12 अक्टूबर 2026
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तमिलनाडु में खरीफ धान का रकबा 28% गिरा, रबी मौसम से 125 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य की उम्मीद

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तमिलनाडु में खरीफ धान का रकबा 28% गिरा, रबी मौसम से 125 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य की उम्मीद

सारांश

तमिलनाडु में खरीफ धान का रकबा 28% गिरकर 12.52 लाख हेक्टेयर रह गया — कावेरी जल संकट और मेदूर बांध की देरी ने फसल चक्र बिगाड़ा। अब राज्य सरकार 125 लाख मीट्रिक टन के वार्षिक लक्ष्य के लिए रबी मौसम पर दांव लगा रही है और किसानों को सीधी बुवाई अपनाने की सलाह दी जा रही है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु में अप्रैल–सितंबर 2026 के दौरान खरीफ धान का रकबा 28% गिरकर 12.52 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष 17.5 लाख हेक्टेयर था।
मेदूर बांध के खुलने में देरी और कावेरी नदी में जल प्रवाह की कमी को गिरावट के मुख्य कारण बताया गया है।
कृषि विभाग ने 2026-27 का खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य 125 लाख मीट्रिक टन बरकरार रखा है; धान का योगदान 79 लाख मीट्रिक टन अपेक्षित।
राज्य की 4,400 प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियों में ₹300 करोड़ के उर्वरक और बीज अनबिके पड़े हैं।
सहकारिता विभाग ने फिलहाल फसल ऋण वसूली पर रोक लगाई; सहकारी विपणन संघ ने उर्वरक आपूर्ति गैर-सदस्य किसानों तक बढ़ाई।
अगले 45 दिन सांबा फसल की प्रगति और रबी मौसम की दिशा के लिए निर्णायक बताए गए हैं।

तमिलनाडु में खरीफ धान की खेती के रकबे में 28 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज होने के बाद राज्य का कृषि विभाग अब रबी मौसम (अक्टूबर–मार्च) पर टकटकी लगाए बैठा है, ताकि 2026-27 का 125 लाख मीट्रिक टन का वार्षिक खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य हासिल किया जा सके। मेदूर बांध के खुलने में हुई देरी और कावेरी नदी में जल प्रवाह की कमी को इस संकट की जड़ बताया जा रहा है।

खरीफ रकबे में कितनी गिरावट

अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच राज्य में धान की खेती का रकबा 12.52 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि 2025-26 में यह 17.5 लाख हेक्टेयर था। इस तरह 4.98 लाख हेक्टेयर की कमी आई — जो 28 प्रतिशत की गिरावट है और पानी की किल्लत के कृषि पर पड़ते प्रत्यक्ष असर को उजागर करती है।

कुरुवाई फसल में भी स्थिति बेहतर नहीं रही। राज्यभर में कुरुवाई खेती का रकबा पिछले वर्ष के 5.05 लाख हेक्टेयर से घटकर 3.91 लाख हेक्टेयर रह गया — यानी 1.14 लाख हेक्टेयर की कमी। डेल्टा जिलों में यह रकबा 2.55 लाख हेक्टेयर से सिकुड़कर 1.85 लाख हेक्टेयर तक आ गया।

रबी मौसम पर टिकी हैं उम्मीदें

कृषि विभाग के अनुसार रबी ऋतु के लिए खेती का लक्ष्य 30.26 लाख हेक्टेयर निर्धारित है। मौसम विभाग के सामान्य वर्षा पूर्वानुमान ने इस उम्मीद को और बल दिया है। विभाग का अनुमान है कि धान का योगदान 79 लाख मीट्रिक टन रहेगा।

गौरतलब है कि 2025-26 में तमिलनाडु ने 130.23 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले केवल 122.43 लाख मीट्रिक टन का उत्पादन किया था — यानी लक्ष्य से 7.8 लाख मीट्रिक टन कम। इस पृष्ठभूमि में मौजूदा वर्ष का दबाव और अधिक है।

किसानों को सीधी बुवाई अपनाने की सलाह

जिलों को फसल संबंधी आकस्मिक योजनाएँ पहले ही उपलब्ध करा दी गई हैं, जिनमें किसानों को परंपरागत रोपाई के बजाय सीधी बुवाई (Direct Seeded Rice) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इस विधि में जल की आवश्यकता कम होती है और उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान फसल क्षति का जोखिम भी घटता है।

अधिकारियों का कहना है कि सांबा की खेती में तेजी आनी शुरू हो गई है और अगले 45 दिन इस मौसम की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होंगे। साथ ही अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि खरीफ रकबे में आई कमी से अनाज की कमी का कोई तात्कालिक खतरा नहीं है।

