25 अगस्त 2026
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असम बाढ़ राहत: शिवराज सिंह चौहान ने सीएम सरमा को सौंपे ₹5,000 करोड़ की आवासीय स्वीकृतियाँ

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असम बाढ़ राहत: शिवराज सिंह चौहान ने सीएम सरमा को सौंपे ₹5,000 करोड़ की आवासीय स्वीकृतियाँ

सारांश

असम में बाढ़ से 26,681 मकान तबाह और ₹480 करोड़ का नुकसान। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीएम हिमंता बिस्व सरमा को ₹5,000 करोड़ की आवासीय स्वीकृतियाँ सौंपीं। RKVY, MIDH, SMAM और PMAY-G के तहत कृषि व पुनर्वास पैकेज — चाय बागान श्रमिकों को भी पहली बार आवास योजना का लाभ मिलेगा।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 25 अगस्त 2026 को असम के सीएम हिमंता बिस्व सरमा को ₹5,000 करोड़ से अधिक की आवासीय स्वीकृतियाँ सौंपीं।
असम में बाढ़ से 26,681 मकान प्रभावित, प्रारंभिक नुकसान का अनुमान ₹480 करोड़ ।
RKVY के तहत ₹832.7 करोड़ , MIDH के तहत ₹96.87 करोड़ और SMAM के तहत ₹33.36 करोड़ स्वीकृत।
सर्वे अवधि 15 दिन बढ़ाई गई; चाय बागान श्रमिकों को पहली बार PMAY-G का लाभ मिलेगा।
असम में 9 लाख से अधिक महिलाएँ 'लखपति दीदी'; प्रत्येक विलेज ऑर्गेनाइजेशन को ₹1.50 लाख की सहायता प्रस्तावित।
असम के जैविक उत्पादों के निर्यात के लिए APEDA और नेशनल ऑर्गेनिक कोऑपरेटिव के साथ साझेदारी।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में मुलाकात की। इस बैठक में बाढ़ से तबाह असम के लिए ₹5,000 करोड़ से अधिक की आवासीय एवं कृषि स्वीकृतियाँ प्रदान की गईं। मुख्यमंत्री सरमा ने राज्य में बाढ़ से हुए व्यापक नुकसान, किसानों की समस्याओं और ग्रामीण पुनर्वास की ज़रूरतों से केंद्र को अवगत कराया।

बाढ़ से नुकसान और तत्काल राहत

असम में हाल की बाढ़ से 26,681 मकान प्रभावित हुए हैं और प्रारंभिक आकलन के अनुसार करीब ₹480 करोड़ के नुकसान का अनुमान है। बाढ़ प्रभावित परिवारों के सर्वे की अवधि 15 दिन बढ़ाई गई है, ताकि कोई भी पात्र परिवार सहायता से वंचित न रहे। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण और नए आवासों की स्वीकृति के लिए पत्र मुख्यमंत्री को सौंपे गए।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों का सर्वे पूरा होने के बाद पात्र परिवारों की सूची के आधार पर नए मकानों की स्वीकृति दी जाएगी। साथ ही, PMAY-G के लाभार्थियों की पहचान के लिए असम में विशेष सर्वे विंडो खोलने का भी निर्णय लिया गया है।

कृषि योजनाओं के तहत प्रमुख स्वीकृतियाँ

बैठक में असम के कृषि क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण स्वीकृतियाँ दी गईं। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत वर्ष 2026-27 के लिए असम को ₹553 करोड़ की केंद्रीय सहायता सहित कुल ₹832.7 करोड़ आवंटित किए गए। RKVY के तहत ₹279.5 करोड़ की परियोजनाएँ स्वीकृत की गईं।

कृषि मशीनीकरण के लिए SMAM के तहत ₹33.36 करोड़ की पहली मूल स्वीकृति जारी की गई। MIDH के अंतर्गत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सब्जी उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग ढाँचे के लिए ₹96.87 करोड़ की वार्षिक कार्ययोजना स्वीकृत की गई। इसके अतिरिक्त, सुरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए 1,500 नए बाँस पॉलीहाउस स्वीकृत किए गए।

चाय बागान श्रमिकों को विशेष राहत

केंद्रीय मंत्री चौहान ने असम सरकार द्वारा चाय बागान श्रमिकों को भूमि का पट्टा दिए जाने की सराहना की। उन्होंने बताया कि पहले पट्टा न होने के कारण बड़ी संख्या में चाय बागान श्रमिक PMAY-G का लाभ नहीं ले पा रहे थे। अब डिजिटल सर्वे के माध्यम से पात्र श्रमिक परिवारों के नाम दर्ज किए जाएंगे और सूची तैयार होने के बाद उन्हें भी आवास सहायता प्रदान की जाएगी।

