कैट ने राहुल गांधी को लिखा पत्र: 'प्रदर्शन का अधिकार आजीविका छीनने का लाइसेंस नहीं', 'धिक्कार दिवस' का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने 5 नवंबर 2026 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक औपचारिक पत्र भेजकर पिछले एक महीने से नई दिल्ली में लगातार हो रही राजनीतिक रैलियों, धरनों और प्रदर्शनों के कारण व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ रहे गंभीर असर को लेकर देशभर के व्यापारियों की गहरी पीड़ा व्यक्त की है। संगठन ने विशेष रूप से 1 नवंबर की रैली और विभिन्न संगठनों के प्रदर्शनों को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) तथा अन्य राजनीतिक दलों द्वारा दिए जा रहे समर्थन पर तीखे सवाल उठाए हैं।
मुख्य आरोप और पाँच सवाल
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने पत्र में राहुल गांधी और कांग्रेस की राजनीतिक व नैतिक जिम्मेदारी को सीधे कटघरे में खड़ा किया। भरतिया ने लिखा, 'राहुल गांधी एक साथ दो विरोधाभासी बातें नहीं कर सकते। एक ओर वे लोगों से स्थानीय बाजारों से खरीदारी करने की अपील करते हैं और दूसरी ओर ऐसे राजनीतिक कार्यक्रमों व प्रदर्शनों का समर्थन करते हैं, जिनके कारण ग्राहक उन्हीं बाजारों तक नहीं पहुंच पाते।'
संगठन ने राहुल गांधी के सामने पाँच सुनिश्चित सवाल रखे — क्या प्रदर्शन का अधिकार व्यापार एवं आजीविका के अधिकार से बड़ा है? राष्ट्रीय राजधानी के व्यापारिक जीवन को बंधक बनाना क्या राजनीतिक और नैतिक रूप से उचित है? प्रभावित व्यापारियों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा? स्थानीय बाजारों तक ग्राहकों की पहुँच रोकने वाले प्रदर्शनों का समर्थन कैसे किया जा सकता है? और क्या कांग्रेस उन प्रदर्शनों से उत्पन्न आर्थिक कठिनाइयों की जिम्मेदारी स्वीकार करती है?
संवैधानिक अधिकारों पर बहस
भरतिया ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 19(1)(जी) (व्यापार व पेशे का अधिकार) का हवाला देते हुए कहा कि राजनीतिक नेता संविधान के प्रावधानों की चुनिंदा व्याख्या करते हुए दूसरों के अधिकारों की अनदेखी नहीं कर सकते। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, 'राजनीतिक विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन राजनीतिक विरोध के नाम पर किसी दूसरे की आजीविका बर्बाद करना न तो लोकतंत्र है और न ही जिम्मेदार राजनीतिक नेतृत्व।'
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब देश में त्योहारी एवं विवाह खरीदारी का मौसम चल रहा है — वर्ष के इस हिस्से में छोटे व्यापारियों और दुकानदारों की सालाना आमदनी का बड़ा हिस्सा दांव पर होता है।
व्यापारियों की पीड़ा और दिल्ली की आर्थिक अहमियत
भरतिया ने ज़ोर देकर कहा कि दिल्ली केवल राजनीतिक शक्ति-प्रदर्शन का मंच नहीं, बल्कि देश का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक एवं आर्थिक केंद्र है। दिल्ली के बाज़ार करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार हैं और देश की अर्थव्यवस्था व सरकारी राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने कहा, 'देश के व्यापारी किसी के राजनीतिक संघर्ष के पंचिंग बैग नहीं हैं।'
यह ऐसे समय में आया है जब छोटे व्यापारी, रेहड़ी-पटरी वाले और कामगार परिवार पहले से ही महँगाई और कमज़ोर उपभोक्ता माँग का दबाव झेल रहे हैं।
'धिक्कार दिवस' और आगे की रणनीति
कैट ने घोषणा की है कि राहुल गांधी का जवाब मिलने के बाद दिवाली के तुरंत बाद नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें दिल्ली सहित देशभर के प्रमुख व्यापारिक नेता शामिल होंगे। इस बैठक में देशभर में 'धिक्कार दिवस' मनाने की तारीख तय की जाएगी। संगठन का मानना है कि अब यह केवल दिल्ली के व्यापारियों का मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर राष्ट्रीय प्रश्न बन चुका है।
आगे क्या होगा
कैट ने स्पष्ट किया कि वह राहुल गांधी के उत्तर की प्रतीक्षा करेगा और दिवाली के बाद की राष्ट्रीय बैठक में आगे की रणनीति निर्धारित होगी। संगठन ने यह भी कहा कि यदि इस प्रकार के प्रदर्शन देश के किसी भी अन्य शहर में हुए, तो वहाँ के व्यापारी भी उतनी ही दृढ़ता से प्रतिक्रिया देंगे। व्यापारी समुदाय का यह संगठित आक्रोश आने वाले हफ्तों में राजनीतिक दलों के लिए एक उपेक्षा न करने योग्य दबाव बन सकता है।