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नौ पसलियाँ टूटीं, फिर भी नीट री-एग्जाम दिया: श्रृष्टि दुबे की हिम्मत, धर्मेंद्र प्रधान की पहल

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नौ पसलियाँ टूटीं, फिर भी नीट री-एग्जाम दिया: श्रृष्टि दुबे की हिम्मत, धर्मेंद्र प्रधान की पहल

सारांश

नौ पसलियाँ टूटी थीं, फेफड़ों में चोट थी, वेंटिलेटर पर रह चुकी थीं — फिर भी श्रृष्टि दुबे ने नीट री-एग्जाम दिया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की त्वरित पहल ने एक असंभव लगने वाले सपने को हकीकत में बदल दिया।

मुख्य बातें

श्रृष्टि दुबे ने 21 जून 2026 को कोलकाता के बिनोदिनी गर्ल्स हाई स्कूल में नीट 2026 री-एग्जाम दिया।
14 जून की सड़क दुर्घटना में उनकी नौ पसलियाँ टूट गई थीं , फेफड़ों में चोट आई थी और वैस्कुलर ऑपरेशन हुआ था।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पहल पर अलग कमरे, मेडिकल सहायता और एंबुलेंस की विशेष व्यवस्था की गई।
मंत्री प्रधान ने परीक्षा के दौरान स्वयं पिता श्रीराम शिवजी दुबे को फोन कर हालचाल लिया।
देशभर में 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने नीट 2026 री-एग्जाम दिया, जो 3 मई की मूल परीक्षा में अनियमितताओं के कारण कराई गई।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की विशेष पहल के बाद कोलकाता की नीट अभ्यर्थी श्रृष्टि दुबे रविवार, 21 जून 2026 को नीट 2026 री-एग्जाम में शामिल हो सकीं — और यह तब, जब महज एक हफ्ते पहले एक गंभीर सड़क दुर्घटना में उनकी नौ पसलियाँ टूट गई थीं और फेफड़ों में गहरी चोट आई थी। यह मानवीय हस्तक्षेप उस वक्त आया जब देशभर में 20 लाख से अधिक अभ्यर्थी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह पुनर्परीक्षा दे रहे थे।

दुर्घटना से परीक्षा तक: श्रृष्टि की कहानी

14 जून 2026 को एक गंभीर सड़क दुर्घटना में श्रृष्टि की नौ पसलियाँ टूट गईं और फेफड़ों में चोट आई। उनका बड़ा वैस्कुलर ऑपरेशन हुआ और कुछ समय तक उन्हें कृत्रिम वेंटिलेशन पर रखा गया। इसके बावजूद उनकी इच्छाशक्ति डिगी नहीं — उन्होंने किसी भी हालत में नीट परीक्षा देने का संकल्प बनाए रखा।

श्रृष्टि के पिता श्रीराम शिवजी दुबे, जो एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं, ने शिक्षा मंत्री को अनुरोध पत्र लिखकर बताया कि उनकी बेटी परीक्षा देना चाहती है और अस्पताल प्रशासन आवश्यक चिकित्सा सहायता देने को तैयार है। उन्होंने परीक्षा केंद्र पर भूतल में बैठने की व्यवस्था, अस्पताल की पोशाक में प्रवेश और चेस्ट ड्रेन जैसे मेडिकल उपकरणों के साथ परीक्षा देने की अनुमति माँगी थी।

मंत्री की पहल और विशेष व्यवस्था

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए कोलकाता के धाकुरिया स्थित बिनोदिनी गर्ल्स हाई स्कूल परीक्षा केंद्र पर विशेष इंतज़ाम कराए। श्रृष्टि को अलग कमरे में बैठाया गया, मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई गई और परीक्षा केंद्र पर एंबुलेंस भी तैनात रखी गई।

परीक्षा शुरू होने के बाद मंत्री प्रधान ने स्वयं श्रृष्टि के पिता को फोन कर उनकी बेटी की स्थिति और परीक्षा के बारे में जानकारी ली। उन्होंने छात्रा को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि वह अच्छा प्रदर्शन करे और भविष्य में डॉक्टर बनकर अपने माता-पिता का नाम रोशन करे। मंत्री ने यह भी कहा कि कोलकाता आने पर वह श्रृष्टि से मिलने का प्रयास करेंगे।