सहकारी ऋण और उर्वरक पर असर

खेती में मंदी ने कृषि आपूर्ति श्रृंखला को भी प्रभावित किया है। मांग कमजोर होने के कारण राज्य की 4,400 प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियों में ₹300 करोड़ मूल्य के उर्वरक और बीज अनबिके पड़े हैं।

इस स्थिति से निपटने के लिए सहकारी विपणन संघ ने उर्वरकों की उपलब्धता का दायरा बढ़ा दिया है। अब सहकारी समिति के सदस्य न होने वाले किसान भी रियायती उर्वरक खरीद सकेंगे — पहले यह सुविधा केवल उन्हीं सदस्यों को मिलती थी जिन्होंने फसल ऋण लिया हो।

इसके अतिरिक्त, सहकारिता विभाग ने सहकारी बैंकों द्वारा ऋण वितरण में आई गिरावट के मद्देनजर फिलहाल फसल ऋण वसूली पर रोक लगा दी है — ताकि किसानों पर आर्थिक बोझ न बढ़े और कृषि गतिविधियाँ पुनः पटरी पर आ सकें।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत के कई राज्य जल-संसाधन प्रबंधन और मानसून की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। तमिलनाडु के लिए अगले डेढ़ माह की वर्षा और सांबा फसल की प्रगति ही तय करेगी कि राज्य वार्षिक खाद्यान्न लक्ष्य को कितना करीब छू पाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सिंचाई बुनियादी ढाँचे पर निर्भरता की संरचनात्मक समस्या को उजागर करती है। 2025-26 में भी राज्य लक्ष्य से 7.8 लाख मीट्रिक टन पीछे रहा था — इसलिए इस बार रबी से पूरी भरपाई की उम्मीद करना महत्वाकांक्षी है। ₹300 करोड़ के अनबिके उर्वरक भंडार और ऋण वितरण में गिरावट यह भी संकेत देती है कि जमीनी कृषि अर्थव्यवस्था एक बड़े दबाव में है, जिसे महज मौसम बदलने से नहीं सुलझाया जा सकता।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में खरीफ धान की खेती में 28% गिरावट क्यों आई?
मेदूर बांध के खुलने में देरी और कावेरी नदी में जल प्रवाह की कमी को इस गिरावट के मुख्य कारण बताया गया है। इससे अप्रैल–सितंबर 2026 के दौरान धान का रकबा 17.5 लाख हेक्टेयर से घटकर 12.52 लाख हेक्टेयर रह गया।
तमिलनाडु का 2026-27 खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य क्या है और क्या यह पूरा होगा?
राज्य का लक्ष्य 125 लाख मीट्रिक टन है, जिसमें धान का योगदान 79 लाख मीट्रिक टन अपेक्षित है। कृषि विभाग इसे पूरा करने के लिए रबी मौसम (अक्टूबर–मार्च) पर निर्भर है, हालांकि 2025-26 में भी राज्य 130.23 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 122.43 लाख मीट्रिक टन ही जुटा पाया था।
सीधी बुवाई विधि क्या है और किसानों को यह क्यों अपनाने की सलाह दी जा रही है?
सीधी बुवाई (Direct Seeded Rice) में परंपरागत रोपाई की तुलना में कम पानी की जरूरत होती है। इससे उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान जलभराव से फसल नुकसान का खतरा भी कम होता है, जो जल संकट के बीच किसानों के लिए व्यावहारिक विकल्प है।
सहकारी समितियों में ₹300 करोड़ के उर्वरक क्यों अनबिके पड़े हैं?
खरीफ मौसम में खेती का रकबा घटने से उर्वरकों और बीजों की मांग कमजोर पड़ गई, जिससे राज्य की 4,400 प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियों में ₹300 करोड़ का स्टॉक जमा हो गया। अब सहकारी विपणन संघ ने गैर-सदस्य किसानों को भी उर्वरक आपूर्ति की अनुमति देकर इस भंडार को समाप्त करने की कोशिश की है।
फसल ऋण वसूली पर रोक क्यों लगाई गई है?
सहकारिता विभाग ने सहकारी बैंकों द्वारा ऋण वितरण में आई भारी गिरावट को देखते हुए फसल ऋण वसूली अस्थायी रूप से रोक दी है। इसका उद्देश्य कम खेती के कारण आर्थिक दबाव में आए किसानों को राहत देना और रबी मौसम में कृषि गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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