जनरल उपेंद्र द्विवेदी बने जम्मू-कश्मीर राइफल्स व लद्दाख स्काउट्स के मानद 'कर्नल ऑफ द रेजिमेंट'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जम्मू-कश्मीर राइफल्स और लद्दाख स्काउट्स रेजिमेंट के मानद 'कर्नल ऑफ द रेजिमेंट' का दायित्व औपचारिक रूप से ग्रहण किया है। 23 जून 2026 को आयोजित एक गरिमामय सैन्य समारोह में यह पद उन्हें सौंपा गया, जो उनके और इन दोनों ऐतिहासिक रेजिमेंटों के बीच दशकों पुराने संबंध को एक बार फिर संस्थागत रूप देता है।
पद क्यों छोड़ा था और अब क्यों लिया
जब जनरल द्विवेदी ने भारतीय सेना की सर्वोच्च कमान संभाली थी, तब उन्होंने स्वेच्छा से जम्मू-कश्मीर राइफल्स एवं लद्दाख स्काउट्स के कर्नल ऑफ द रेजिमेंट का पद त्याग दिया था। उनका यह निर्णय इस सिद्धांत पर आधारित था कि सेनाध्यक्ष का दायित्व किसी एक रेजिमेंट तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण सेना के प्रति समान होता है। अब सेवाकाल के उचित चरण में उन्होंने यह मानद पद पुनः स्वीकार किया है, जो भारतीय सेना की नेतृत्व परंपराओं के अनुरूप है।
समारोह का विवरण
इस अवसर पर आयोजित सैन्य समारोह में वर्तमान कर्नल ऑफ द रेजिमेंट लेफ्टिनेंट जनरल एम. पी. सिंह ने जनरल द्विवेदी को परंपरागत मानद कर्नल की बैटन भेंट की। यह बैटन-हस्तांतरण भारतीय सेना में रेजिमेंटल निरंतरता और नेतृत्व-हस्तांतरण का प्रतीकात्मक अनुष्ठान है। समारोह में रेजिमेंट के वर्तमान अधिकारी, जवान और पूर्व सैनिक भी उपस्थित रहे।
'कर्नल ऑफ द रेजिमेंट' पद का महत्व
भारतीय सेना में 'कर्नल ऑफ द रेजिमेंट' एक मानद किंतु अत्यंत प्रतिष्ठित पद है, जो सामान्यतः लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के वरिष्ठ अधिकारी को दिया जाता है। यह पद नियमित सैन्य रैंक 'कर्नल' से पूरी तरह अलग है। इस भूमिका में अधिकारी रेजिमेंट के नैतिक संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं — सैनिकों और उनके परिवारों का मनोबल बनाए रखते हैं, रेजिमेंटल परंपराओं की रक्षा करते हैं और पूरी रेजिमेंट को एक परिवार की भाँति एकजुट रखते हैं। यह पद केवल उसी अधिकारी को दिया जाता है जिसका उस रेजिमेंट से गहरा और दीर्घकालिक जुड़ाव रहा हो।
जम्मू-कश्मीर राइफल्स और लद्दाख स्काउट्स की विरासत
जम्मू-कश्मीर राइफल्स भारतीय सेना की उन रेजिमेंटों में से एक है जिसने कारगिल युद्ध सहित अनेक संघर्षों में असाधारण शौर्य का प्रदर्शन किया है। लद्दाख स्काउट्स उच्च-ऊँचाई वाले दुर्गम इलाकों में अभियानों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित रेजिमेंट है, जिसने सियाचिन ग्लेशियर और पूर्वी लद्दाख में अपनी अदम्य भूमिका से राष्ट्रीय सुरक्षा में अमूल्य योगदान दिया है। जनरल द्विवेदी का इन दोनों रेजिमेंटों का मानद कर्नल बनना इनकी गौरवशाली विरासत को सर्वोच्च सैन्य नेतृत्व की स्वीकृति है।
आगे की राह
यह नियुक्ति रेजिमेंट के अधिकारियों, जवानों और पूर्व सैनिकों के लिए गर्व का विषय बताई जा रही है। जनरल द्विवेदी के इस दायित्व-ग्रहण से दोनों रेजिमेंटों में रेजिमेंटल भावना और मनोबल को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। भारतीय सेना की यह परंपरा नेतृत्व, निष्ठा और रेजिमेंटल एकता के उन मूल्यों को रेखांकित करती है जो सेना की आधारशिला हैं।