ईरान पर युद्ध अधिकारों को लेकर ट्रंप प्रशासन घिरा, अमेरिकी सीनेट में दोनों दलों ने उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सीनेट की एप्रोप्रिएशन कमेटी में 22 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान ईरान के खिलाफ दोबारा शुरू हुई सैन्य कार्रवाई पर ट्रंप प्रशासन को दोनों दलों — रिपब्लिकन और डेमोक्रेट — के सांसदों की तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा माँगी गई 87.6 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग ने संसद में युद्ध अधिकारों की संवैधानिक सीमाओं पर बहस को नए सिरे से तेज़ कर दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
रिपब्लिकन सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की ने सुनवाई में स्पष्ट किया कि 28 फरवरी को कांग्रेस की विशेष मंजूरी के बिना ही सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि 1 मई को कांग्रेस को सूचित किया गया कि लड़ाई समाप्त हो गई है। इसके बाद जून में युद्धविराम बनाए रखने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए, जो बाद में टूट गया और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास हमले फिर से शुरू हो गए।
प्रशासन ने 10 जुलाई को कांग्रेस को युद्ध शक्तियों के बारे में एक नया नोटिफिकेशन भेजा, जिससे 60 दिनों की नई कानूनी समय-सीमा शुरू हो गई।
युद्ध अधिकार प्रस्ताव पर विवाद
'युद्ध अधिकार प्रस्ताव' के अनुसार, राष्ट्रपति को आम तौर पर 60 दिनों के भीतर सैन्य कार्रवाई समाप्त करनी होती है, जब तक कि कांग्रेस इसे मंजूरी न दे या समय-सीमा न बढ़ाए। मुर्कोव्स्की ने इस प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "ऐसी स्थिति बन गई है जहाँ राष्ट्रपति को युद्ध शक्तियों की समय-सीमा को ठीक उसी समय खत्म करने की छूट मिल जाती है जब अस्थायी युद्धविराम की घोषणा के कारण यह कानूनी रूप से असुविधाजनक हो।"
मुर्कोव्स्की ने यह भी पूछा कि क्या अतिरिक्त फंडिंग की संसदीय मंजूरी को ही सैन्य अभियान की कानूनी अनुमति माना जा सकता है। उन्होंने 1999 में कोसोवो अभियान से जुड़े न्याय विभाग के एक कानूनी मत का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि बजटीय स्वीकृति भी युद्ध अधिकार प्रस्ताव की जरूरतों को पूरा कर सकती है।
प्रशासन का पक्ष
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि पेंटागन व्हाइट हाउस के उस रुख से सहमत है जिसके अनुसार राष्ट्रपति के पास ऑपरेशन जारी रखने के लिए पर्याप्त संवैधानिक अधिकार हैं। उन्होंने कहा, "इस समय हमारे पास सभी जरूरी अधिकार हैं।" हेगसेथ ने यह भी कहा कि "अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद-2 के तहत राष्ट्रपति के पास अमेरिकी जनता की रक्षा के लिए इस अभियान को चलाने का अधिकार है।"
मुर्कोव्स्की के बजटीय अनुमति वाले सवाल पर हेगसेथ ने कहा कि वह जवाब देने से पहले पेंटागन के वकीलों से सलाह लेंगे।
विशेषज्ञ और विपक्ष क्या कहते हैं
डेमोक्रेटिक सीनेटर जैक रीड ने अलग सवाल उठाया — क्या केवल हवाई हमलों से ईरान को स्थायी रूप से कमज़ोर किया जा सकता है और भविष्य के हमलों को रोका जा सकता है। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने माना कि हवाई ताकत की अपनी सीमाएँ होती हैं। उन्होंने कहा, "अगर हम पूरे इतिहास पर नजर डालें, तो हवाई शक्ति की अपनी सीमाएँ हैं और हमें हमेशा उनका ध्यान रखना होगा।" जब उनसे पूछा गया कि क्या पेंटागन जमीनी दीर्घकालिक संघर्ष की तैयारी कर रहा है, तो केन ने काल्पनिक सैन्य अभियानों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज स्ट्रेट में तनाव फिर से बढ़ा है और 87.6 अरब डॉलर के अतिरिक्त बजट प्रस्ताव पर सीनेट में मतदान अभी बाकी है। गौरतलब है कि युद्ध अधिकारों की यह बहस अमेरिकी इतिहास में पहली बार नहीं है — वियतनाम, इराक और अफगानिस्तान में भी कार्यपालिका और विधायिका के बीच इसी तरह के संवैधानिक टकराव देखे गए थे। अब सीनेट का रुख तय करेगा कि ट्रंप प्रशासन को अतिरिक्त फंडिंग मिलती है या नहीं।