तीस्ता नदी पर ₹1,175.59 करोड़ के 6-लेन पुल को मंजूरी, सुवेंदु अधिकारी ने PM मोदी का जताया आभार
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी ने 1 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार का आभार जताया, जिसने सेवोक में तीस्ता नदी पर ₹1,175.59 करोड़ की लागत से 6.91 किलोमीटर लंबे छह-लेन के पुल निर्माण को स्वीकृति दी है। यह परियोजना रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
परियोजना का विवरण
स्वीकृत पुल परियोजना के अंतर्गत सेवोक स्थल पर तीस्ता नदी पर 6.91 किलोमीटर लंबा और छह-लेन वाला आधुनिक पुल बनाया जाएगा। इसकी कुल स्वीकृत लागत ₹1,175.59 करोड़ है।
यह पुल नेशनल हाईवे-10 के उन्नयन का अहम हिस्सा होगा और 1941 में निर्मित ऐतिहासिक कोरोनेशन ब्रिज के विकल्प के रूप में कार्य करेगा। दशकों पुराने उस पुल की क्षमता और संरचनात्मक सीमाएँ लंबे समय से क्षेत्र की कनेक्टिविटी में बाधक रही हैं।
सुवेंदु अधिकारी की प्रतिक्रिया
अधिकारी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'पश्चिम बंगाल के लोगों की ओर से मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ। उन्होंने सेवोक में तीस्ता नदी पर 6.91 किलोमीटर लंबे छह-लेन वाले पुल के लिए ₹1,175.59 करोड़ की मंजूरी दी है।'
उन्होंने यह भी कहा, 'हम इस सहकारी संघीय प्रयास की सराहना करते हैं और इस परियोजना को तेजी से पूरा करने के लिए हर जरूरी जमीनी मदद देने के अपने वादे को दोहराते हैं।'
रणनीतिक और आर्थिक महत्व
यह परियोजना इसलिए भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि सिलीगुड़ी कॉरिडोर — जिसे 'चिकन नेक' के नाम से भी जाना जाता है — भारत को उसके पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाली एकमात्र भूमि पट्टी है। इस कॉरिडोर की सुरक्षा और सुचारु परिवहन राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक एकीकरण दोनों के लिए निर्णायक है।
अधिकारी के अनुसार, नेशनल हाईवे-10 के उन्नयन से उत्तर बंगाल, सिक्किम और समूचे पूर्वोत्तर भारत की क्षेत्रीय आपूर्ति शृंखला मजबूत होगी और यात्रियों व माल की आवाजाही सुगम होगी।
उत्तर बंगाल के विकास पर जोर
गौरतलब है कि नई राज्य सरकार के आने के बाद से उत्तर बंगाल में बुनियादी ढाँचे को बेहतर बनाने की कोशिशें तेज हुई हैं, जिस क्षेत्र को लंबे समय तक कथित तौर पर उपेक्षित रखा गया था।
राज्य कैबिनेट के एक सदस्य ने कहा, 'हमारा लक्ष्य 'ट्रिपल टी' — यानी चाय, लकड़ी और पर्यटन — क्षेत्रों को बढ़ावा देकर उत्तर बंगाल का आर्थिक विकास करना है। इसके लिए इस इलाके में बुनियादी ढाँचे का विकास बेहद जरूरी है, और यह पुल परियोजना उस दिशा में एक अहम पड़ाव है।'
आगे की राह
यह परियोजना काफी समय से प्रस्तावित थी और अब केंद्रीय स्वीकृति मिलने के बाद कार्यान्वयन की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण सहित हर जरूरी जमीनी सहयोग देने का आश्वासन दिया है। इस परियोजना के पूर्ण होने पर उत्तर बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत के बीच संपर्क एवं व्यापार का एक नया अध्याय खुलेगा।