ट्रंप का दावा: ईरान 'विफल राष्ट्र', 350% महंगाई और सैन्य बर्बादी के बीच कोई स्पष्ट नेता नहीं
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 सितंबर को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की सशस्त्र शक्ति गंभीर रूप से कमज़ोर पड़ चुकी है और देश में कोई स्पष्ट नेतृत्व नहीं बचा है। उन्होंने ईरान को 'विफल राष्ट्र' करार देते हुए कहा कि वहाँ 350 प्रतिशत महंगाई है और सैनिकों को वेतन तक नहीं मिल रहा।
नेतृत्व संकट पर ट्रंप के दावे
जब पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि बातचीत के रुकने और नए हमलों के बाद ईरान में नेतृत्व की बागडोर किसके हाथ में है, तो उन्होंने कहा, 'उन्हें खुद भी शायद नहीं पता। मेरी राय में, उन्हें नहीं पता कि उनका नेता कौन है। कट्टरपंथी लोग तो हैं, लेकिन सैन्य दृष्टि से उनका काफी सफाया हो चुका है, क्योंकि उनकी सेना अब पहले जैसी नहीं रही।' उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने किसी विशेष व्यक्ति या समूह का नाम नहीं लिया और न ही अपने दावों के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत किया।
ईरान की आर्थिक और सैन्य स्थिति पर आरोप
ट्रंप ने ईरान की आंतरिक स्थिति का विस्तृत चित्रण करते हुए कहा, 'वहाँ 350 प्रतिशत महंगाई है, उनकी मुद्रा की हालत खराब है, सैनिकों को वेतन नहीं मिल रहा है, उनके कई नेता मारे जा चुके हैं, उनकी नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है, वायुसेना भी नहीं के बराबर है और उनकी निगरानी व्यवस्था का अधिकांश हिस्सा भी नष्ट हो चुका है।' हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और इन्हें ट्रंप के अपने आकलन के रूप में समझा जाना चाहिए।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति को नियंत्रण में रखा हुआ है। उन्होंने कहा, 'होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति हमारे नियंत्रण में है। कल रात नौसेना की मदद से कई जहाज सुरक्षित रूप से वहाँ से गुजर पाए।' उनके अनुसार, प्रतिदिन रात औसतन करीब 30 जहाज इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजर रहे हैं और बड़ी मात्रा में तेल की आपूर्ति जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी कारण तेल की कीमतें उतनी नहीं बढ़ीं जितनी आशंका जताई जा रही थी।
परमाणु हथियार रोकना मुख्य उद्देश्य
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी अभियान का केंद्रीय लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उन्होंने कहा, 'ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं पाएगा। असली मुद्दा यही है।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है, तो इससे इज़रायल, पूरे मध्य पूर्व और भविष्य में अमेरिका के लिए भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
अभियान की सीमा पर अस्पष्टता
जब ट्रंप से पूछा गया कि नए हमले सीमित कार्रवाई हैं या पूर्ण युद्ध की ओर लौटने का संकेत, तो उन्होंने इस अभियान की अवधि या दायरे के बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने केवल इतना कहा, 'इसका यह मतलब नहीं है कि हम उन्हें जवाब नहीं देंगे। आगे क्या होगा, यह देखेंगे।' यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय मध्य पूर्व में तनाव के विस्तार को लेकर गहरी चिंता में है।