6 अगस्त 2026
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गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर को कैबिनेट की मंजूरी: ₹8,970 करोड़ की NH-15 परियोजना, यात्रा समय होगा आधा

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गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर को कैबिनेट की मंजूरी: ₹8,970 करोड़ की NH-15 परियोजना, यात्रा समय होगा आधा

सारांश

केंद्रीय कैबिनेट ने असम में ₹8,970 करोड़ की NH-15 गुवाहाटी-तेजपुर परियोजना को मंजूरी दी — 135 किमी का चार लेन कॉरिडोर जो यात्रा समय आधा करेगा, वायुसेना के लिए आपातकालीन लैंडिंग पट्टी देगा और काजीरंगा से कामाख्या तक पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी बदलेगा।

मुख्य बातें

केंद्रीय कैबिनेट ने 6 अगस्त 2026 को असम में NH-15 पर 135.871 किलोमीटर लंबे गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर को मंजूरी दी।
परियोजना की कुल लागत ₹8,970.20 करोड़ ; निर्मित-संचालन-स्थानांतरण (टोल) मोड पर विकसित होगी।
तेजपुर बाईपास पर 4.9 किलोमीटर लंबी आपातकालीन लैंडिंग सुविधा , भारतीय वायु सेना के समन्वय से।
5 बाईपास (कुल 58.7 किमी), 15 बड़े पुल , 19 फ्लाईओवर , 46 अंडरपास और 210 किमी सर्विस रोड शामिल।
यात्रा गति दोगुनी और यात्रा समय आधा होने का अनुमान; NH-27 पर यातायात का दबाव भी कम होगा।
माँ कामाख्या मंदिर, काजीरंगा और ओरंग राष्ट्रीय उद्यान समेत प्रमुख पर्यटन व लॉजिस्टिक केंद्रों से जुड़ाव।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने 6 अगस्त 2026 को असम में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 15 (NH-15) पर 135.871 किलोमीटर लंबे, चार लेन वाले पहुँच-नियंत्रित गुवाहाटी–तेजपुर कॉरिडोर के निर्माण को हरी झंडी दे दी। ₹8,970.20 करोड़ की इस परियोजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंजूरी मिली और उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इसकी घोषणा की।

परियोजना में क्या शामिल है

यह कॉरिडोर निर्मित-संचालन-स्थानांतरण (टोल) मोड पर राष्ट्रीय राजमार्ग (मूल) के तहत विकसित किया जाएगा। परियोजना में 15 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 19 फ्लाईओवर, 46 अंडरपास और 210 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का निर्माण शामिल है। तेजपुर बाईपास पर एक हाथी अंडरपास भी बनाया जाएगा, जो वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से उल्लेखनीय प्रावधान है।

इसके अलावा, बैहाटा चारियाली, सिपाझार, खारूपेटिया, ढेकियाजुली और तेजपुर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात सुगमता के लिए कुल 58.7 किलोमीटर लंबाई के पाँच प्रमुख बाईपास भी बनाए जाएंगे।

आपातकालीन लैंडिंग सुविधा: रणनीतिक महत्व

परियोजना का एक अहम रणनीतिक पहलू तेजपुर बाईपास पर 4.9 किलोमीटर लंबी आपातकालीन लैंडिंग सुविधा का निर्माण है, जिसे भारतीय वायु सेना के समन्वय से अंतिम रूप दिया गया है। यह सुविधा पूर्वोत्तर सीमावर्ती क्षेत्र में सड़क अवसंरचना को दोहरे — नागरिक और रक्षा — उद्देश्यों के लिए उपयोगी बनाती है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब सरकार पूर्वोत्तर में रणनीतिक बुनियादी ढाँचे को प्राथमिकता दे रही है।

यात्रियों और क्षेत्र पर असर

परियोजना के पूर्ण होने पर औसत यात्रा गति लगभग दोगुनी होगी और यात्रा समय आधा रह जाएगा। ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित NH-27 (पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर) पर यातायात का बोझ भी कम होगा। इसके साथ ही ईंधन खपत और वाहनों की परिचालन लागत में भी कमी आने की उम्मीद है।

