8 अक्टूबर 2026
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राजस्थान एसीबी की कार्रवाई: भरतपुर के नदबई में सीनियर मेडिकल ऑफिसर और बिचौलिया ₹35,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार

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राजस्थान एसीबी की कार्रवाई: भरतपुर के नदबई में सीनियर मेडिकल ऑफिसर और बिचौलिया ₹35,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार

सारांश

भरतपुर के नदबई में एसीबी के ट्रैप ऑपरेशन में सरकारी अस्पताल का एक सीनियर मेडिकल ऑफिसर और उसका कथित बिचौलिया रंगे हाथ पकड़े गए — मारपीट पीड़ित के पक्ष में एमएलसी रिपोर्ट बनाने के बदले ₹35,000 की माँग का मामला।

मुख्य बातें

राजस्थान एसीबी ने 8 अक्टूबर 2026 को भरतपुर जिले के नदबई में ट्रैप ऑपरेशन चलाया।
सीनियर मेडिकल ऑफिसर शशिकांत शर्मा और बिचौलिए त्रिलोकचंद शर्मा उर्फ चीनू को ₹35,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।
रिश्वत मारपीट पीड़ित के पक्ष में 'मजबूत' मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) रिपोर्ट बनाने के एवज में माँगी गई थी।
ऑपरेशन DIG ओमप्रकाश मीणा की देखरेख में और DSP प्रेमचंद मीणा के नेतृत्व में संचालित हुआ।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाएगा; आगे की जाँच जारी है।

राजस्थान एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने 8 अक्टूबर 2026 को भरतपुर जिले के नदबई स्थित सरकारी अस्पताल के सीनियर मेडिकल ऑफिसर शशिकांत शर्मा और उनके कथित बिचौलिए त्रिलोकचंद शर्मा उर्फ चीनू को ₹35,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। ट्रैप ऑपरेशन में बरामद रिश्वत की रकम त्रिलोकचंद शर्मा की पैंट की जेब से मिली, जबकि शशिकांत शर्मा को उनके सरकारी आवास पर हिरासत में लिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

एसीबी के अनुसार, एक शिकायतकर्ता के परिवार के सदस्य नदबई पुलिस स्टेशन में दर्ज मारपीट के एक मामले में घायल हुए थे, जिसके चलते उनकी मेडिकल जाँच सरकारी अस्पताल में होनी थी। आरोप है कि शशिकांत शर्मा ने घायलों के पक्ष में एक 'मजबूत' मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) रिपोर्ट तैयार करने के एवज में ₹35,000 की माँग की।

यह माँग सीधे नहीं, बल्कि कथित बिचौलिए त्रिलोकचंद शर्मा उर्फ चीनू के जरिए की गई। शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना एसीबी को दी, जिसके बाद ब्यूरो ने जाल बिछाया।

ट्रैप ऑपरेशन कैसे चला

एसीबी की धौलपुर यूनिट ने पहले शिकायत की गुप्त जाँच की और रिश्वत की माँग की पुष्टि के बाद ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम दिया। यह पूरा ऑपरेशन एसीबी भरतपुर रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस ओमप्रकाश मीणा की देखरेख में और एसीबी धौलपुर यूनिट के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस प्रेमचंद मीणा के नेतृत्व में संचालित किया गया।

ट्रैप के दौरान एसीबी अधिकारियों ने कथित तौर पर त्रिलोकचंद शर्मा को शशिकांत शर्मा की ओर से रिश्वत की रकम स्वीकार करते पकड़ा। बरामद रकम उनकी पैंट की जेब में मिली।

कानूनी कार्रवाई

एसीबी ने बताया कि दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। आगे की पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

गौरतलब है कि सरकारी अस्पतालों में एमएलसी रिपोर्ट किसी भी चोट या मारपीट के मामले में अदालती साक्ष्य के रूप में अहम भूमिका निभाती है, जो इस प्रकार की माँग को और भी गंभीर बनाती है।

क्या होगा आगे

एसीबी के अनुसार, दोनों आरोपियों से विस्तृत पूछताछ जारी है और यह जाँच की जा रही है कि क्या इस प्रकार की रिश्वतखोरी का सिलसिला पहले भी चला है। यह मामला राजस्थान में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार की पड़ताल के लिए एक नई नज़ीर बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न्यायिक प्रक्रिया से खिलवाड़ भी है — क्योंकि एमएलसी रिपोर्ट अदालत में साक्ष्य की भूमिका निभाती है। यह मामला दर्शाता है कि सरकारी अस्पतालों में भ्रष्टाचार केवल वित्तीय नुकसान नहीं पहुँचाता, बल्कि कमज़ोर पक्षों के लिए न्याय की राह भी अवरुद्ध करता है। राजस्थान एसीबी की सक्रियता सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि ऐसे बिचौलिए नेटवर्क सरकारी अस्पतालों में कितने गहरे जड़ें जमाए हुए हैं और क्या एकल गिरफ्तारियाँ इस ढाँचे को तोड़ने के लिए पर्याप्त हैं।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान एसीबी ने नदबई में किसे और क्यों गिरफ्तार किया?
एसीबी ने नदबई सरकारी अस्पताल के सीनियर मेडिकल ऑफिसर शशिकांत शर्मा और उनके कथित बिचौलिए त्रिलोकचंद शर्मा उर्फ चीनू को ₹35,000 की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। यह रिश्वत एक मारपीट पीड़ित के परिवार के पक्ष में 'मजबूत' एमएलसी रिपोर्ट बनाने के बदले माँगी गई थी।
एमएलसी रिपोर्ट क्या होती है और इसमें रिश्वत क्यों माँगी जाती है?
मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) रिपोर्ट किसी चोट या अपराध के शिकार व्यक्ति की डॉक्टरी जाँच का आधिकारिक दस्तावेज़ है, जो अदालती कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत होता है। आरोप है कि शशिकांत शर्मा ने पीड़ित के पक्ष में रिपोर्ट को 'मजबूत' बनाने के एवज में रिश्वत माँगी, जिससे यह मामला न्यायिक प्रक्रिया से भी जुड़ा हो जाता है।
ट्रैप ऑपरेशन किसने और कैसे चलाया?
एसीबी की धौलपुर यूनिट ने पहले शिकायत की गुप्त जाँच कर रिश्वत की माँग की पुष्टि की। इसके बाद ट्रैप ऑपरेशन एसीबी भरतपुर रेंज के DIG ओमप्रकाश मीणा की देखरेख में और एसीबी धौलपुर यूनिट के DSP प्रेमचंद मीणा के नेतृत्व में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों पर क्या कानूनी कार्रवाई होगी?
एसीबी ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। आगे की पूछताछ और जाँच जारी है।
शिकायतकर्ता ने पहले कहाँ मामला दर्ज कराया था?
शिकायतकर्ता ने पहले नदबई पुलिस स्टेशन में मारपीट का मामला दर्ज कराया था, जिसके बाद घायल परिवार के सदस्यों की मेडिकल जाँच नदबई सरकारी अस्पताल में होनी थी। इसी दौरान आरोपी मेडिकल ऑफिसर ने कथित तौर पर रिश्वत की माँग की।
राष्ट्र प्रेस
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