19 सितंबर 2026
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ममता बनर्जी को दोहरा झटका: नंदीग्राम के बाद रेजीनगर से भी TMC उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने नामांकन वापस लिया

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ममता बनर्जी को दोहरा झटका: नंदीग्राम के बाद रेजीनगर से भी TMC उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने नामांकन वापस लिया

सारांश

ममता बनर्जी की TMC के लिए दोहरा झटका — नंदीग्राम के बाद रेजीनगर से भी पार्टी उम्मीदवार ने 19 सितंबर को नामांकन वापस लिया। 6 अक्टूबर के उपचुनाव में अब TMC का कोई प्रत्याशी नहीं; BJP, कांग्रेस और वामदलों के बीच सीधी टक्कर होगी।

मुख्य बातें

रबीउल आलम चौधरी ने 19 सितंबर 2026 को रेजीनगर विधानसभा से TMC की ओर से नामांकन वापस लिया।
इससे पहले नंदीग्राम से TMC उम्मीदवार संचिता प्रधान ने भी पर्चा वापस लिया था — दोनों सीटों पर TMC उपचुनाव से बाहर।
नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा।
BJP ने नंदीग्राम से हासी रानी रथ और रेजीनगर से शंखारव सरकार को उम्मीदवार बनाया।
कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार मिलन प्रधान को नंदीग्राम से चुनाव लड़ने से पहले एक पुराने मामले में शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया।
रेजीनगर सीट AJUP संस्थापक हुमायूं कबीर के इस्तीफे और नंदीग्राम सीट सुवेंदु अधिकारी द्वारा भवानीपुर चुनने के बाद खाली हुई थी।

पश्चिम बंगाल में 19 सितंबर 2026 को राजनीतिक हलचल उस वक्त तेज हो गई, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने नामांकन पत्र वापस लेने की अंतिम तारीख पर अपना नाम वापस ले लिया। इसके साथ ही ममता बनर्जी की पार्टी नंदीग्राम और रेजीनगर — दोनों सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पूरी तरह बाहर हो गई है।

मुख्य घटनाक्रम

चुनाव आयोग (ECI) ने नामांकन वापसी की अंतिम तारीख 19 सितंबर निर्धारित की थी। इसी दिन रबीउल आलम चौधरी ने रेजीनगर से पर्चा वापस लिया। इससे पहले, नंदीग्राम सीट से TMC उम्मीदवार संचिता प्रधान ने भी नामांकन वापस लेकर पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं।

उपचुनाव की पृष्ठभूमि

नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव की ज़रूरत तब पड़ी, जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने यह सीट छोड़कर भवानीपुर सीट अपने पास रखने का निर्णय किया — जहाँ उन्होंने इस साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी को हराया था।

वहीं, रेजीनगर सीट आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के संस्थापक हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई। हुमायूं कबीर ने नाओदा विधानसभा से भी जीत दर्ज की थी और दोहरी सदस्यता नियमों के चलते रेजीनगर छोड़नी पड़ी।

मैदान में कौन-कौन

कांग्रेस ने रेजीनगर से मोहम्मद अब्दुल्लाहिल को और नंदीग्राम से मिलन प्रधान को अपना उम्मीदवार बनाया है। गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को अपना समर्थन देने की घोषणा की थी। हालाँकि, शुक्रवार को एक पुराने मामले में मिलन प्रधान को गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे TMC की रणनीति पर और सवाल खड़े हो गए।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नंदीग्राम से हासी रानी रथ को उम्मीदवार घोषित किया है — जो मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के पूर्व पीए चंद्रनाथ रथ की माँ हैं। विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद चंद्रनाथ रथ की हत्या कर दी गई थी। रेजीनगर से BJP ने शंखारव सरकार को टिकट दिया है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) ने रेजीनगर से एडवोकेट सईद असद अली को, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने नंदीग्राम से शांति गोपाल गिरी को मैदान में उतारा है।

ममता की रणनीति पर असर

TMC का दोनों सीटों से एक साथ बाहर होना पार्टी के लिए रणनीतिक तौर पर बड़ा नुकसान माना जा रहा है। नंदीग्राम पहले से ही ममता बनर्जी के लिए संवेदनशील सीट रही है, क्योंकि इसी सीट पर उन्हें इस साल के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। रेजीनगर से भी प्रत्याशी का पर्चा वापसी इस बात का संकेत देती है कि TMC के भीतर या बाहरी दबाव में कोई बड़ी उथल-पुथल चल रही है।

क्या होगा आगे

दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा। TMC के बिना इस मुकाबले में BJP, कांग्रेस, CPI-M और CPI के बीच सीधी टक्कर देखी जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नंदीग्राम की भावनात्मक पृष्ठभूमि को देखते हुए BJP के लिए इस सीट पर अपनी स्थिति मज़बूत करने का अवसर है, जबकि रेजीनगर में त्रिकोणीय मुकाबला रोचक हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह महज़ संयोग नहीं। रेजीनगर से भी पर्चा वापसी यह सवाल उठाती है कि क्या TMC में आंतरिक अनुशासन कमज़ोर हो रहा है, या यह किसी व्यापक गठबंधन रणनीति का हिस्सा है जिसे सार्वजनिक नहीं किया गया। कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी और TMC के समर्थन की घोषणा के बावजूद यह हलचल यह संकेत देती है कि विपक्षी एकता का ताना-बाना पश्चिम बंगाल में अभी कच्चा है। BJP के लिए यह अवसर है कि वह नंदीग्राम में अपनी भावनात्मक और राजनीतिक पकड़ को और मज़बूत करे।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रेजीनगर उपचुनाव में TMC उम्मीदवार ने नामांकन क्यों वापस लिया?
TMC उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने 19 सितंबर 2026 को नामांकन वापसी की अंतिम तारीख पर रेजीनगर विधानसभा से अपना नाम वापस ले लिया। इस कदम के पीछे के कारण आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किए गए हैं।
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव कब होंगे?
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को होने हैं। TMC के बाहर होने के बाद अब इन सीटों पर BJP, कांग्रेस और वामदलों के बीच मुकाबला होगा।
नंदीग्राम में उपचुनाव की ज़रूरत क्यों पड़ी?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट छोड़कर भवानीपुर सीट अपने पास रखने का फैसला किया, जहाँ उन्होंने इस साल की शुरुआत में ममता बनर्जी को हराया था। सीट खाली होने पर उपचुनाव कराया जा रहा है।
नंदीग्राम और रेजीनगर में अब कौन-कौन से उम्मीदवार मैदान में हैं?
नंदीग्राम से BJP ने हासी रानी रथ को, कांग्रेस ने मिलन प्रधान को और CPI ने शांति गोपाल गिरी को उतारा है। रेजीनगर से BJP ने शंखारव सरकार को, कांग्रेस ने मोहम्मद अब्दुल्लाहिल को और CPI-M ने एडवोकेट सईद असद अली को उम्मीदवार बनाया है।
कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को क्यों गिरफ्तार किया गया?
नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को शुक्रवार को एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया। ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में मिलन प्रधान को अपना समर्थन देने की घोषणा की थी, लेकिन उनकी गिरफ्तारी से स्थिति पेचीदा हो गई है।
राष्ट्र प्रेस
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