लखपति दीदी: 3 करोड़ का लक्ष्य पूरा, शिवराज सिंह चौहान ने दिलाया 6 करोड़ का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के पूसा स्थित सी. सुब्रमण्यम सभागार में आयोजित संकल्प कार्यक्रम में घोषणा की कि तीन करोड़ ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य पूरा हो चुका है और अब छह करोड़ लखपति दीदियाँ बनाने का नया संकल्प लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर उद्घोषित 'शक्ति की सप्तधारा' को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में किसान, वैज्ञानिक, अधिकारी, निर्यातक और स्वयं सहायता समूहों की महिलाएँ एक मंच पर एकत्रित हुईं।
कार्यक्रम का उद्देश्य और स्वरूप
'शक्ति की सप्तधारा से कृषि और ग्रामीण विकास को नई दिशा' नामक इस संकल्प कार्यक्रम में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग और भूमि संसाधन विभाग — चारों विभागों के सचिव उपस्थित रहे। राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासामी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। चौहान ने सभी उपस्थित लोगों को सामूहिक रूप से विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संकल्प दिलाया।
चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 'शक्ति की सप्तधारा' के माध्यम से विकसित भारत का स्पष्ट मार्ग देश के सामने रखा है। उनके अनुसार, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण इस सप्तधारा की महत्वपूर्ण शक्तियाँ हैं और भारत को उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पर ध्यान देना होगा।
लखपति दीदी योजना: उपलब्धि और नया लक्ष्य
चौहान ने बताया कि तीन करोड़ ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। अब प्रधानमंत्री मोदी ने छह करोड़ लखपति दीदियाँ बनाने का नया लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि तीन करोड़ नई लखपति दीदियों का निर्माण ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव लाएगा।
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाज़ार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बेहतर बाज़ार दिलाने के लिए 'शी-मार्ट्स' और ब्रांडिंग जैसी पहलों को बढ़ावा देने की बात भी चौहान ने कही। हस्तशिल्प, खाद्य उत्पाद, आयुर्वेदिक सामग्री और पारंपरिक वस्तुओं को देश-विदेश के बाज़ारों तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा।
कृषि को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने की रणनीति
चौहान ने कहा कि भारतीय कृषि को खेत से लेकर वैश्विक बाज़ार तक जोड़ना समय की आवश्यकता है। देश के किसानों के पास मिर्च, मसाले, फल, फूल और अनेक पारंपरिक उत्पादों की बड़ी विविधता है। खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात के माध्यम से किसानों की आय में महत्वपूर्ण वृद्धि की जा सकती है।
उन्होंने प्रत्येक राज्य और जिले के लिए अलग कृषि रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया, क्योंकि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में जलवायु, मिट्टी और फसल की परिस्थितियाँ भिन्न हैं। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और कृषि विज्ञान केंद्रों को मिलकर किसानों तक नई तकनीक पहुँचाने की ज़िम्मेदारी दी गई। तकनीक, मशीनीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बेहतर बीजों के उपयोग से उत्पादन और उत्पादकता दोनों बढ़ाई जा सकती है।
अधिकारियों को सफलता के चार सूत्र
चौहान ने अधिकारियों और कर्मचारियों को काम के प्रति समर्पण का संदेश देते हुए सफलता के चार सूत्र बताए — 'पाँव में चक्कर, मुँह में शक्कर, सीने में आग और माथे पर बर्फ'। उनके अनुसार, 'पाँव में चक्कर' का अर्थ है लगातार क्षेत्र में जाकर काम की समीक्षा करना; 'मुँह में शक्कर' का अर्थ है मधुर व्यवहार से मज़बूत टीम बनाना; 'सीने में आग' लक्ष्य प्राप्ति का जुनून है; और 'माथे पर बर्फ' का अर्थ है कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना।
उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश और जनता की सेवा का संकल्प है। किसानों, गरीबों और ग्रामीण समाज की सेवा करना भारत माता की पूजा के समान है।
सचिवों और हितधारकों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में चारों विभागों के सचिवों ने अपना रोडमैप प्रस्तुत किया। डॉ. मांगीलाल जाट, सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग ने वैज्ञानिक नवाचार पर विचार रखे। अतीश चंद्र, सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने किसानों की आय और गुणवत्ता सुधार पर बात की। रोहित कंसल, सचिव, ग्रामीण विकास विभाग ने लखपति दीदी योजना और ग्रामीण आजीविका की प्राथमिकताएँ साझा कीं। नरेंद्र भूषण, सचिव, भूमि संसाधन विभाग ने जल प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दिया।
किसान विनोद कुमार सैनी, प्रसंस्करण विशेषज्ञ मुकेश जैन, किसान उत्पादक संगठन प्रतिनिधि प्रफुल्ल गोस्वामी और लखपति दीदी ललिता ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक संकल्प लिया गया कि कृषि को समृद्ध, खाद्य उत्पादन को सशक्त और ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। आगे की राह में 'शक्ति की सप्तधारा' के लक्ष्यों को ज़मीनी स्तर पर साकार करने की ज़िम्मेदारी अब विभागों के कंधों पर है।