तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन का टीवीके सरकार पर आरोप: हिंदू धार्मिक अधिकारों में हो रहा दखल
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने 5 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार पर पुदुकोट्टई जिले के लिंगमलाई में प्रस्तावित ईसाई प्रार्थना सभा को लेकर हिंदू धार्मिक प्रथाओं में दखल देने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रशासन हिंदू समुदाय के धार्मिक अधिकारों की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रहा है। राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकी।
लिंगमलाई विवाद: क्या है मामला
नागेंद्रन ने गुरुवार को जारी अपने बयान में आरोप लगाया कि मलम्पट्टी के पास स्थित लिंगमलाई में 400 साल पुराने शिव मंदिर के निकट ईसाई प्रार्थना सभा आयोजित करने की तैयारी की जा रही थी, जबकि ऐसी गतिविधियों पर कथित तौर पर प्रतिबंध है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह प्रस्तावित सभा 24 नवंबर को 'महा कार्तिगई' पर्व के दिन होनी थी — जो हिंदू श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है।
नागेंद्रन के अनुसार, जिस स्थान पर यह सभा प्रस्तावित थी, वहाँ कथित तौर पर बिना किसी अनुमति के एक क्रॉस (ईसाई प्रतीक) भी लगाया गया है। उन्होंने लिंगमलाई को ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील स्थल बताते हुए कहा कि यहाँ प्राचीन शिव मंदिर के साथ-साथ चोल-युगीन शिलालेख, मूर्तियाँ और नंदी की एक प्रतिमा भी मौजूद है।
हिंदू श्रद्धालु पर कथित हमला
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने मारिमुथु नामक एक हिंदू श्रद्धालु पर हुए कथित हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि मारिमुथु ने इस प्रार्थना सभा का विरोध किया था, जिसके बाद कथित तौर पर उन पर हमला हुआ। नागेंद्रन ने इस घटना को हिंदू आस्था पर सीधा प्रहार बताया और प्रशासन पर जानबूझकर हिंदू धार्मिक परंपराओं में बाधा डालने का आरोप दोहराया।
वरिष्ठ भाजपा नेता एच. राजा के आरोप
इसी संदर्भ में वरिष्ठ भाजपा नेता एच. राजा ने भी टीवीके सरकार पर हिंदू रीति-रिवाजों को कमज़ोर करने का आरोप लगाया। राजा ने विजयादशमी के दिन बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाने की पारंपरिक प्रथा — जिसे 'विद्यारंभम' कहते हैं — पर लगाई गई कथित पाबंदियों का सवाल उठाया। उन्होंने इस परंपरा को हिंदू संस्कृति का अभिन्न अंग बताया।
राजा ने मदुरै सेंट्रल के विधायक मुस्तफा के मीनाक्षी अम्मन मंदिर जाने का भी उल्लेख करते हुए सत्ताधारी दल के कुछ प्रतिनिधियों के हिंदू धार्मिक भावनाओं के प्रति रवैये पर सवाल खड़े किए। उन्होंने सरकार की धर्मनिरपेक्ष साख पर भी सवाल उठाते हुए वरिष्ठ संवैधानिक पदों और मंत्रालयों में धार्मिक संबद्धताओं की ओर इशारा किया।
तिरुपरनकुंद्रम विवाद से जुड़ा संदर्भ
नागेंद्रन ने मदुरै की तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर 'कार्तिगई दीपम' जलाने को लेकर हुए विवाद का भी हवाला दिया और आरोप लगाया कि सरकार स्थापित धार्मिक प्रथाओं पर अंकुश लगा रही है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब राज्य में धार्मिक परंपराओं और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर राजनीतिक विवाद उठा हो — तमिलनाडु में मंदिर प्रशासन और अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक धार्मिक मसले लंबे समय से संवेदनशील रहे हैं।
भाजपा की माँग और आगे की राह
दोनों नेताओं ने एकजुट होकर माँग की कि टीवीके सरकार हिंदू धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप बंद करे और सभी धार्मिक समुदायों को समान सुरक्षा सुनिश्चित करे। नागेंद्रन ने मुख्यमंत्री विजय से आग्रह किया कि वे ठोस कदम उठाकर यह साबित करें कि उनका प्रशासन किसी एक समुदाय का नहीं, बल्कि सभी का प्रतिनिधित्व करता है। राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान अभी तक सामने नहीं आया है, और यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है।