क्या विपक्ष सिर्फ पार्टियों का गठबंधन है, या पप्पुओं का भी?

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क्या विपक्ष सिर्फ पार्टियों का गठबंधन है, या पप्पुओं का भी?

सारांश

तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाया, जिसके बाद भाजपा ने उन पर तीखा हमला किया। क्या यह लोकतंत्र के साथ धोखा है? जानें इस विवाद की कहानी और राजनीति में इसकी गहरी छाप।

मुख्य बातें

तेजस्वी यादव का वोटर आईडी विवाद भाजपा का तेजस्वी पर आरोप लोकतंत्र के साथ धोखा का सवाल मतदाता सूची में असंगति चुनाव आयोग का प्रतिवाद

नई दिल्ली/पटना, 3 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव एक नए विवाद में फंस गए हैं। हाल ही में उन्होंने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए एक वोटर आईडी (ईपीआईसी नंबर) प्रस्तुत की, लेकिन भाजपा का कहना है कि यह नंबर फर्जी है और चुनाव आयोग की आधिकारिक मतदाता सूची में तेजस्वी का ईपीआईसी नंबर अलग है। इस मुद्दे पर भाजपा ने तेजस्वी पर कड़ा हमला बोलते हुए इसे लोकतंत्र के साथ धोखा आंका है।

भाजपा नेता अमित मालवीय ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर तेजस्वी पर कटाक्ष करते हुए लिखा, "मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा कि तेजस्वी यादव ने एक बार खुद की तुलना स्टीव जॉब्स से की थी, और अब उनके हाथ में कई तस्वीरें होने का खुलासा हो गया है। फर्जी तुलनाओं से लेकर फर्जी वोटर आईडी तक, यह पाखंड बेहद चौंकाने वाला है।" उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल पार्टियों का गठबंधन नहीं है, यह पप्पुओं का गठबंधन है।

इस बीच, भाजपा की बिहार इकाई ने इस मुद्दे को उठाते हुए तेजस्वी का वीडियो और मतदाता सूची में दर्ज उनके नाम की स्लिप साझा की। पार्टी ने लिखा, "तेजस्वी यादव का दो ईपीआईसी नंबर वाला खेल, ये मजाक नहीं, लोकतंत्र के साथ धोखा है। अब साफ है, फर्जीवाड़ा राजद की राजनीति की रगों में दौड़ता है।"

भाजपा का दावा है कि विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान तेजस्वी यादव का ईपीआईसी नंबर 'आरएबी0456228' था और 2025 की प्रारंभिक मतदाता सूची में भी यही नंबर दर्ज है। वहीं, तेजस्वी द्वारा हाल में दिखाया गया ईपीआईसी नंबर 'आरएबी2916120' अलग है। भाजपा ने आरोप लगाया कि यह नंबर गुमराह करने के लिए बनवाया गया है और यदि यह वास्तव में उनके पास है, तो यह गंभीर चुनावी अपराध की श्रेणी में आता है।

भाजपा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या तेजस्वी यादव का नाम दो अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में है? अगर ऐसा है, तो यह निर्वाचन कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है।

पार्टी ने लिखा, "अगर तेजस्वी यादव की ओर से दिखाई गई वोटर आईडी उनके पास है, तब तो और गंभीर सवाल उठता है कि क्या तेजस्वी यादव का नाम दो-दो जगह की मतदान सूची में है? फिर तो यह पूरी तरह गैर-कानूनी कृत्य है। बोगस वोटिंग, बूथ कैप्चरिंग और बैलेट लूटना, ये राजद के मूल चरित्र का अहम हिस्सा हैं। उसी चरित्र को तेजस्वी यादव ने खुलेआम दिखाया है।"

भाजपा ने अपने दावे के समर्थन में 2020 और 2025 की वोटर लिस्ट में दर्ज तेजस्वी यादव की स्लिप की तस्वीरें भी सार्वजनिक की हैं।

गौरतलब है कि तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना आवेदन नंबर बताते हुए दावा किया था कि वोटर लिस्ट में उनका नाम नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मेरा नाम नहीं है, अब चुनाव कैसे लडूंगा। हालांकि, कुछ समय बाद चुनाव आयोग ने राजद नेता के दावे को खारिज करते हुए मतदाता सूची जारी की, जिसमें तेजस्वी यादव की फोटो के साथ उनका ईपीआईसी दर्ज था।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें लोकतंत्र की मूलभूत प्रक्रियाओं का उल्लंघन होता दिखाई दे रहा है। तेजस्वी यादव का दावा और भाजपा का प्रतिवाद दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। यह देखना जरूरी है कि क्या चुनावी प्रक्रिया में ऐसी समस्याएं भविष्य में और भी सामने आएंगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेजस्वी यादव पर भाजपा ने क्या आरोप लगाए हैं?
भाजपा ने आरोप लगाया है कि तेजस्वी यादव द्वारा पेश की गई वोटर आईडी फर्जी है और उनके पास मौजूद ईपीआईसी नंबर अलग है।
क्या तेजस्वी यादव का नाम दो अलग-अलग मतदाता सूचियों में है?
भाजपा ने यह सवाल उठाया है कि यदि ऐसा है, तो यह निर्वाचन कानूनों का उल्लंघन है।
तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर क्या सवाल उठाए?
तेजस्वी ने दावा किया कि वोटर लिस्ट में उनका नाम नहीं है, लेकिन चुनाव आयोग ने उनकी बात का खंडन किया।
भाजपा ने इस मुद्दे पर क्या कदम उठाए हैं?
भाजपा ने तेजस्वी के ईपीआईसी नंबर की तुलना की और इसे फर्जी करार दिया, साथ ही इस पर वीडियो और स्लिप साझा की।
इस विवाद के पीछे का मुख्य कारण क्या है?
यह विवाद तेजस्वी यादव द्वारा चुनाव आयोग पर उठाए गए सवालों और भाजपा के प्रतिवाद के कारण उत्पन्न हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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