बनगांव में दो सीमा पार हथियार तस्कर गिरफ्तार, बांग्लादेश को हथियार तस्करी का खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बनगांव से 13 अगस्त 2026 को दो सीमा पार हथियार तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों की पहचान शाहिदुल मंडल और अनु खान के रूप में हुई है, जिनके आवासों पर बुधवार देर रात एक साथ छापेमारी की गई और भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद तथा आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए।
गिरफ्तारी और छापेमारी का विवरण
शाहिदुल मंडल का आवास बनगांव पुलिस थाना क्षेत्र के बजिताला में है, जबकि अनु खान उसी थाना क्षेत्र के फुलतला कलम का निवासी है। दोनों स्थान भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे उत्तर 24 परगना जिले में पड़ते हैं। बुधवार देर रात एक साथ की गई छापेमारी के बाद दोनों को हिरासत में लिया गया, और गुरुवार दोपहर उन्हें बनगांव उपमंडल न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ लोक अभियोजक ने पुलिस हिरासत की माँग की।
तस्करी का तरीका और नेटवर्क
जाँच में सामने आया है कि शाहिदुल मंडल मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल और बिहार के मुंगेर में स्थानीय स्रोतों से हथियार खरीदता था और उन्हें अपने घर में जमा करता था। दूसरी ओर, अनु खान बांग्लादेश में इन हथियारों की मार्केटिंग का काम संभालता था। राज्य पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, पूछताछ में अनु ने स्वीकार किया कि वह हाल ही में हथियारों की आपूर्ति के लिए एक नया सौदा करने बांग्लादेश गया था।
ISI से जुड़े मामले से संभावित संबंध
गौरतलब है कि यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब उत्तर 24 परगना जिले में ही राज्य पुलिस के विशेष कार्य बल (STF) ने हाल ही में अंतर-सेवा खुफिया (ISI) से जुड़े पाकिस्तानी नागरिक वहाब मंडल को गिरफ्तार किया था। हालाँकि, पुलिस ने पाकिस्तानी नागरिक और इन दोनों हथियार तस्करों के बीच किसी भी प्रकार के संबंध की अब तक पुष्टि नहीं की है।
पुराने मामले और राजनीतिक आयाम
रिपोर्टों के अनुसार, शाहिदुल और अनु के खिलाफ पहले भी शिकायतें दर्ज की गई थीं, जिन्हें कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पिछली सरकार के दौरान नजरअंदाज कर दिया गया था। पुलिस ने अब उन पुरानी शिकायतों की भी जाँच शुरू कर दी है। जाँच अधिकारी इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या इन दोनों के बंगाल में सक्रिय भूमिगत कट्टरपंथी समूहों से कोई संबंध थे।
आगे की जाँच
पुलिस सीमा पार हथियार तस्करी रैकेट में शामिल अन्य सहयोगियों की पहचान करने में जुटी है। यह मामला सीमावर्ती जिलों में हथियारों की तस्करी और कट्टरपंथी नेटवर्क की बढ़ती चिंताओं के बीच राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।