यह कॉरिडोर आठ पीएम गति शक्ति आर्थिक केंद्रों (औद्योगिक पार्क), दो आकांक्षी जिलों (दरांग और उदलगुरी), तीन प्रमुख पर्यटन स्थलोंमाँ कामाख्या मंदिर, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और ओरंग राष्ट्रीय उद्यान — तथा सात लॉजिस्टिक केंद्रों (तीन रेलवे स्टेशन, दो हवाई अड्डे, दो जलमार्ग टर्मिनल) को निर्बाध रूप से जोड़ेगा।

असम और अरुणाचल प्रदेश के लिए व्यापक महत्व

यह परियोजना केवल असम तक सीमित नहीं है — यह अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख आर्थिक और प्रशासनिक केंद्रों तक भी बेहतर संपर्क सुनिश्चित करेगी। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर भारत में बुनियादी ढाँचे की ऐतिहासिक कमी को देखते हुए यह परियोजना क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन और माल ढुलाई में तेजी लाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि यह कॉरिडोर 'असम और अरुणाचल प्रदेश में निर्बाध कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा।'

क्रियान्वयन की समयसीमा और निविदा प्रक्रिया के विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन परियोजना की स्वीकृति पूर्वोत्तर में इस वर्ष की सबसे बड़ी राजमार्ग परियोजनाओं में से एक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — पूर्वोत्तर में कई राजमार्ग परियोजनाएँ भूगोल, भूमि अधिग्रहण और मौसमी बाधाओं के कारण वर्षों पिछड़ चुकी हैं। तेजपुर में वायुसेना की आपातकालीन लैंडिंग पट्टी का प्रावधान इस परियोजना को सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर से परे एक रणनीतिक आयाम देता है, जो अरुणाचल प्रदेश की सीमाओं के निकट होने के संदर्भ में विशेष रूप से प्रासंगिक है। ₹8,970 करोड़ का यह निवेश पर्यटन और लॉजिस्टिक्स दोनों को लाभ दे सकता है, बशर्ते निर्माण समयसीमा के भीतर पूरा हो।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुवाहाटी-तेजपुर NH-15 कॉरिडोर परियोजना क्या है?
यह असम में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 15 पर 135.871 किलोमीटर लंबा, चार लेन वाला पहुँच-नियंत्रित कॉरिडोर है, जिसे ₹8,970.20 करोड़ की लागत से टोल मोड पर विकसित किया जाएगा। केंद्रीय कैबिनेट ने इसे 6 अगस्त 2026 को मंजूरी दी।
इस परियोजना से यात्रियों को क्या फायदा होगा?
परियोजना के पूरा होने पर गुवाहाटी से तेजपुर के बीच औसत यात्रा गति लगभग दोगुनी होगी और यात्रा समय आधा रह जाएगा। पाँच बाईपास बनने से घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम से भी राहत मिलेगी।
तेजपुर में आपातकालीन लैंडिंग सुविधा क्यों बनाई जा रही है?
तेजपुर बाईपास पर 4.9 किलोमीटर लंबी आपातकालीन लैंडिंग पट्टी भारतीय वायु सेना के समन्वय से बनाई जाएगी। यह राजमार्ग को रक्षा उद्देश्यों के लिए भी उपयोगी बनाती है, जो पूर्वोत्तर की सामरिक स्थिति को देखते हुए महत्वपूर्ण है।
इस कॉरिडोर से कौन-कौन से प्रमुख स्थान जुड़ेंगे?
यह कॉरिडोर माँ कामाख्या मंदिर, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, ओरंग राष्ट्रीय उद्यान, आठ पीएम गति शक्ति औद्योगिक पार्क, दो आकांक्षी जिले (दरांग और उदलगुरी) और सात लॉजिस्टिक केंद्रों को जोड़ेगा। असम के साथ अरुणाचल प्रदेश को भी बेहतर संपर्क मिलेगा।
यह परियोजना NH-27 से कैसे अलग है और उस पर क्या असर पड़ेगा?
NH-27 (पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर) ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी किनारे पर है और अभी भारी यातायात का बोझ झेलता है। नया गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर एक वैकल्पिक मार्ग देगा, जिससे NH-27 पर भीड़भाड़ कम होगी और दोनों राजमार्गों की दक्षता बढ़ेगी।
राष्ट्र प्रेस
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