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तीस्ता नदी पर ₹1,175.59 करोड़ के 6-लेन पुल को मंजूरी, सुवेंदु अधिकारी ने PM मोदी का जताया आभार

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तीस्ता नदी पर ₹1,175.59 करोड़ के 6-लेन पुल को मंजूरी, सुवेंदु अधिकारी ने PM मोदी का जताया आभार

सारांश

तीस्ता नदी पर ₹1,175.59 करोड़ के 6.91 किमी लंबे छह-लेन पुल को केंद्र की हरी झंडी मिली। यह 1941 के कोरोनेशन ब्रिज का विकल्प बनेगा और रणनीतिक 'चिकन नेक' कॉरिडोर की कनेक्टिविटी को नई ताकत देगा। उत्तर बंगाल के चाय, लकड़ी और पर्यटन क्षेत्रों को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने सेवोक में तीस्ता नदी पर ₹1,175.59 करोड़ की पुल परियोजना को मंजूरी दी।
पुल 6.91 किलोमीटर लंबा और छह-लेन का होगा; यह नेशनल हाईवे-10 का हिस्सा होगा।
यह 1941 में बने ऐतिहासिक कोरोनेशन ब्रिज का विकल्प बनेगा।
परियोजना रणनीतिक रूप से अहम सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) की क्षमता बढ़ाएगी।
उत्तर बंगाल , सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत की आपूर्ति शृंखला और व्यापार को सीधा लाभ मिलेगा।
राज्य कैबिनेट ने त्वरित क्रियान्वयन के लिए हर जमीनी सहयोग देने का वादा किया।

पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी ने 1 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार का आभार जताया, जिसने सेवोक में तीस्ता नदी पर ₹1,175.59 करोड़ की लागत से 6.91 किलोमीटर लंबे छह-लेन के पुल निर्माण को स्वीकृति दी है। यह परियोजना रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

परियोजना का विवरण

स्वीकृत पुल परियोजना के अंतर्गत सेवोक स्थल पर तीस्ता नदी पर 6.91 किलोमीटर लंबा और छह-लेन वाला आधुनिक पुल बनाया जाएगा। इसकी कुल स्वीकृत लागत ₹1,175.59 करोड़ है।

यह पुल नेशनल हाईवे-10 के उन्नयन का अहम हिस्सा होगा और 1941 में निर्मित ऐतिहासिक कोरोनेशन ब्रिज के विकल्प के रूप में कार्य करेगा। दशकों पुराने उस पुल की क्षमता और संरचनात्मक सीमाएँ लंबे समय से क्षेत्र की कनेक्टिविटी में बाधक रही हैं।

सुवेंदु अधिकारी की प्रतिक्रिया

अधिकारी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'पश्चिम बंगाल के लोगों की ओर से मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ। उन्होंने सेवोक में तीस्ता नदी पर 6.91 किलोमीटर लंबे छह-लेन वाले पुल के लिए ₹1,175.59 करोड़ की मंजूरी दी है।'

उन्होंने यह भी कहा, 'हम इस सहकारी संघीय प्रयास की सराहना करते हैं और इस परियोजना को तेजी से पूरा करने के लिए हर जरूरी जमीनी मदद देने के अपने वादे को दोहराते हैं।'

रणनीतिक और आर्थिक महत्व

यह परियोजना इसलिए भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि सिलीगुड़ी कॉरिडोर — जिसे 'चिकन नेक' के नाम से भी जाना जाता है — भारत को उसके पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाली एकमात्र भूमि पट्टी है। इस कॉरिडोर की सुरक्षा और सुचारु परिवहन राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक एकीकरण दोनों के लिए निर्णायक है।

अधिकारी के अनुसार, नेशनल हाईवे-10 के उन्नयन से उत्तर बंगाल, सिक्किम और समूचे पूर्वोत्तर भारत की क्षेत्रीय आपूर्ति शृंखला मजबूत होगी और यात्रियों व माल की आवाजाही सुगम होगी।

