शशि थरूर का दावा: केरल चुनाव में भाजपा का कोई अस्तित्व नहीं, यूडीएफ की होगी स्पष्ट जीत
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तिरुवनंतपुरम, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केरल विधानसभा चुनावों से पूर्व, कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को यह आश्वासन दिया कि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) "एक स्पष्ट जीत" की ओर अग्रसर है। उन्होंने सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार के विरुद्ध व्यापक एंटी-इंकम्बेंसी और जनता में बदलाव की बढ़ती चाह को इसके मुख्य कारण के रूप में बताया।
भाजपा की संभावनाओं को नकारते हुए थरूर ने इसे वर्तमान में केरल विधानसभा में "शून्य सीटों वाली पार्टी" करार दिया। उन्होंने कहा, "यदि वे किसी तरह एक, दो या तीन सीटें भी जीत जाते हैं, तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।" उन्होंने यह भी कहा कि सरकार गठन में भाजपा की कोई भूमिका नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केरल में लगातार की जा रही रैलियों पर कटाक्ष करते हुए थरूर ने कहा कि भाजपा की राष्ट्रीय लोकप्रियता राज्य स्तर पर सीटों में तब्दील नहीं होती। उन्होंने कहा, "लोग जानते हैं कि वह यहाँ मुख्यमंत्री बनने नहीं जा रहे हैं। इसलिए संसदीय चुनावों में भाजपा को जो थोड़ी-बहुत सफलता मिल सकती है, वह इस बात से अप्रासंगिक है कि केरल में सरकार कौन बनाएगा।"
उन्होंने मतदाताओं से यह अपील की कि वे एंटी-इंकम्बेंसी मत को भाजपा को देकर "बर्बाद" न करें। उन्होंने कहा, "अगर लोग बदलाव चाहते हैं, तो उन्हें यूडीएफ को वोट देना चाहिए ताकि हम एक मजबूत और प्रभावी सरकार बना सकें, जिसमें स्पष्ट बहुमत हो।"
सत्ताधारी सरकार के विकास के दावों, जैसे आवास और बुनियादी ढांचे पर थरूर ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ऊम्मन चांडी के नेतृत्व में यूडीएफ सरकारों ने समान या बेहतर कार्य किए थे। उन्होंने यह भी कहा कि विजिनजम पोर्ट जैसे प्रमुख प्रोजेक्ट यूडीएफ शासन में शुरू किए गए थे, भले ही उस समय वाम दलों ने इसका विरोध किया था।
आपदा प्रबंधन, विशेषकर वायनाड से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए थरूर ने कहा कि जवाबदेही सत्तारूढ़ सरकार की होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "जब आपदा आती है, तो यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है। उनके पास कई राहत कोष और तंत्र होते हैं। सवाल यह है कि उन्होंने क्या किया?" इसके साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे विपक्षी दलों ने स्वेच्छा से राहत कार्यों में योगदान दिया है।
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव पर थरूर ने कहा कि भारत को शांति की वकालत में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। यह संघर्ष केवल क्षेत्र को ही नहीं, बल्कि भारत जैसे देशों को भी प्रभावित कर रहा है, जो ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर हैं। भारत को शांति के लिए एक मजबूत आवाज बनना चाहिए। साथ ही, प्रधानमंत्री द्वारा क्षेत्रीय नेताओं से किसी भी कूटनीतिक संवाद का उन्होंने स्वागत किया।
मुख्यमंत्री बनने की संभावना पर पूछे गए प्रश्न को थरूर ने काल्पनिक बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "कांग्रेस की एक स्पष्ट प्रक्रिया है। चुनाव के बाद निर्वाचित विधायक और पार्टी नेतृत्व निर्णय लेते हैं। मैं उम्मीदवार नहीं हूं, लेकिन जो भी जिम्मेदारी संभालेगा, उसकी मदद के लिए मैं हमेशा उपलब्ध रहूंगा।"
केरल विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को होने हैं, जबकि नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।