17 अक्टूबर 2026
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अरुणाचलेश्वर मंदिर में गैर-हिंदू प्रवेश विवाद: तमिलनाडु BJP अध्यक्ष नागेंद्रन ने मंत्री रमेश पर साधा निशाना

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अरुणाचलेश्वर मंदिर में गैर-हिंदू प्रवेश विवाद: तमिलनाडु BJP अध्यक्ष नागेंद्रन ने मंत्री रमेश पर साधा निशाना

सारांश

तमिलनाडु BJP अध्यक्ष नागेंद्रन ने मंत्री रमेश पर आरोप लगाया कि वे एक मुस्लिम व्यक्ति को अरुणाचलेश्वर मंदिर में ले गए। मद्रास हाईकोर्ट के 2024 के फैसले और आगम नियमों का हवाला देकर उन्होंने कार्रवाई की माँग की — मंत्री या मंदिर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं।

मुख्य बातें

तमिलनाडु BJP अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने 17 अक्टूबर 2026 को हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री एस.
कथित आरोप है कि मंत्री एक मुस्लिम व्यक्ति को तिरुवन्नामलाई के अरुणाचलेश्वर मंदिर में ले गए।
नागेंद्रन ने 2024 में मद्रास उच्च न्यायालय के उस फैसले का हवाला दिया जिसमें गैर-हिंदुओं को ध्वजस्तंभ से आगे जाने से रोका गया था।
मदुरै के मीनाक्षी अम्मन मंदिर में TVK विधायक वी.एम.एस.
मुस्तफा की अभिषेक के दौरान मौजूदगी का भी मुद्दा उठाया गया।
भाजपा ने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की माँग की।
मंत्री रमेश और मंदिर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने 17 अक्टूबर 2026 को राज्य के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री एस. रमेश पर गंभीर आरोप लगाए। नागेंद्रन ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि मंत्री रमेश तिरुवन्नामलाई स्थित ऐतिहासिक अरुणाचलेश्वर मंदिर में एक मुस्लिम व्यक्ति को अपने साथ ले गए, जो मंदिर के आगम नियमों और अदालती निर्देशों का उल्लंघन है। भाजपा नेता ने इस कथित घटना को निंदनीय बताते हुए संबंधित व्यक्ति के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की माँग की।

मुख्य आरोप और एक्स पर पोस्ट

नागेंद्रन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए यह आरोप सार्वजनिक किए। उन्होंने लिखा कि जिस समाज में सांप्रदायिक शांति कायम है, वहाँ मंत्री ने इस कदम से अनावश्यक विवाद खड़ा किया है। उनके अनुसार, हिंदू धार्मिक संस्थानों के प्रशासन की ज़िम्मेदारी निभाने वाले पदाधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वे इनकी पवित्रता और स्थापित परंपराओं को बनाए रखें।

नागेंद्रन ने आगे दावा किया कि मंत्री के साथ आए मुस्लिम व्यक्ति को उनके सहायक के रूप में प्रस्तुत किया गया था और वह व्यक्ति सिर पर टोपी पहने हुए था।

मद्रास हाईकोर्ट के फैसले का हवाला

BJP प्रदेश अध्यक्ष ने 2024 में मद्रास उच्च न्यायालय के एक फैसले का उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर तमिलनाडु के मंदिरों में गैर-हिंदुओं को ध्वजस्तंभ से आगे जाने की अनुमति न देने का निर्देश दिया गया था। उनका कहना था कि इस न्यायिक निर्देश के बावजूद मंत्री का यह कदम कानून और परंपरा दोनों की अवहेलना करता है।

यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में मंदिरों के प्रशासन और धार्मिक प्रवेश-नियमों को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस चल रही है।

