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डोंबिवली: नाबालिग का प्रेग्नेंसी टेस्ट तीन बार पॉजिटिव, शास्त्रीनगर अस्पताल की जांच पर उठे गंभीर सवाल

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डोंबिवली: नाबालिग का प्रेग्नेंसी टेस्ट तीन बार पॉजिटिव, शास्त्रीनगर अस्पताल की जांच पर उठे गंभीर सवाल

सारांश

हीमोग्लोबिन की कमी के इलाज के लिए आई नाबालिग का शास्त्रीनगर अस्पताल में बिना परिवार की जानकारी के प्रेग्नेंसी टेस्ट किया गया — तीन बार पॉजिटिव, बाहर निगेटिव। 24 घंटे मानसिक तनाव में रही लड़की। KDMC आयुक्त ने जांच समिति बनाई।

मुख्य बातें

30 जुलाई को शास्त्रीनगर अस्पताल, डोंबिवली में हीमोग्लोबिन की कमी के इलाज के लिए आई नाबालिग लड़की का कथित तौर पर बिना परिवार की सहमति के प्रेग्नेंसी टेस्ट किया गया।
अस्पताल में तीन बार किए गए प्रेग्नेंसी टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई; परिवार का दावा है कि बाहर से कराई जांच निगेटिव रही।
रिपोर्ट की जानकारी मिलने के बाद नाबालिग करीब 24 घंटे तक गहरे मानसिक तनाव में रही।
BJP नगरसेवक दीपेश म्हात्रे ने मामले का खुलासा करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की।
KDMC आयुक्त अभिनव गोयल ने जांच के आदेश दिए; डॉ.
दीपा शुक्ला ने जांच समिति गठित करने की पुष्टि की।

डोंबिवली के शास्त्रीनगर अस्पताल में 30 जुलाई को हीमोग्लोबिन की कमी के इलाज के लिए आई एक नाबालिग लड़की का कथित तौर पर बिना परिवार की सहमति के प्रेग्नेंसी टेस्ट किया गया, जो तीनों बार पॉजिटिव आया — जबकि परिवार का दावा है कि बाहर से कराई गई जांच में रिपोर्ट निगेटिव निकली। इस घटना ने कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) की स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पताल की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

स्वास्थ्य मुख्य अधिकारी डॉ. दीपा शुक्ला के अनुसार, 30 जुलाई को वह नाबालिग लड़की अपनी माँ के साथ हेवी ब्लीडिंग की शिकायत लेकर शास्त्रीनगर अस्पताल पहुँची थी। डॉक्टर की सलाह पर उसे भर्ती किया गया और नियमित जांच के दौरान प्रेग्नेंसी टेस्ट भी किया गया, जो पॉजिटिव आया। रिपोर्ट की पुष्टि के लिए परीक्षण दोहराया गया और सोनोग्राफी की सलाह दी गई।

परिवार का दावा है कि यह टेस्ट तीन बार किया गया और तीनों बार रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हालाँकि, जब परिवार ने बाहर से प्रेग्नेंसी टेस्ट किट खरीदकर जांच कराई, तो रिपोर्ट निगेटिव आने का दावा किया गया। परिवार का यह भी आरोप है कि टेस्ट से पहले माता-पिता को उचित जानकारी नहीं दी गई।

नाबालिग पर मानसिक असर

प्रेग्नेंसी रिपोर्ट पॉजिटिव आने की सूचना मिलने के बाद नाबालिग लड़की को गहरे मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। परिवार के मुताबिक, करीब 24 घंटे तक वह लगातार रोती रही और बार-बार यह सवाल करती रही कि जब उसने ऐसा कुछ नहीं किया, तो उसके साथ यह स्थिति क्यों पैदा हुई। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच की माँग की है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नगरसेवक दीपेश म्हात्रे ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए जांच की माँग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि अस्पताल में प्रेग्नेंसी टेस्ट की रिपोर्ट तीन बार पॉजिटिव कैसे आई और बाहर की जांच में निगेटिव कैसे — क्या यह तकनीकी गलती थी, मानवीय चूक थी, या जांच प्रक्रिया में कोई कमी रही।

