पुण्यभूमि' वाले फॉर्मूले को आधार बनाया जाए, तो मुसलमानों और ईसाइयों को स्वाभाविक रूप से इस परिभाषा के बाहर कर दिया जाता है। उनके अनुसार, यह सोच देश को धर्म के आधार पर विभाजित करने का काम करती है, न कि एकजुट करने का।
उन्होंने आगे कहा कि 'हिंदू कौन है' — इस सवाल का जवाब देना आज के संदर्भ में आसान नहीं है, और इस पर खुलकर बहस करने की हिम्मत राजनीतिक दलों में नहीं दिखती।
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान का हवाला
उदित राज ने दावा किया कि देश की आज़ादी की लड़ाई में 61 हज़ार मुसलमानों और 8 हज़ार सिखों ने अपनी जान दी, और सवर्ण हिंदुओं का योगदान अपेक्षाकृत कम रहा। उन्होंने कहा कि जो लोग वास्तव में शहीद हुए, उनके बलिदान को याद रखा जाना चाहिए।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों के पूर्वजों का आज़ादी की लड़ाई से कोई विशेष संबंध नहीं रहा, वे आज राष्ट्रवाद का सबसे बड़ा प्रमाण पत्र बाँट रहे हैं — और इससे बड़ा विरोधाभास कुछ नहीं हो सकता।
संसद और चर्चा पर तंज
उदित राज ने कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली चर्चा की चुनौती दी है, लेकिन संसद को 'बंधक' बना रखा गया है। उनके मुताबिक, स्पीकर द्वारा माइक म्यूट कर दिया जाता है और विपक्ष को बोलने का मौका नहीं मिलता।
उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि हिंदुत्व की राजनीति करने वाले लोग खुद उसी जाल में फंस गए हैं, क्योंकि वे न तो इसकी ठोस परिभाषा दे पाते हैं और न ही खुली बहस के लिए तैयार होते हैं।
इरफान अंसारी के बयान पर प्रतिक्रिया
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने दावा किया था कि 40 लाख युवा राहुल गांधी के इशारे का इंतजार कर रहे हैं और चेतावनी दी थी कि भारत का हाल बांग्लादेश और नेपाल से भी बुरा हो सकता है। इस पर उदित राज ने पलटवार करते हुए कहा कि चाहे 4 करोड़ लोग भी हों, कांग्रेस का रास्ता लोकतांत्रिक और अहिंसक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नेपाल में उन्माद के दौरान संसद को आग लगाई गई और बांग्लादेश में जो हुआ वह वीभत्स था — कांग्रेस का मार्ग वह नहीं है। साथ ही उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि पदयात्रा करना — और कई बार ऐसा लगता है मानो वे सत्ता में नहीं, विपक्ष में हों।
आगे क्या
हिंदुत्व की परिभाषा और स्वतंत्रता संग्राम में विभिन्न समुदायों के योगदान को लेकर यह बहस राजनीतिक रूप से और तीखी होने की संभावना है, खासकर आगामी चुनावी मौसम को देखते हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विमर्श मतदाताओं की पहचान और राष्ट्रवाद की व्याख्या को लेकर गहरी खाई को उजागर करता है।