मीनाक्षी मंदिर अभिषेक का भी उठाया मुद्दा

नागेंद्रन ने मदुरै के मीनाक्षी अम्मन मंदिर में हुए अभिषेक समारोह का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के विधायक वी.एम.एस. मुस्तफा उस समारोह के दौरान अग्रिम पंक्ति में मौजूद थे। दोनों घटनाओं को एक साथ रखते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि मंत्री रमेश ऐसी भागीदारी को संभव बनाने में किस उद्देश्य को साधना चाहते थे।

BJP की माँग और भेद का तर्क

नागेंद्रन ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत आस्था के चलते स्वेच्छा से हिंदू मंदिर आने वाले अन्य धर्म के श्रद्धालुओं का मामला अलग है। उनकी आपत्ति उस कथित व्यवस्था पर थी, जो कथित तौर पर विवाद उत्पन्न करने के उद्देश्य से की गई। उन्होंने मंत्री से ऐसे किसी भी कदम से बचने की अपील की जिससे सामाजिक आक्रोश पैदा हो या सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने अधिकारियों से माँग की कि कथित रूप से आगम नियमों और कानून का उल्लंघन कर मंदिर में प्रवेश करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध तत्काल मामला दर्ज किया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु ठोस कदम उठाए जाएँ।

मंत्री और मंदिर प्रशासन की प्रतिक्रिया

इन आरोपों पर मंत्री एस. रमेश अथवा अरुणाचलेश्वर मंदिर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस विषय पर DMK सरकार की चुप्पी आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज़ कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें हिंदू धार्मिक संस्थानों का प्रशासन केंद्रीय राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। गौरतलब है कि मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को आधार बनाकर उठाए गए ये आरोप कानूनी वज़न रखते हैं, लेकिन घटना की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। मंत्री रमेश और मंदिर प्रशासन की चुप्पी इस राजनीतिक आरोप को और गहरा करती है। आलोचक यह भी पूछ सकते हैं कि जब राज्य सरकार मंदिरों का प्रशासन संभालती है, तो धार्मिक प्रवेश-नियमों की निगरानी की जवाबदेही किस पर है — इस सवाल का जवाब न BJP दे रही है, न DMK।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरुणाचलेश्वर मंदिर विवाद क्या है?
तमिलनाडु BJP अध्यक्ष नागेंद्रन ने आरोप लगाया है कि हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री एस. रमेश एक मुस्लिम व्यक्ति को तिरुवन्नामलाई के अरुणाचलेश्वर मंदिर में ले गए। यह आगम नियमों और मद्रास उच्च न्यायालय के 2024 के फैसले का उल्लंघन बताया जा रहा है।
मद्रास हाईकोर्ट का 2024 का फैसला क्या था?
BJP के अनुसार, मद्रास उच्च न्यायालय ने 2024 में निर्देश दिया था कि तमिलनाडु के मंदिरों में गैर-हिंदुओं को ध्वजस्तंभ से आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाए। नागेंद्रन ने इसी फैसले का हवाला देकर मंत्री के कदम को कानून का उल्लंघन बताया है।
BJP ने इस मामले में क्या माँग की है?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नागेंद्रन ने अधिकारियों से माँग की है कि आगम नियमों और कानून का कथित उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के खिलाफ तत्काल मामला दर्ज किया जाए। उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की भी माँग की।
मीनाक्षी अम्मन मंदिर के प्रकरण को इस विवाद से कैसे जोड़ा गया?
नागेंद्रन ने मदुरै के मीनाक्षी अम्मन मंदिर में हुए अभिषेक समारोह का हवाला दिया, जिसमें TVK विधायक वी.एम.एस. मुस्तफा कथित तौर पर अग्रिम पंक्ति में मौजूद थे। उन्होंने इन दोनों घटनाओं को एक ही प्रवृत्ति के रूप में प्रस्तुत किया।
मंत्री एस. रमेश और मंदिर प्रशासन ने क्या कहा?
17 अक्टूबर 2026 तक मंत्री एस. रमेश और अरुणाचलेश्वर मंदिर प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला अभी भी एकतरफा आरोपों के स्तर पर है।
राष्ट्र प्रेस
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