ट्रंप का दावा: ईरानी सेना पूरी तरह कमज़ोर, 'अब कोई ईरान का नेता नहीं बनना चाहता'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 27 जून को वॉशिंगटन में आयोजित 'फेथ एंड फ्रीडम कोएलिशन' के 'रोड टू मेजॉरिटी' सम्मेलन में दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता को अमेरिकी कार्रवाई ने बुरी तरह ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि तेहरान का नेतृत्व इस हद तक हिल गया है कि 'अब कोई भी ईरान का नेता नहीं बनना चाहता।' ट्रंप के ये बयान हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बचाव में आए हैं, जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी बहस जारी है।
ट्रंप के दावे: सेना, नेतृत्व और परमाणु समझौता
ट्रंप ने सम्मेलन में कहा, 'आज ईरान के पास न तो नौसेना है, न वायु सेना, न एंटी-एयरक्राफ्ट क्षमता, न रडार और न ही कोई खास मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बची है।' उन्होंने आगे दावा किया कि ईरान की ड्रोन क्षमता में 82 प्रतिशत, मिसाइल क्षमता में 80 प्रतिशत और रॉकेट लॉन्चरों में 90 प्रतिशत की कटौती हुई है। गौरतलब है कि ट्रंप ने यह भी बताया कि पिछले हफ्ते एक ऐसे ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर हुए जिसके तहत ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होंगे — और यह काम उनके अनुसार कोई पूर्व राष्ट्रपति नहीं कर पाया था।
नेतृत्व पर हमला और होर्मुज जलडमरूमध्य घटना
ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी नेतृत्व को 'एक बार नहीं, दो बार' भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा, 'उनके नेतृत्व को एक बार खत्म किया गया, और फिर दूसरी बार भी खत्म किया गया।' साथ ही उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हुई एक ताज़ा घटना का भी ज़िक्र किया। उनके अनुसार ईरान ने एक बड़े जहाज पर चार ड्रोन से हमला किया, जिनमें से तीन को अमेरिका ने मार गिराया, लेकिन एक ड्रोन जहाज से टकराया और नुकसान हुआ। ट्रंप ने इसे ईरान की 'सीमित लेकिन बची हुई' हमलावर क्षमता का प्रमाण बताया।
परमाणु हथियारों पर कड़ा रुख
ट्रंप ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा, 'हमें उन्हें परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना होगा। किसी सनकी देश के हाथ में परमाणु हथियार आने दीजिए, फिर आप ऐसी मुसीबतें देखेंगे जैसी आपने पहले कभी नहीं देखी होंगी।' यह ऐसे समय में आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय वार्ताएँ नाज़ुक मोड़ पर हैं।
सुलेमानी का संदर्भ और अमेरिकी सैन्य शक्ति का दावा
ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में की गई ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सुलेमानी उन सड़क किनारे लगाए जाने वाले बमों (IED) के लिए जिम्मेदार थे, जिनसे अमेरिकी सैनिक अपंग हो गए थे। ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे मज़बूत सेना है और वह उसका इस्तेमाल 'अमेरिकी हितों और अमेरिकी मूल्यों की रक्षा' के लिए कर रहा है।
ईरान की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति
ट्रंप के अनुसार, तेहरान अब वॉशिंगटन के साथ समझौता करने के लिए 'बेताब' है और 'बहुत कुछ देने को तैयार' है। हालाँकि, ईरान की ओर से इन दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं है। विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की ताज़ा घटना यह संकेत देती है कि तनाव अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है, और आने वाले हफ्तों में कूटनीतिक गतिविधियाँ निर्णायक होंगी।