स्ट्रीट डॉग पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत, मेनका गांधी बोलीं — कोर्ट ने हार मान ली
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 19 मई को सर्वोच्च न्यायालय के आवारा कुत्तों (स्ट्रीट डॉग) संबंधी ताज़े फैसले के बाद देशभर में बहस तेज़ हो गई है। आम नागरिकों ने जहाँ इस फैसले का स्वागत किया, वहीं पशु अधिकार संगठन पीपल फॉर एनिमल्स (PFA) की अध्यक्ष मेनका गांधी ने कड़ी नाराज़गी जताई और सरकारी तंत्र की विफलता को इसकी मूल वजह बताया।
मुख्य घटनाक्रम
सर्वोच्च न्यायालय ने पशु प्रेमियों द्वारा दायर याचिका पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में कोर्ट का पूर्व आदेश ही प्रभावी रहेगा। एक डॉग लवर ने बताया कि आज सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर रोक लगा दी है, और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का पिछला आदेश ही लागू रहेगा। यह फैसला उन लाखों नागरिकों के लिए राहत लेकर आया है जो आवारा कुत्तों के हमलों से परेशान हैं।
आम जनता की प्रतिक्रिया
ग्रेटर नोएडा के कई निवासियों ने कहा कि वे इस फैसले से काफी संतुष्ट हैं और इससे सार्वजनिक सुरक्षा की भावना मज़बूत होगी। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि सोसाइटियों में स्ट्रीट डॉग को लेकर अक्सर विवाद होते हैं और डॉक्टरों के पास रेबीज़ के इंजेक्शन के लिए लंबी कतारें लगती हैं। लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि आवारा कुत्तों के लिए एक सामूहिक केंद्र बनाया जाना चाहिए जहाँ उनके रहने और खाने-पीने की उचित व्यवस्था हो सके।
मेनका गांधी की आपत्ति
मेनका गांधी ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्ट्रीट डॉग के मामले में हार मान ली है। उनके अनुसार, कोर्ट ने पहले देशभर में एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर खोलने के निर्देश दिए थे, लेकिन जब इन्हें सही तरीके से लागू नहीं किया गया, तभी कोर्ट को यह सख्त रुख अपनाना पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट केवल इतना कह देता कि ABC सेंटर नहीं खोलने वाले नगर निगम कमिश्नरों के खिलाफ कार्रवाई होगी, तो पूरे देश में सेंटर खुल जाते।
नकली NGO और फंडिंग की समस्या
मेनका गांधी ने दावा किया कि पूरे देश में केवल 16 NGO ही ऐसे हैं जिन्हें सही प्रशिक्षण मिला है, जबकि करीब 780 स्थानों पर नकली NGO काम कर रहे हैं। उन्होंने पोलियो उन्मूलन अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार ने पोलियो खत्म करने के लिए लगातार 15 साल तक हर हफ्ते ₹700 करोड़ खर्च किए थे और सवाल उठाया कि स्ट्रीट डॉग की समस्या नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कितना पैसा लगाया है।
क्या होगा आगे
मेनका गांधी ने कहा कि अगर सरकार इस पूरे कार्यक्रम में ₹700 करोड़ लगा दे तो फर्क साफ दिखाई देगा। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेश के प्रभावी रहने के बाद अब नगर निकायों पर ABC कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने का दबाव बढ़ेगा।