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तमिलनाडु में ऐतिहासिक 84% मतदान, 234 सीटों पर DMK-AIADMK-TVK-NTK में चार-कोणीय जंग

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तमिलनाडु में ऐतिहासिक 84% मतदान, 234 सीटों पर DMK-AIADMK-TVK-NTK में चार-कोणीय जंग

सारांश

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में 234 सीटों पर 84% से अधिक ऐतिहासिक मतदान हुआ। DMK, AIADMK, विजय की TVK और सीमान की NTK के बीच चार-कोणीय मुकाबले ने द्रविड़ राजनीति को नया मोड़ दिया। 4 मई को नतीजे तय करेंगे तमिलनाडु का भविष्य।

मुख्य बातें

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में 234 सीटों पर 84 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ, जो हालिया दशकों में सर्वाधिक है।
5.7 करोड़ से अधिक पात्र मतदाताओं ने इस चुनाव में भाग लिया; दोपहर 3 बजे तक ही 70% मतदान हो चुका था।
चुनाव में DMK (एम.के.
स्टालिन) , AIADMK (एडप्पादी पलानीस्वामी) , TVK (विजय) और NTK (सीमान) के बीच चार-कोणीय मुकाबला रहा।
अभिनेता विजय की तमिलगा वेट्री कझगम ने पहली बार सभी 234 सीटों पर चुनाव लड़ा, जो द्रविड़ राजनीति में नए युग का संकेत है।
मतदान प्रक्रिया मुख्यतः शांतिपूर्ण रही, कुछ केंद्रों पर भीड़ नियंत्रण की छिटपुट चुनौतियां सामने आईं।
चुनाव परिणाम 4 मई 2026 को घोषित होंगे, जो तमिलनाडु की राजनीतिक दिशा और द्रविड़ राजनीति का भविष्य तय करेंगे।

चेन्नई, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में गुरुवार को सभी 234 सीटों पर मतदान संपन्न हुआ और 84 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह राज्य के हालिया चुनावी इतिहास में दर्ज सर्वाधिक मतदान प्रतिशतों में से एक है। 5.7 करोड़ से अधिक पात्र मतदाताओं की इस भारी भागीदारी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि तमिलनाडु की जनता इस बार के चुनाव को असाधारण रूप से महत्वपूर्ण मान रही है।

मतदान का उत्साह: शहर से गांव तक लंबी कतारें

सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी-लंबी कतारें देखी गईं। बढ़ते तापमान के बावजूद शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लोगों का उत्साह अटूट रहा। दोपहर 3 बजे तक ही मतदान प्रतिशत लगभग 70 प्रतिशत को पार कर चुका था, जो इस बात का प्रमाण है कि मतदाताओं ने बड़े पैमाने पर घरों से निकलकर लोकतंत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।

मतदान प्रक्रिया मुख्यतः शांतिपूर्ण रही, हालांकि कुछ मतदान केंद्रों पर भीड़ नियंत्रण और छोटी-मोटी बाधाओं की छिटपुट घटनाएं सामने आईं। अधिकारियों ने व्यापक सुरक्षा बंदोबस्त के साथ समूची प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराया।

चार-कोणीय मुकाबला: द्रविड़ राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव

इस चुनाव ने तमिलनाडु की पारंपरिक द्रविड़ दो-दलीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को रेखांकित किया है। दशकों से डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सीमित रहा मुकाबला इस बार चार प्रमुख ध्रुवों में बंट गया है।

मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके का सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (एसपीए) अपनी कल्याणकारी योजनाओं और सुशासन के दावों के दम पर लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए है। दूसरी ओर, एडप्पादी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व में एआईएडीएमके आंतरिक गुटबाजी की चुनौतियों से जूझते हुए सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। यह चुनाव उसकी राजनीतिक प्रासंगिकता की भी एक अग्निपरीक्षा है।

तीसरे मोर्चे पर अभिनेता-से-नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) ने सभी 234 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। युवाओं के बीच अपनी लोकप्रियता को चुनावी फायदे में तब्दील करने की यह पार्टी की पहली बड़ी परीक्षा है। चौथे मोर्चे पर सेंथमिझन सीमान की नाम तमिलर काची (एनटीके) ने भी सभी निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्याशी उतारे हैं। यह पार्टी तमिल राष्ट्रवाद, पर्यावरण संरक्षण और वैकल्पिक राजनीतिक विमर्श के आधार पर युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले वर्ग को आकर्षित करती रही है।