उत्तर बंगाल के विकास पर जोर

गौरतलब है कि नई राज्य सरकार के आने के बाद से उत्तर बंगाल में बुनियादी ढाँचे को बेहतर बनाने की कोशिशें तेज हुई हैं, जिस क्षेत्र को लंबे समय तक कथित तौर पर उपेक्षित रखा गया था।

राज्य कैबिनेट के एक सदस्य ने कहा, 'हमारा लक्ष्य 'ट्रिपल टी' — यानी चाय, लकड़ी और पर्यटन — क्षेत्रों को बढ़ावा देकर उत्तर बंगाल का आर्थिक विकास करना है। इसके लिए इस इलाके में बुनियादी ढाँचे का विकास बेहद जरूरी है, और यह पुल परियोजना उस दिशा में एक अहम पड़ाव है।'

आगे की राह

यह परियोजना काफी समय से प्रस्तावित थी और अब केंद्रीय स्वीकृति मिलने के बाद कार्यान्वयन की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण सहित हर जरूरी जमीनी सहयोग देने का आश्वासन दिया है। इस परियोजना के पूर्ण होने पर उत्तर बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत के बीच संपर्क एवं व्यापार का एक नया अध्याय खुलेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे रक्षा विशेषज्ञ वर्षों से उठाते रहे हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि 1941 के कोरोनेशन ब्रिज का विकल्प बनाने की बात दशकों से चल रही थी, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी इसे रोकती रही। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद केंद्र-राज्य तालमेल की यह नई लय उत्तर बंगाल के लिए अवसर की खिड़की खोलती है — लेकिन असली परीक्षा भूमि अधिग्रहण की गति और पर्यावरणीय मंजूरियों की पारदर्शिता में होगी।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तीस्ता नदी पर स्वीकृत पुल परियोजना क्या है?
यह पश्चिम बंगाल के सेवोक में तीस्ता नदी पर बनने वाला 6.91 किलोमीटर लंबा छह-लेन का पुल है, जिसे केंद्र सरकार ने ₹1,175.59 करोड़ की लागत से मंजूरी दी है। यह नेशनल हाईवे-10 का हिस्सा होगा और 1941 में बने कोरोनेशन ब्रिज का आधुनिक विकल्प बनेगा।
यह पुल रणनीतिक दृष्टि से क्यों अहम है?
यह पुल सिलीगुड़ी कॉरिडोर — जिसे 'चिकन नेक' भी कहते हैं — पर स्थित होगा, जो भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाली एकमात्र संकरी भूमि पट्टी है। इस कॉरिडोर की सुदृढ़ता राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक संपर्क दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस परियोजना से किन्हें लाभ मिलेगा?
इस परियोजना से उत्तर बंगाल, सिक्किम और पूरे पूर्वोत्तर भारत को सबसे ज्यादा फायदा होगा। नेशनल हाईवे-10 के उन्नयन से यात्रियों और माल की आवाजाही सुगम होगी तथा चाय, लकड़ी और पर्यटन जैसे स्थानीय उद्योगों को आर्थिक गति मिलेगी।
कोरोनेशन ब्रिज से नए पुल की क्या जरूरत थी?
मौजूदा कोरोनेशन ब्रिज 1941 में बना था और इसकी क्षमता व संरचना आधुनिक यातायात की जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं है। इलाके की भौगोलिक और पर्यावरणीय जरूरतों को देखते हुए एक मजबूत और अधिक क्षमता वाले पुल की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
राज्य सरकार की इस परियोजना में क्या भूमिका होगी?
पश्चिम बंगाल सरकार ने परियोजना के शीघ्र क्रियान्वयन के लिए केंद्र को हर जरूरी जमीनी सहयोग देने का आश्वासन दिया है। राज्य कैबिनेट ने स्पष्ट किया है कि उत्तर बंगाल में बुनियादी ढाँचे का विकास उनकी प्राथमिकता है और इस पुल को जल्द से जल्द पूरा कराने के लिए केंद्र के साथ सक्रिय तालमेल जारी रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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