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ईंधन मूल्य वृद्धि पर तेजस्वी यादव का हमला: '10 दिनों में ₹5 की बढ़ोतरी, जनता पर भयंकर महंगाई आएगी'

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ईंधन मूल्य वृद्धि पर तेजस्वी यादव का हमला: '10 दिनों में ₹5 की बढ़ोतरी, जनता पर भयंकर महंगाई आएगी'

सारांश

10 दिनों में तीन बार ईंधन महंगा — कुल ₹5 प्रति लीटर की वृद्धि। तेजस्वी यादव ने एक्स पर सरकार को घेरा: '2014 से कच्चा तेल सस्ता, फिर भी दाम दुगुना।' पश्चिम एशिया के तनाव को सरकार का तर्क; विपक्ष की माँग — उत्पाद शुल्क घटाओ, जनता को राहत दो।

मुख्य बातें

सरकारी तेल कंपनियों ने 10 दिनों में तीसरी बार ईंधन की कीमतें बढ़ाई हैं — कुल वृद्धि लगभग ₹5 प्रति लीटर ।
पेट्रोल में 87 पैसे और डीज़ल में 91 पैसे प्रति लीटर की ताज़ा बढ़ोतरी की गई।
RJD नेता तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा कि 2014 के मुकाबले कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद पेट्रोल-डीज़ल के दाम दुगुना हो गए हैं।
यादव ने चेतावनी दी — प्राइवेट नौकरियाँ जाएंगी , प्रवासी श्रमिक लौटेंगे , लघु उद्योग सिकुड़ेंगे और बेरोज़गारी बढ़ेगी ।
सरकार ने वृद्धि का कारण पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी बताया।

बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने शनिवार, 23 मई को पेट्रोल, डीज़ल और सीएनजी की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में आम जनता को भयंकर महंगाई का सामना करना पड़ेगा। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने करीब 10 दिनों में तीसरी बार ईंधन की कीमतें बढ़ाई हैं — इस दौरान कुल वृद्धि लगभग ₹5 प्रति लीटर यानी औसतन 50 पैसे प्रतिदिन रही है।

ताज़ा मूल्य वृद्धि का ब्यौरा

शनिवार को की गई ताज़ा बढ़ोतरी में पेट्रोल की कीमत 87 पैसे प्रति लीटर और डीज़ल की कीमत 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ाई गई है। अधिकारियों के अनुसार यह वृद्धि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण की गई है, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ार पर पड़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब आम उपभोक्ता पहले से ही खाद्य पदार्थों की महंगाई से जूझ रहे हैं।

तेजस्वी यादव का सरकार पर आरोप

तेजस्वी यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'जब क्रूड ऑयल सस्ता था, तब भी ये आपकी जेब काटकर निजी कंपनियों को मुनाफ़ा दिला रहे थे और अब भी। जो भाव कच्चे तेल का 2014 में था, अब उससे भी बहुत कम है, लेकिन पेट्रोल-डीज़ल के दाम दुगुना हो गए हैं।' उनका यह बयान केंद्र सरकार की ईंधन मूल्य नीति पर सीधा सवाल उठाता है।

गौरतलब है कि विपक्ष लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें घटने पर उपभोक्ताओं को पूरा लाभ नहीं मिलता, जबकि कीमतें बढ़ने पर बोझ तुरंत जनता पर डाल दिया जाता है।

आम जनता पर संभावित असर

तेजस्वी यादव ने आशंका जताई कि ईंधन की बढ़ती कीमतों की वजह से प्राइवेट सेक्टर की नौकरियाँ जाएंगी, प्रवासी श्रमिक वापस लौटेंगे, लघु उद्योग-धंधे सिकुड़ेंगे और गरीबी तथा बेरोज़गारी बढ़ेगी। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों और ज़रूरी वस्तुओं की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, जिसका सबसे ज़्यादा असर निम्न और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा।

सरकार की प्राथमिकताओं पर तीखी टिप्पणी

यादव ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि उसका ध्यान रोज़गार, महंगाई, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों की बजाय 'हेडलाइन मैनेजमेंट' और सांप्रदायिक मुद्दों पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि जिन्हें 'नफ़रत का कारोबार, भाषणबाज़ी और रील्स' के लिए चुना गया था, वे उसी में व्यस्त रहेंगे।

आगे क्या

विपक्षी दलों की माँग है कि सरकार ईंधन पर लगने वाले केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कटौती करे ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। आलोचकों का कहना है कि जब तक पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक घरेलू ईंधन दरों पर दबाव बना रहेगा। अगले कुछ हफ्तों में सरकार की प्रतिक्रिया और संसद में इस मुद्दे पर होने वाली बहस पर सबकी नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनका मूल तर्क — कि कच्चे तेल की कीमतें 2014 से कम होने के बावजूद पेट्रोल-डीज़ल दुगुना महंगा हो गया — एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब सरकार ने आज तक पारदर्शी तरीके से नहीं दिया। केंद्रीय उत्पाद शुल्क की दरें इस अंतर की असली वजह हैं, और यह बहस हर बार ईंधन मूल्य वृद्धि के साथ उठती है पर नीतिगत बदलाव नहीं होता। विपक्ष की चेतावनियाँ अक्सर अतिरंजित लगती हैं, लेकिन प्रवासी श्रमिकों और लघु उद्योगों पर ईंधन लागत का असर वास्तविक और दस्तावेज़ीकृत है। असली जवाबदेही तब होगी जब सरकार उत्पाद शुल्क राजस्व और उपभोक्ता राहत के बीच के व्यापार-बंद को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करे।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पिछले 10 दिनों में ईंधन की कीमतें कितनी बढ़ी हैं?
सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 10 दिनों में तीन बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं, जिससे कुल वृद्धि लगभग ₹5 प्रति लीटर — यानी औसतन 50 पैसे प्रतिदिन — हो गई है। ताज़ा बढ़ोतरी में पेट्रोल 87 पैसे और डीज़ल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है।
तेजस्वी यादव ने एक्स पर क्या लिखा?
तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा कि जब कच्चा तेल सस्ता था तब भी सरकार जनता की जेब काटकर निजी कंपनियों को मुनाफ़ा दिला रही थी। उन्होंने कहा कि 2014 के मुकाबले कच्चे तेल का भाव अब उससे भी कम है, लेकिन पेट्रोल-डीज़ल के दाम दुगुना हो गए हैं।
ईंधन की कीमतें बढ़ाने की सरकारी वजह क्या है?
अधिकारियों के अनुसार यह वृद्धि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण की गई है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ार पर पड़ रहा है, जो घरेलू ईंधन दरों को प्रभावित करता है।
ईंधन मूल्य वृद्धि से आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
तेजस्वी यादव के अनुसार ईंधन महंगा होने से प्राइवेट सेक्टर की नौकरियाँ जाएंगी, प्रवासी श्रमिक वापस लौटेंगे, लघु उद्योग-धंधे सिकुड़ेंगे और गरीबी-बेरोज़गारी बढ़ेगी। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से खाद्य और ज़रूरी वस्तुओं की कीमतें भी ऊपर जा सकती हैं।
विपक्ष ईंधन महंगाई पर सरकार से क्या माँग कर रहा है?
विपक्षी दल माँग कर रहे हैं कि केंद्र सरकार पेट्रोल और डीज़ल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में कटौती करे ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। आलोचकों का कहना है कि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें घटने का लाभ जनता को नहीं दिया जाता, जबकि बढ़ोतरी का बोझ तुरंत डाल दिया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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