महिला किसान और ग्रामीण सशक्तीकरण

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने असम में महिला किसानों को कृषि पावर वीडर उपलब्ध कराने की योजना की जानकारी दी, जिससे खेती की लागत कम करने और महिला किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। राज्य में 9 लाख से अधिक महिलाएँ 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय प्रत्येक विलेज ऑर्गेनाइजेशन को करीब ₹1.50 लाख की सहायता देने का प्रस्ताव भी रखा गया।

असम के जैविक कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार दिलाने के लिए APEDA तथा नेशनल ऑर्गेनिक कोऑपरेटिव लिमिटेड के साथ साझेदारी की जा रही है। राज्य की जैव विविधता, मसाला उत्पादन और राज्य पुष्प फॉक्सटेल ऑर्किड के विकास पर भी चर्चा हुई।

आगे का रास्ता

केंद्रीय मंत्री चौहान ने आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में असम के कृषि और ग्रामीण विकास के लिए धन एवं संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। मुख्यमंत्री सरमा ने केंद्र का आभार जताते हुए कहा कि ये स्वीकृतियाँ बाढ़ प्रभावित परिवारों, किसानों और ग्रामीण गरीबों के लिए बड़ी राहत हैं। दोनों पक्षों ने असम में कृषि तथा ग्रामीण विकास को गति देने के लिए निरंतर समन्वय बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की स्वीकृतियाँ प्रभावशाली दिखती हैं, लेकिन असल सवाल क्रियान्वयन की गति का है — असम में बाढ़ हर साल आती है और हर साल केंद्रीय पैकेजों की घोषणा होती है, फिर भी राज्य की बाढ़ संवेदनशीलता में संरचनात्मक बदलाव नहीं आया। चाय बागान श्रमिकों को PMAY-G से जोड़ना एक सकारात्मक नीतिगत सुधार है, जो वर्षों की चूक को सुधारता है। असली परीक्षा यह है कि सर्वे विंडो, डिजिटल सूचीकरण और पात्रता निर्धारण की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और समयबद्ध होती है — क्योंकि अतीत में ऐसे सर्वे अधूरे रहे हैं और पात्र परिवार लाभ से वंचित हो गए हैं।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवराज सिंह चौहान और सीएम सरमा की बैठक में क्या निर्णय हुए?
25 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के कृषि भवन में हुई बैठक में असम को ₹5,000 करोड़ से अधिक की आवासीय स्वीकृतियाँ, RKVY के तहत ₹832.7 करोड़, MIDH के तहत ₹96.87 करोड़ और SMAM के तहत ₹33.36 करोड़ की कृषि सहायता प्रदान की गई। बाढ़ प्रभावित किसानों को फसल और बीज सहायता देने पर भी सहमति बनी।
असम में बाढ़ से कितना नुकसान हुआ है?
प्रारंभिक आकलन के अनुसार असम में बाढ़ से 26,681 मकान प्रभावित हुए हैं और करीब ₹480 करोड़ के नुकसान का अनुमान है। राज्य सरकार ने राहत एवं पुनर्वास के लिए व्यापक सर्वे शुरू किया है, जिसकी अवधि 15 दिन बढ़ाई गई है।
चाय बागान श्रमिकों को PMAY-G का लाभ कैसे मिलेगा?
असम सरकार ने चाय बागान श्रमिकों को भूमि का पट्टा देना शुरू किया है, जिससे वे PMAY-G के लिए पात्र हो सकेंगे। डिजिटल सर्वे के माध्यम से पात्र श्रमिक परिवारों के नाम दर्ज किए जाएंगे और सूची तैयार होने के बाद उन्हें आवास निर्माण सहायता दी जाएगी।
असम के जैविक उत्पादों को बाज़ार दिलाने की क्या योजना है?
APEDA और नेशनल ऑर्गेनिक कोऑपरेटिव लिमिटेड के साथ साझेदारी की जा रही है, जिससे असम के जैविक कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार मिल सके। किसानों को उत्पादन से लेकर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात तक सहायता देने की योजना है।
असम में महिला किसानों के लिए क्या घोषणाएँ हुईं?
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने असम में महिला किसानों को कृषि पावर वीडर उपलब्ध कराने की योजना की जानकारी दी। राज्य में 9 लाख से अधिक महिलाएँ 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं और असम कृषि विश्वविद्यालय के इनक्यूबेटरों के सहयोग से महिला उद्यमों को और मज़बूत किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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