गौरतलब है कि शास्त्रीनगर अस्पताल इससे पहले भी चर्चा में रह चुका है — डॉक्टरों और नर्सों से मारपीट के मामले में शिवसेना के नगरसेवक रमेश म्हात्रे को तड़ीपार किया जा चुका है। उस मामले में जिन डॉक्टरों के खिलाफ आवाज उठाई गई थी, वही डॉक्टर अब फिर सवालों के घेरे में हैं।

प्रशासन की कार्रवाई

KDMC आयुक्त अभिनव गोयल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। डॉ. दीपा शुक्ला ने बताया कि मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

आगे क्या होगा

अब सभी की नजर इस बात पर है कि गठित जांच समिति अस्पताल की प्रयोगशाला रिपोर्ट, मेडिकल दस्तावेजों और बाहरी जांच के नतीजों के बीच के अंतर की असली वजह क्या बताती है। दीपेश म्हात्रे ने माँग की है कि यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही या गलती सामने आती है, तो संबंधित डॉक्टरों और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। यह मामला KDMC की स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही का एक बड़ा पैमाना बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

गोपनीयता और सार्वजनिक अस्पतालों में जवाबदेही के गहरे सवाल उठाता है। नाबालिग के माता-पिता को बिना बताए प्रेग्नेंसी टेस्ट करना, यदि सत्य है, तो यह मेडिकल एथिक्स का स्पष्ट उल्लंघन है। शास्त्रीनगर अस्पताल का पिछला विवादास्पद इतिहास यह संकेत देता है कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि प्रणालीगत निगरानी की विफलता हो सकती है। KDMC की जांच समिति यदि केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई, तो इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर आम जनता का भरोसा और कमजोर होगा।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शास्त्रीनगर अस्पताल में नाबालिग के साथ क्या हुआ?
30 जुलाई को हीमोग्लोबिन की कमी के इलाज के लिए आई एक नाबालिग लड़की का शास्त्रीनगर अस्पताल में कथित तौर पर बिना परिवार की जानकारी के प्रेग्नेंसी टेस्ट किया गया, जो तीन बार पॉजिटिव आया। परिवार का दावा है कि बाहर से कराई गई जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई।
KDMC ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
KDMC आयुक्त अभिनव गोयल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य मुख्य अधिकारी डॉ. दीपा शुक्ला ने बताया कि जांच के लिए एक समिति गठित की गई है और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
BJP नगरसेवक दीपेश म्हात्रे ने क्या माँग की है?
दीपेश म्हात्रे ने अस्पताल की जांच प्रक्रिया, प्रयोगशाला रिपोर्ट और बाहरी जांच के बीच के अंतर की निष्पक्ष जांच की माँग की है। उन्होंने कहा कि यदि लापरवाही सिद्ध हो, तो संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
नाबालिग लड़की पर इस घटना का क्या असर पड़ा?
प्रेग्नेंसी रिपोर्ट पॉजिटिव आने की जानकारी मिलने के बाद नाबालिग लड़की करीब 24 घंटे तक गहरे मानसिक तनाव में रही और लगातार रोती रही। परिवार के अनुसार, वह बार-बार यह सवाल कर रही थी कि उसने कुछ नहीं किया फिर भी यह स्थिति क्यों आई।
शास्त्रीनगर अस्पताल पहले भी विवादों में क्यों रहा है?
इससे पहले इस अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सों से मारपीट के मामले में शिवसेना के नगरसेवक रमेश म्हात्रे को तड़ीपार किया जा चुका है। उस मामले में जिन डॉक्टरों के खिलाफ आवाज उठाई गई थी, वही डॉक्टर अब फिर से सवालों के घेरे में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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