गाजीपुर: स्कूल परिसर में करंट लगने से छात्र उत्कर्ष गुप्ता की मौत, जांच के आदेश
सारांश
मुख्य बातें
गाजीपुर के जंगीपुर थाना क्षेत्र के एक निजी स्कूल में शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 की सुबह बिजली के तार की चपेट में आने से एक छात्र की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक छात्र की पहचान उत्कर्ष गुप्ता के रूप में हुई है। घटना ने स्कूल परिसरों में बच्चों की सुरक्षा और विद्युत प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का क्रम
उत्कर्ष गुप्ता परीक्षा देने के लिए उस दिन विद्यालय पहुँचा था। उस समय परिसर खुला था और कुछ अन्य बच्चे भी वहाँ खेल रहे थे। इसी दौरान उत्कर्ष परिसर में लगे बिजली के तार की चपेट में आ गया, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गया। विद्यालय प्रबंधन ने उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज पहुँचाया, जहाँ चिकित्सकों ने उपचार के दौरान उसे मृत घोषित कर दिया।
परिवार का आरोप: लापरवाही और सूचना छुपाने का दावा
मृतक के मामा दीपक गुप्ता ने आरोप लगाया कि विद्यालय परिसर में बंदरों के आतंक से बचाव के लिए ज़मीन से महज दो से तीन फीट की ऊँचाई पर बिजली का तार लगाया गया था, जो बच्चों के लिए अत्यंत खतरनाक था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के बाद विद्यालय प्रबंधन ने परिवार को कोई सूचना नहीं दी।
दीपक गुप्ता के अनुसार, किसी अन्य माध्यम से घटना की जानकारी मिलने पर वह पहले विद्यालय पहुँचे, लेकिन उत्कर्ष वहाँ नहीं मिला। इसके बाद जिला अस्पताल पहुँचने पर उन्हें अपने भांजे की मृत्यु की जानकारी हुई। इस कथित लापरवाही ने परिवार के दुख को और गहरा कर दिया है।
परिवार में पसरा मातम
मासूम बेटे को खोने के गम में उत्कर्ष के पिता की हालत अत्यंत गंभीर बताई जा रही है और वे कुछ भी बोल पाने की स्थिति में नहीं हैं। पूरे परिवार में शोक की लहर छाई हुई है। पड़ोसियों और परिचितों का घर पर आना-जाना लगा हुआ है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रकरण की जाँच शुरू कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जाँच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों की सुरक्षा पर बड़े सवाल
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में स्कूल परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस तेज़ है। आलोचकों का कहना है कि निजी विद्यालयों में बुनियादी सुरक्षा मानकों की अनदेखी अक्सर होती है। गौरतलब है कि बंदरों से बचाव के नाम पर बच्चों की पहुँच वाले स्थान पर बिजली का तार लगाना किसी भी सुरक्षा मानक के अनुरूप नहीं है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासनिक जाँच में विद्यालय प्रबंधन की जवाबदेही किस हद तक तय होती है।