तनवीर सादिक: मजबूत विपक्ष स्वस्थ लोकतंत्र की बुनियाद, डोडा हिजाब विवाद पर धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के नेता तनवीर सादिक ने 1 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर में इंडिया ब्लॉक की बैठक, डोडा के हिजाब विवाद, जम्मू-कश्मीर विधानसभा के हालिया सत्र और विधायकों के वेतन में प्रस्तावित बढ़ोतरी पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में एक सशक्त विपक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव को मजबूत करने के लिए अनिवार्य है।
इंडिया ब्लॉक की बैठक और विपक्ष की भूमिका
सादिक ने इंडिया ब्लॉक की बैठक का संदर्भ देते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच एक मजबूत और एकजुट विपक्ष की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। उनके अनुसार, यह बैठक विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने के लिए आयोजित की गई थी। उन्होंने कहा, 'मजबूत विपक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है।'
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सत्तारूढ़ NC के बीच विधानसभा सत्र को लेकर तकरार चल रही है। गौरतलब है कि राज्य के पुनर्गठन के बाद यह पहले विधानसभा सत्रों में से एक था, जिसे लेकर सभी दलों की निगाहें टिकी थीं।
डोडा हिजाब विवाद: धार्मिक स्वतंत्रता का सवाल
डोडा में हिजाब को लेकर उभरे विवाद पर सादिक ने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभिन्न धर्मों के अनुयायी अपनी धार्मिक पहचान के अनुरूप प्रतीकों और परिधानों का उपयोग करते हैं — चाहे वह मुस्लिम महिलाओं का नकाब या अबाया हो अथवा अन्य धर्मों के पारंपरिक परिधान।
सादिक ने तर्क दिया कि यदि कोई मुस्लिम महिला या छात्रा धार्मिक परिधान पहनते हुए अपनी जिम्मेदारियाँ निभा रही है, तो उसे लेकर आपत्ति उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी के कार्य में कोई वास्तविक बाधा उत्पन्न होती है तो उस पर चर्चा की जा सकती है, परंतु केवल धार्मिक पहनावे के आधार पर प्रतिबंध लगाना संविधान-सम्मत नहीं है। सादिक ने संबंधित प्रकरण में माफी और उचित कार्रवाई की माँग भी की।
विधानसभा सत्र: BJP पर हंगामे का आरोप
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के हालिया सत्र पर सादिक ने दावा किया कि भाजपा सदस्यों के विरोध और सदन में हंगामे के कारण लगभग 70 सवाल — जो स्वयं भाजपा सदस्यों के अपने क्षेत्रों से संबंधित थे — सदन में उठाए ही नहीं जा सके। उन्होंने इसे विडंबनापूर्ण बताया।
इसके बावजूद उन्होंने इस सत्र को सफल करार दिया और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तथा विधानसभा अध्यक्ष की प्रशंसा की। सादिक के अनुसार, सरकार ने प्रश्नों के उत्तर दिए और अध्यक्ष ने सदन को व्यवस्थित रूप से संचालित किया। उन्होंने कहा कि जो इसे असफल बताते हैं, उन्हें अपने आचरण पर विचार करना चाहिए।
विधायक वेतन विवाद: BJP पर 'दोहरे रवैये' का आरोप
विधायकों के वेतन में प्रस्तावित बढ़ोतरी के मुद्दे पर सादिक ने भाजपा को घेरते हुए कहा कि वेतन संशोधन के आवेदन पर भाजपा सदस्यों ने भी हस्ताक्षर किए थे और जिस समिति ने रिपोर्ट तैयार की, उसके अध्यक्ष भी भाजपा से जुड़े थे। उस समिति ने विधायकों का वेतन ₹3 लाख करने की सिफारिश की थी।
हालाँकि, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि सरकार पर पहले से डेली वेजर्स और कैजुअल कर्मचारियों के वेतन का दायित्व है, इसलिए फिलहाल इतनी बड़ी बढ़ोतरी संभव नहीं है। सादिक ने आरोप लगाया कि जब माँग पूरी नहीं हुई, तभी भाजपा नेताओं ने विरोध का रास्ता अपनाया — जबकि असहमति समिति की रिपोर्ट में ही दर्ज की जा सकती थी।
आगे क्या
जम्मू-कश्मीर में नई विधानसभा के गठन के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच ये टकराव आने वाले सत्रों में और तीखे होने की संभावना है। डोडा हिजाब विवाद और विधायक वेतन का मुद्दा अभी राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रहेंगे, और NC-BJP के बीच खींचतान विधानसभा की कार्यवाही को प्रभावित करती रहेगी।