₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड: छोटे उद्योगों को मिलेगी आसान फंडिंग, टियर-2 व टियर-3 शहरों पर फोकस
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत ₹10,000 करोड़ के एसएमई ग्रोथ फंड (SGF) से देश के छोटे और मध्यम उद्यमों को फंडिंग तक आसान पहुँच मिलेगी और निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा। उद्योग जगत ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम एमएसएमई क्षेत्र की सबसे पुरानी और गहरी समस्या — पूंजी तक पहुँच — का समाधान करने की दिशा में निर्णायक है।
फंड की संरचना और दायरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को इस फंड की स्थापना को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग, सेवा, प्रौद्योगिकी, नवाचार-आधारित क्षेत्रों और रणनीतिक वैल्यू चेन में सक्रिय भारतीय उद्यमों के विस्तार को सक्षम बनाना है। यह केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई व्यापक घोषणाओं का हिस्सा है, जिनका मकसद पूरे एमएसएमई इकोसिस्टम के लिए इक्विटी, लिक्विडिटी और प्रोफेशनल सपोर्ट उपलब्ध कराना था।
सरकार इस फंड में एमएसएमई आईपीओ और इक्विटी भागीदारी के माध्यम से हिस्सा लेगी, जिससे उन उद्यमों को विशेष लाभ मिलेगा जो इक्विटी बाज़ार में प्रवेश करना चाहते हैं।
तीन गुना लाभ का अनुमान
फेडरेशन ऑफ कर्नाटक चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FKCCI) के उपाध्यक्ष के. सतीश नागराज ने कहा, 'यह एक बहुत अच्छा कदम है। सेबी (SEBI) से मंजूरी प्राप्त बैंकों के माध्यम से एमएसएमई को ₹10,000 करोड़ दिए जाएंगे, जिनका तीन गुना लाभ उठाया जाएगा। इससे एमएसएमई को लगभग ₹40,000 करोड़ का कुल फंड मिल सकेगा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि सेबी-अनुमोदित बैंकों के ₹30,000 करोड़ जोड़ने से यह कुल राशि ₹40,000 करोड़ तक पहुँचेगी।
नागराज ने यह भी रेखांकित किया कि इस फंड का प्राथमिक लक्ष्य टियर-2 और टियर-3 शहर हैं। उनके अनुसार, पहले निजी बैंक इन शहरों तक नहीं पहुँचते थे, जिससे छोटे उद्यम फंडिंग से वंचित रह जाते थे।
उद्योग संगठनों की प्रतिक्रिया
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के सीईओ और महासचिव रणजीत मेहता ने कहा कि यह फंड छोटे उद्यमों की सबसे बड़ी बाधा — आसान फंडिंग तक पहुँच — का सीधा समाधान करता है। उन्होंने कहा, 'सरकार की इक्विटी भागीदारी से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और एमएसएमई क्षेत्र में संस्थागत पूंजी का प्रवाह तेज़ होगा।' मेहता के अनुसार, एमएसएमई आईपीओ मार्ग विशेष रूप से उन उद्यमों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने कारोबार का विस्तार करना चाहते हैं।
आम जनता और एमएसएमई पर असर
भारत में एमएसएमई क्षेत्र 6 करोड़ से अधिक उद्यमों का समूह है और देश की GDP में लगभग 30% का योगदान करता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक मंदी की आशंकाओं और घरेलू माँग में उतार-चढ़ाव के बीच छोटे उद्यमों पर नकदी का दबाव बढ़ा है। गौरतलब है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के उद्यमी अब तक औपचारिक वित्तपोषण से काफी हद तक बाहर रहे हैं।
इस फंड के ज़रिए सरकार न केवल पूंजी तक पहुँच बढ़ाना चाहती है, बल्कि एमएसएमई को इक्विटी बाज़ार की मुख्यधारा में लाने का भी लक्ष्य है — जो दीर्घकाल में रोज़गार सृजन और निर्यात क्षमता दोनों को बल दे सकता है।
आगे की राह
फंड के क्रियान्वयन की विस्तृत रूपरेखा और SEBI-अनुमोदित बैंकों की भूमिका जल्द स्पष्ट होने की उम्मीद है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि फंड का वितरण कितनी तेज़ी और पारदर्शिता से होता है — विशेष रूप से उन इलाकों में जहाँ अब तक संस्थागत वित्त की पहुँच सीमित रही है।