गुवाहाटी-तेजपुर 4-लेन हाईवे को कैबिनेट की मंजूरी, ₹8,970 करोड़ से बनेगा NH-15 कॉरिडोर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने 6 अगस्त 2026 को असम में राष्ट्रीय राजमार्ग-15 (NH-15) के अंतर्गत गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर के निर्माण को औपचारिक स्वीकृति दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में ₹8,970.20 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना को बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) टोल मॉडल पर विकसित करने का निर्णय लिया गया। यह 135.871 किलोमीटर लंबा चार-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी में एक निर्णायक बदलाव लाने की क्षमता रखता है।
परियोजना की मुख्य संरचना
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस कॉरिडोर में 58.7 किलोमीटर की कुल लंबाई वाले पाँच प्रमुख बाईपास बनाए जाएंगे। ये बाईपास बैहाटा चरियाली, सिपाझार, खरूपेटिया, देकियाजुली और तेजपुर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में यातायात का दबाव कम करेंगे। परियोजना में 15 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 19 फ्लाईओवर, 46 अंडरपास और लगभग 210 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का निर्माण भी शामिल है।
उल्लेखनीय है कि तेजपुर बाईपास क्षेत्र में भारतीय वायु सेना के समन्वय से 4.9 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) भी बनाई जाएगी, जो सैन्य विमानों की आपात स्थिति में उपयोग के लिए तैयार रहेगी। इसके अलावा वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से एक हाथी अंडरपास का निर्माण भी किया जाएगा।
यातायात और आर्थिक लाभ
सरकार के अनुसार, परियोजना पूरी होने के बाद यात्रा की औसत गति में लगभग 100 प्रतिशत की वृद्धि होगी और यात्रा का समय आधा हो जाएगा। इससे सड़क सुरक्षा में सुधार, ईंधन की बचत और वाहन संचालन लागत में कमी आने की उम्मीद है। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-27 (ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर) पर ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी हिस्से में बढ़ते यातायात के दबाव को भी कम करेगी।
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में बुनियादी ढाँचे के विस्तार को केंद्र सरकार की प्राथमिकता सूची में ऊपर रखा गया है। गौरतलब है कि असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा से लगे इस कॉरिडोर का सामरिक महत्व भी कम नहीं है।
पीएम गति शक्ति से जुड़ाव
सरकार ने बताया कि यह कॉरिडोर पीएम गति शक्ति योजना के तहत 8 आर्थिक नोड (औद्योगिक पार्क), 2 सामाजिक नोड (दरांग और उदलगुड़ी जिले) तथा 3 प्रमुख पर्यटन स्थलों को सीधे लाभ पहुँचाएगा। इन पर्यटन स्थलों में माँ कामाख्या मंदिर, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और ओरंग राष्ट्रीय उद्यान शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, परियोजना 7 लॉजिस्टिक नोड्स को भी जोड़ेगी — जिनमें 3 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 2 हवाई अड्डे और 2 जलमार्ग टर्मिनल शामिल हैं। इससे व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
पूर्वोत्तर के लिए व्यापक महत्व
यह कॉरिडोर असम और अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक केंद्रों को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ेगा। माल और यात्रियों की आवाजाही तेज और सुगम होने से क्षेत्र में निवेश आकर्षित होने की भी संभावना है। यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत को देश की मुख्यधारा की आर्थिक गतिविधियों से और अधिक मजबूती से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।