परिवार की प्रतिक्रिया

श्रृष्टि के पिता श्रीराम शिवजी दुबे ने मंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा, 'आपकी मदद की वजह से ही मेरी बेटी आज परीक्षा दे पा रही है।' उनकी माँ ने बताया कि 14 जून को दुर्घटना के बाद उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी बेटी परीक्षा दे सकेगी। उन्होंने कहा, 'डॉक्टरों ने हमें विशेष अनुमति के लिए आवेदन करने की सलाह दी थी, ताकि वह अस्पताल के कपड़ों और मेडिकल उपकरणों के साथ परीक्षा में शामिल हो सके।'

नीट 2026 री-एग्जाम का व्यापक संदर्भ

यह पुनर्परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित मूल नीट परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं के कारण कराई गई। रविवार को देशभर में 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच इस री-एग्जाम में हिस्सा लिया। यह ऐसे समय में आया है जब नीट प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर देशभर में बहस जारी है।

श्रृष्टि दुबे का मामला इस पुनर्परीक्षा के बीच एक अलग मानवीय अध्याय बन गया — जो यह भी दर्शाता है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो तो असाधारण परिस्थितियों में भी रास्ता निकाला जा सकता है। आने वाले हफ्तों में री-एग्जाम के परिणाम और उसके बाद की काउंसेलिंग प्रक्रिया लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल की ओर भी इशारा करता है — नीट जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं में असाधारण परिस्थितियों के लिए कोई संस्थागत प्रोटोकॉल क्यों नहीं है, जिससे हर बार मंत्री-स्तरीय हस्तक्षेप की ज़रूरत पड़े? यह पुनर्परीक्षा स्वयं उस प्रणालीगत विफलता का नतीजा है जिसने 3 मई की मूल परीक्षा को विवादों में घेरा था। जब 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का भविष्य दाँव पर हो, तो अपवाद-आधारित दयालुता नहीं, बल्कि नियम-आधारित समावेश की ज़रूरत है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रृष्टि दुबे कौन हैं और उन्होंने नीट री-एग्जाम कैसे दिया?
श्रृष्टि दुबे कोलकाता की एक नीट अभ्यर्थी हैं, जिनकी 14 जून 2026 को सड़क दुर्घटना में नौ पसलियाँ टूट गई थीं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की विशेष पहल से उन्हें 21 जून को अलग कमरे, मेडिकल सहायता और एंबुलेंस की व्यवस्था के साथ परीक्षा देने का अवसर मिला।
धर्मेंद्र प्रधान ने श्रृष्टि के लिए क्या विशेष व्यवस्था कराई?
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कोलकाता के धाकुरिया स्थित बिनोदिनी गर्ल्स हाई स्कूल परीक्षा केंद्र पर श्रृष्टि के लिए अलग कमरा, मेडिकल सहायता और एंबुलेंस की व्यवस्था कराई। उन्होंने परीक्षा के दौरान स्वयं छात्रा के पिता को फोन कर हालचाल भी लिया।
नीट 2026 री-एग्जाम क्यों कराई गई?
नीट 2026 री-एग्जाम 3 मई 2026 को आयोजित मूल परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं के कारण कराई गई। रविवार 21 जून को देशभर में 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह पुनर्परीक्षा दी।
श्रृष्टि के पिता ने शिक्षा मंत्री से क्या अनुरोध किया था?
श्रृष्टि के पिता श्रीराम शिवजी दुबे ने शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर परीक्षा केंद्र पर भूतल में बैठने की व्यवस्था, अस्पताल की पोशाक में प्रवेश और चेस्ट ड्रेन जैसे मेडिकल उपकरणों के साथ परीक्षा देने की अनुमति माँगी थी। अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ सहायता देने की सहमति दी थी।
श्रृष्टि दुबे की दुर्घटना कब और कैसे हुई थी?
14 जून 2026 को एक गंभीर सड़क दुर्घटना में श्रृष्टि की नौ पसलियाँ टूट गईं और फेफड़ों में गहरी चोट आई। उनका बड़ा वैस्कुलर ऑपरेशन हुआ और कुछ समय तक उन्हें कृत्रिम वेंटिलेशन पर रखा गया था।
राष्ट्र प्रेस
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