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तुकाराम मुंढे को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाओ, ज्ञानेश कुमार हटें: अबू आजमी की माँग

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तुकाराम मुंढे को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाओ, ज्ञानेश कुमार हटें: अबू आजमी की माँग

सारांश

सपा विधायक अबू आजमी ने एक साथ कई मोर्चे खोले — तुकाराम मुंढे को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाने की माँग, ज्ञानेश कुमार को हटाने का आह्वान, टीपू सुल्तान के ऐतिहासिक योगदान का बचाव और मतदाता सूची की नई प्रक्रिया पर सरकार को घेरा। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर विपक्ष का दबाव बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

सपा विधायक अबू आजमी ने 17 अक्टूबर को मुंबई में अधिकारी तुकाराम मुंढे को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाने की माँग की।
आजमी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का आह्वान किया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
मालेगांव में टीपू सुल्तान के समर्थन में नारों को देश-विरोधी बताए जाने पर आजमी ने इतिहास पढ़ने की नसीहत दी।
मतदाता सूची में एसआईआर और एसएसआई प्रक्रिया के तहत बदलावों को लेकर सरकार पर चुनावी गड़बड़ी से ध्यान हटाने का आरोप लगाया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बांग्लादेश जैसे सत्ता परिवर्तन संबंधी बयान को आजमी ने सिरे से खारिज किया।

समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने 17 अक्टूबर को मुंबई में कई अहम मुद्दों पर तीखी प्रतिक्रिया दी — जिनमें तुकाराम मुंढे की प्रशंसा, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग, टीपू सुल्तान विवाद और मतदाता सूची में बदलावों पर सरकार की आलोचना शामिल है। आजमी ने कहा कि यदि मुंढे को चुनाव आयोग की जिम्मेदारी सौंपी जाए, तो जनता की अनेक शिकायतें दूर हो सकती हैं।

तुकाराम मुंढे की तारीफ, ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग

आजमी ने अधिकारी तुकाराम मुंढे की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि वे लोगों की जान बचाने, खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने और भ्रष्टाचार के खिलाफ बिना किसी दबाव के काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसे अधिकारियों की ज़रूरत है जो किसी मंत्री या अन्य व्यक्ति के दबाव में आए बिना नियमों के मुताबिक कार्रवाई करें।'

उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी. एन. शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में चुनाव आयोग के नियमों को सख्ती से लागू करने की शुरुआत हुई थी। आजमी ने चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की माँग की।

टीपू सुल्तान विवाद पर आजमी का पक्ष

मालेगांव में टीपू सुल्तान के समर्थन में नारे लगाए जाने और इसे देश-विरोधी बताए जाने पर आजमी ने कहा कि किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले भारत की आजादी की लड़ाई का इतिहास पढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया था और उनके योगदान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

आजमी ने यह भी कहा कि यदि संविधान की पुस्तक में टीपू सुल्तान की तस्वीर और उनकी बहादुरी के किस्से दर्ज हैं, तो उनके खिलाफ बोलने वालों के तर्कों पर भी सवाल उठना चाहिए। टीपू सुल्तान द्वारा मंदिर तोड़े जाने के आरोपों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने मौजूदा सरकार के कार्यकाल में मस्जिदों को तोड़े जाने का मुद्दा भी सामने रखा।

मतदाता सूची में बदलाव पर सवाल

मतदाता सूची में एसआईआर और एसएसआई प्रक्रिया के तहत हो रहे बदलावों पर आजमी ने सवाल किया कि जब इतने समय से एसआईआर लागू था, तो अब नई प्रक्रिया की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद नई प्रक्रियाएँ लाई जा रही हैं।

आजमी ने कहा कि देश में जन्मे सभी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में होने चाहिए। उनका दावा है कि युवाओं के विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार दबाव में है और चुनाव आयोग पर लगे आरोपों से ध्यान हटाने की कोशिश हो रही है।

राजनाथ सिंह के आरोपों पर प्रतिक्रिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा राहुल गांधी पर लगाए गए आरोपों और बांग्लादेश जैसी सत्ता परिवर्तन की कोशिश संबंधी बयान पर आजमी ने कहा कि ऐसी कोई कोशिश नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के नेता घबराए हुए हैं और उनका समय समाप्त होता जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर विपक्षी दलों की आलोचना तेज हो रही है। आने वाले दिनों में मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक बहस और गहरी होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो जनता की संस्थागत थकान को भुनाने की कोशिश करता है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि मतदाता सूची की खामियाँ केवल आयोग की इच्छाशक्ति का नहीं, बल्कि ढाँचागत कमज़ोरियों का भी परिणाम हैं। टीपू सुल्तान जैसे ऐतिहासिक विवादों को चुनावी मुद्दों से जोड़ना बताता है कि पहचान की राजनीति और संस्थागत जवाबदेही एक-दूसरे से अलग नहीं रहे — और यही आने वाले चुनावों का असली युद्धक्षेत्र है।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अबू आजमी ने तुकाराम मुंढे को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाने की माँग क्यों की?
सपा विधायक अबू आजमी का कहना है कि तुकाराम मुंढे बिना किसी राजनीतिक दबाव के नियमों के अनुसार काम करते हैं और भ्रष्टाचार व मिलावट के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हैं। आजमी के अनुसार, ऐसे निडर अधिकारी को चुनाव आयोग की जिम्मेदारी मिलने से जनता की अनेक शिकायतें दूर हो सकती हैं।
ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग किस आधार पर की गई है?
आजमी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्हें हटाने की माँग की है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यशैली पारदर्शी नहीं है और मतदाता सूची में बदलाव चुनावी गड़बड़ी के आरोपों से ध्यान हटाने के लिए किए जा रहे हैं।
टीपू सुल्तान विवाद में अबू आजमी का क्या कहना है?
आजमी ने टीपू सुल्तान को अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने वाला बहादुर स्वतंत्रता सेनानी बताया और कहा कि उनके बारे में गलत जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि संविधान की पुस्तक में टीपू सुल्तान का उल्लेख है, तो उनके खिलाफ बोलने वालों के तर्कों पर भी सवाल उठना चाहिए।
मतदाता सूची की एसआईआर और एसएसआई प्रक्रिया पर आजमी की क्या आपत्ति है?
आजमी का सवाल है कि जब एसआईआर प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी, तो अब नई एसएसआई प्रक्रिया लाने की जरूरत क्यों पड़ी। उनका आरोप है कि चुनाव में गड़बड़ी के आरोपों के बाद ध्यान भटकाने के लिए नई प्रक्रियाएँ लाई जा रही हैं और देश में जन्मे सभी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में होने चाहिए।
राजनाथ सिंह के बयान पर आजमी की क्या प्रतिक्रिया रही?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा राहुल गांधी पर बांग्लादेश जैसे सत्ता परिवर्तन की कोशिश का आरोप लगाए जाने पर आजमी ने इसे सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के नेता घबराए हुए हैं और उनका समय समाप्त होता जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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