शी चिनफिंग ने यासुओ फुकुदा के निधन पर जताया शोक, चीन-जापान मैत्री में योगदान को सराहा
सारांश
मुख्य बातें
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पूर्व जापानी प्रधानमंत्री यासुओ फुकुदा के निधन पर उनके परिजनों को शोक संदेश भेजा और गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं। 27 अक्टूबर 2026 को बीजिंग से भेजे गए इस संदेश में शी ने फुकुदा को चीनी जनता का 'पुराना दोस्त' और एक विश्वसनीय राजनीतिज्ञ बताया, जिन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों को मज़बूत करने में जीवनभर योगदान दिया।
फुकुदा की विरासत और चीन से संबंध
शी चिनफिंग ने अपने संदेश में रेखांकित किया कि यासुओ फुकुदा जापान के एक जिम्मेदार और विश्वसनीय राजनेता थे। उन्होंने सही ऐतिहासिक दृष्टिकोण अपनाते हुए चीन-जापान मैत्री को दीर्घकाल तक आगे बढ़ाया। गौरतलब है कि अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान फुकुदा ने चीन के साथ दोनों देशों के चौथे राजनीतिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए, जिसने द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए महत्वपूर्ण सिद्धांत स्थापित किए।
बोआओ मंच में फुकुदा की भूमिका
बोआओ एशिया मंच परिषद के अध्यक्ष के रूप में फुकुदा ने एशिया में आदान-प्रदान और सहयोग को प्रोत्साहन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शी ने कहा कि चीन उनके इन प्रयासों को हमेशा याद रखेगा। यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब चीन-जापान संबंध कई क्षेत्रीय और ऐतिहासिक मुद्दों पर तनाव के दौर से गुज़र रहे हैं।
परिजनों से अपील और भविष्य की उम्मीद
शी चिनफिंग ने फुकुदा के परिजनों से अनुरोध किया कि वे उनका संकल्प थामे रखें और चीन-जापान मैत्री के कार्य में सक्रिय भूमिका निभाते रहें। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि वर्तमान जापानी प्रशासन पुरानी पीढ़ी के राजनीतिज्ञों के प्रयासों को सँजोए रखेगा और दोनों देशों के बीच चार राजनीतिक दस्तावेजों का पालन करते हुए द्विपक्षीय संबंधों के राजनीतिक आधार की रक्षा करेगा।
राजनयिक संदर्भ
फुकुदा का निधन ऐसे समय में हुआ है जब चीन-जापान संबंध विभिन्न स्तरों पर पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शी का यह संदेश केवल औपचारिक शोक नहीं, बल्कि बीजिंग की ओर से टोक्यो को एक कूटनीतिक संकेत भी है — कि वह द्विपक्षीय संबंधों को स्थापित ढाँचे के भीतर बनाए रखना चाहता है। फुकुदा के कार्यकाल में हस्ताक्षरित चौथे राजनीतिक दस्तावेज का उल्लेख इसी दिशा में एक जानबूझकर किया गया संदर्भ प्रतीत होता है।