राजकोट चिड़ियाघर में तीन एशियाई शेर शावकों का जन्म, कुल संख्या 20 हुई
सारांश
मुख्य बातें
राजकोट चिड़ियाघर में 22 जुलाई 2026 की रात एशियाई शेर 'धनंजय' और शेरनी 'धरती' के यहाँ तीन स्वस्थ शावकों का जन्म हुआ, जिससे चिड़ियाघर में एशियाई शेरों की कुल संख्या 20 हो गई है। अधिकारियों ने 28 जुलाई को यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि माँ और तीनों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं।
प्रजनन का विवरण
107 दिनों के गर्भकाल के बाद जन्मे ये तीनों शावक चिड़ियाघर के हालिया सफल प्रजनन अभियान की कड़ी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब इससे महज एक महीने पहले, 11 जून को, मादा शेर 'धारा' ने भी तीन शावकों को जन्म दिया था। दोनों ही मामलों में माँ और शावक स्वस्थ बताए जा रहे हैं।
निगरानी और देखभाल
चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक और कर्मचारी सीसीटीवी के माध्यम से मादा शेर और उसके शावकों पर चौबीसों घंटे नज़र रख रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, राजकोट नगर निगम द्वारा संचालित इस चिड़ियाघर को सेंट्रल ज़ू अथॉरिटी ऑफ इंडिया की देखरेख में आधुनिक तरीके से विकसित किया गया है।
चिड़ियाघर की वर्तमान स्थिति
नए जन्मों के बाद अब चिड़ियाघर में कुल 20 एशियाई शेर हैं — जिनमें 4 वयस्क नर, 8 वयस्क मादा, 2 युवा नर और 6 शावक शामिल हैं। गौरतलब है कि जब से राजकोट चिड़ियाघर ने अपना प्रजनन कार्यक्रम शुरू किया है, तब से यहाँ 58 एशियाई शेर शावकों का जन्म हो चुका है। चिड़ियाघर में इस समय 70 प्रजातियों के 614 जानवर और पक्षी मौजूद हैं।
वाइल्डलाइफ एक्सचेंज प्रोग्राम की भूमिका
वाइल्डलाइफ एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत राजकोट चिड़ियाघर ने देश के कई संस्थानों को शेर दिए हैं, जिनमें मैसूर, हैदराबाद, छटबीर (पंजाब), लखनऊ, भिलाई (छत्तीसगढ़), कांकरिया (अहमदाबाद) और सक्करबाग (जूनागढ़) के चिड़ियाघर शामिल हैं। इसी कार्यक्रम के ज़रिए चिड़ियाघर ने अपने संग्रह को समृद्ध करने के लिए भारत भर के चिड़ियाघरों से विभिन्न प्रजातियाँ भी प्राप्त की हैं।
पर्यटन और भविष्य की संभावनाएँ
अधिकारियों के अनुसार, राजकोट चिड़ियाघर का प्राकृतिक वन जैसा वातावरण एशियाई शेरों और सफेद बाघों के प्रजनन के लिए अनुकूल सिद्ध हुआ है। यह चिड़ियाघर सौराष्ट्र क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है और प्रतिवर्ष लगभग 7 लाख पर्यटक यहाँ आते हैं। इन नए शावकों के जन्म से आने वाले महीनों में पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि की उम्मीद है।