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रामनगर का श्री हनुमान धाम: हनुमान जी के 9 रूप, 12 लीलाएँ और चिट्ठी से पूरी होती है मन्नत

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रामनगर का श्री हनुमान धाम: हनुमान जी के 9 रूप, 12 लीलाएँ और चिट्ठी से पूरी होती है मन्नत

सारांश

नैनीताल के रामनगर में कोसी नदी के तट पर बसा श्री हनुमान धाम दुनिया का इकलौता मंदिर माना जाता है जहाँ हनुमान जी के 9 रूपों और 12 लीलाओं के एक साथ दर्शन होते हैं। यहाँ चिट्ठी लिखकर मन्नत माँगने की परंपरा इसे बाकी सभी हनुमान मंदिरों से अलग पहचान देती है।

मुख्य बातें

श्री हनुमान धाम , रामनगर ( नैनीताल जिला ) को विश्व का इकलौता मंदिर माना जाता है जहाँ हनुमान जी के 9 स्वरूपों और 12 लीलाओं के एक साथ दर्शन होते हैं।
धाम कोसी नदी के तट पर, हिमालय की वादियों के बीच, कुमाऊं क्षेत्र में स्थित है।
यहाँ भक्त लिखित चिट्ठी के माध्यम से हनुमान जी से मन्नत माँगते हैं — यह परंपरा इस धाम को विशेष बनाती है।
मंदिर सफेद संगमरमर से निर्मित है और परिसर में योग कक्ष व दिव्यांगजनों के लिए विशेष सेवा केंद्र भी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा कर इसकी भव्यता को रेखांकित किया।

नैनीताल जिले के रामनगर में कोसी नदी के तट पर स्थित श्री हनुमान धाम को विश्व का इकलौता ऐसा मंदिर माना जाता है जहाँ भगवान हनुमान के एक साथ 9 स्वरूपों और उनकी 12 पावन लीलाओं के दर्शन होते हैं। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में हिमालय की वादियों के बीच बसा यह धाम आस्था, कला और अध्यात्म का असाधारण संगम है।

धाम की विशिष्टता और स्थापत्य

श्री हनुमान धाम का निर्माण सफेद संगमरमर से किया गया है, जो इसकी भव्यता को और निखारता है। मंदिर परिसर में ध्यान एवं योग कक्ष, तथा दिव्यांगजनों के लिए विशेष विकलांग सेवा केंद्र की सुविधा भी उपलब्ध है। मंदिर की अनोखी वास्तुकला और भव्य मूर्तियाँ इसे सामान्य तीर्थस्थलों से अलग बनाती हैं।

यह धाम न केवल रामनगर बल्कि समूचे कुमाऊं क्षेत्र में श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। मंगलवार और शनिवार को यहाँ भक्तों की विशेष भीड़ उमड़ती है, हालाँकि प्रतिदिन का वातावरण भी किसी उत्सव से कम नहीं होता।

चिट्ठी से मन्नत — अनूठी परंपरा

इस धाम की सबसे विशेष और अनूठी परंपरा यह है कि भक्त अपनी मनोकामनाएँ या समस्याएँ एक लिखित पत्र के रूप में भगवान हनुमान के सामने रखते हैं। मान्यता है कि इस लिखित 'अर्जी' के माध्यम से बजरंगबली भक्त की बात सीधे सुनते हैं और उनकी इच्छाएँ अवश्य पूरी होती हैं।

भक्त अपनी पीड़ा, मन्नत या निवेदन को पत्र में लिखकर हनुमान जी को सौंपते हैं — यह परंपरा इस धाम को देश के अन्य हनुमान मंदिरों से अलग और विशेष पहचान देती है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब आस्था-पर्यटन उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा स्तंभ बनता जा रहा है।

मुख्यमंत्री धामी की प्रतिक्रिया

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा करते हुए लिखा, 'नैनीताल जिले के रामनगर में स्थित श्री हनुमान धाम सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, कला और अध्यात्म का एक अद्भुत संगम है। उत्तराखंड की हरी-भरी वादियों और शांत वातावरण के बीच बसा यह धाम हर भक्त को एक दिव्य शांति का एहसास कराता है।'

धामी ने यह भी कहा, 'कहा जाता है कि यहाँ बजरंगबली के दर्शन मात्र से ही सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और मन को असीम सुकून मिलता है। मंगलवार और शनिवार को यहाँ भक्तों का सैलाब उमड़ता है, लेकिन हर दिन यहाँ का नजारा किसी उत्सव से कम नहीं लगता।'

आम जनता और श्रद्धालुओं पर असर

गौरतलब है कि रामनगर पहले से ही जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के कारण पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान रखता है। श्री हनुमान धाम की बढ़ती ख्याति इस क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को एक नई ऊँचाई दे रही है। मंदिर में दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध विशेष सुविधाएँ इसे समावेशी तीर्थस्थल के रूप में भी स्थापित करती हैं।

आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री धामी की ओर से इस धाम को राज्य के प्रमुख धार्मिक-पर्यटन स्थलों में प्रोत्साहित किए जाने की संभावना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोज़गार को भी बल मिल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हनुमान धाम इस ढाँचे में 'आस्था + प्रकृति' की जोड़ी को मज़बूत करता है। असली सवाल यह है कि क्या बुनियादी ढाँचा — सड़क, पार्किंग, आवास — इस बढ़ते श्रद्धालु-प्रवाह को सँभाल पाएगा, या विकास की रफ़्तार में स्थल की पवित्रता और पारिस्थितिकी दोनों पर असर पड़ेगा।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री हनुमान धाम रामनगर कहाँ स्थित है?
श्री हनुमान धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर में कोसी नदी के तट पर हिमालय की वादियों के बीच स्थित है। यह धाम कुमाऊं क्षेत्र के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है।
इस मंदिर को विश्व का इकलौता हनुमान मंदिर क्यों कहा जाता है?
श्री हनुमान धाम को विश्व का इकलौता ऐसा मंदिर माना जाता है जहाँ एक ही स्थान पर भगवान हनुमान के 9 स्वरूपों और उनकी 12 पावन लीलाओं के एक साथ दर्शन किए जा सकते हैं। यह विशेषता इसे देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बनाती है।
हनुमान धाम में चिट्ठी लिखकर मन्नत माँगने की परंपरा क्या है?
इस धाम में भक्त अपनी मनोकामना या समस्या को एक लिखित पत्र (चिट्ठी) में लिखकर भगवान हनुमान के सामने रखते हैं। मान्यता है कि बजरंगबली इस लिखित 'अर्जी' को अवश्य सुनते हैं और भक्तों की इच्छाएँ पूरी करते हैं।
मंदिर में दर्शन के लिए कौन-से दिन विशेष महत्व रखते हैं?
मंगलवार और शनिवार को श्री हनुमान धाम में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है। हालाँकि, प्रतिदिन का वातावरण भी उत्सव जैसा ही रहता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मंदिर के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर मंदिर का वीडियो पोस्ट कर कहा कि यह धाम आस्था, कला और अध्यात्म का अद्भुत संगम है और यहाँ बजरंगबली के दर्शन मात्र से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। उन्होंने इसे पूरे कुमाऊं क्षेत्र में श्रद्धालुओं के बीच बेहद लोकप्रिय बताया।
राष्ट्र प्रेस
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