वोट विभाजन का गणित और पारंपरिक समीकरणों पर असर

टीवीके और एनटीके जैसी नई राजनीतिक शक्तियों के मैदान में उतरने से वोटों का व्यापक विभाजन तय माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि इन दोनों दलों ने मिलकर भी 10 से 15 प्रतिशत वोट खींचे, तो डीएमके और एआईएडीएमके दोनों के पारंपरिक वोट बैंक प्रभावित हो सकते हैं। गौरतलब है कि तमिलनाडु में 2021 के विधानसभा चुनाव में डीएमके ने 133 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की थी, जबकि एआईएडीएमके 66 सीटों पर सिमट गई थी।

इस बार टीवीके की मौजूदगी विशेष रूप से उन सीटों पर निर्णायक हो सकती है जहां पिछले चुनाव में जीत का अंतर कम था। विजय की फिल्मी छवि और जन-आंदोलन की राजनीति का मिश्रण उन्हें एक अलग श्रेणी में खड़ा करता है, हालांकि पहली बार चुनाव लड़ रही पार्टी के लिए सीटें जीतना एक बड़ी चुनौती होगी।

4 मई को फैसला: द्रविड़ राजनीति का भविष्य तय होगा

चुनाव परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। यह नतीजे तय करेंगे कि क्या डीएमके का वर्चस्व बरकरार रहेगा, या एआईएडीएमके वापसी करेगी, या फिर टीवीके और एनटीके जैसी नई ताकतें तमिलनाडु की राजनीति में स्थायी जगह बना पाएंगी। 84 प्रतिशत का यह रिकॉर्ड मतदान संकेत देता है कि जनता का फैसला किसी एक दल के पक्ष में एकतरफा नहीं, बल्कि बहुआयामी और जटिल हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि द्रविड़ राजनीति के बदलते चेहरे का दर्पण है। दशकों से DMK और AIADMK के बीच बंटे इस राज्य में विजय की TVK और सीमान की NTK का उभार यह बताता है कि तमिल मतदाता — खासकर युवा पीढ़ी — पुरानी राजनीतिक विरासत से आगे जाने को तैयार है। विडंबना यह है कि जितना अधिक मतदान, उतना अधिक वोट विभाजन — और यह विभाजन पारंपरिक दलों के लिए खतरे की घंटी है। 4 मई के नतीजे सिर्फ तमिलनाडु का भविष्य नहीं, बल्कि 2029 के राष्ट्रीय चुनावों के लिए दक्षिण भारत की राजनीतिक दिशा भी तय करेंगे।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में कितने प्रतिशत मतदान हुआ?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में 84 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ, जो हालिया चुनावों में राज्य का सर्वाधिक मतदान प्रतिशत है। 5.7 करोड़ से अधिक पात्र मतदाताओं में से भारी संख्या ने मताधिकार का प्रयोग किया।
तमिलनाडु चुनाव 2026 में कौन-कौन से प्रमुख दल मैदान में हैं?
इस चुनाव में DMK के नेतृत्व वाला SPA, AIADMK के नेतृत्व वाला NDA, अभिनेता विजय की TVK और सीमान की NTK — ये चार प्रमुख राजनीतिक ताकतें मैदान में हैं। सभी चारों दलों ने 234 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे कब आएंगे?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। इन नतीजों से यह तय होगा कि DMK सत्ता में बनी रहेगी या कोई नई राजनीतिक शक्ति उभरेगी।
विजय की TVK पार्टी तमिलनाडु चुनाव में कितनी सीटों पर लड़ रही है?
अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) ने तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। यह पार्टी का पहला विधानसभा चुनाव है और इसका मुख्य फोकस युवा मतदाताओं पर है।
तमिलनाडु में 2026 चुनाव में चार-कोणीय मुकाबले का क्या असर होगा?
चार प्रमुख दलों के मैदान में होने से वोटों का व्यापक विभाजन होने की संभावना है, जो DMK और AIADMK दोनों के पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है। इससे कई सीटों पर जीत का अंतर बेहद कम रह सकता है और नतीजे अप्रत्याशित हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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