10 अगस्त 2026
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यूएई के ट्रंप क्रिप्टो फर्म में $50 करोड़ निवेश पर डेमोक्रेट सांसदों का बड़ा आरोप, राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल

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यूएई के ट्रंप क्रिप्टो फर्म में $50 करोड़ निवेश पर डेमोक्रेट सांसदों का बड़ा आरोप, राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल

सारांश

यूएई ने ट्रंप परिवार की क्रिप्टो कंपनी में $50 करोड़ लगाए — और बदले में मिले AI चिप, हथियार, सेमीकंडक्टर समझौते। डेमोक्रेट सांसदों की रिपोर्ट का दावा है कि यह महज़ संयोग नहीं, बल्कि नीतिगत क्रय है। सवाल यह है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा व्यावसायिक हितों की कीमत पर तय हो रही है।

मुख्य बातें

डेमोक्रेट सांसदों ने 24 जून 2025 को रिपोर्ट जारी कर राष्ट्रपति ट्रंप पर विदेशी वित्तीय हितों को राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में दखल देने की अनुमति देने का आरोप लगाया।
यूएई से जुड़ी संस्थाओं ने ट्रंप के शपथ ग्रहण से चार दिन पहले WLF में लगभग $50 करोड़ निवेश कर कंपनी का लगभग आधा हिस्सा हासिल किया।
इस सौदे से ट्रंप परिवार को कथित तौर पर कम से कम $18.7 करोड़ और स्टीव विटकॉफ परिवार को $3.1 करोड़ का लाभ हुआ।
रिपोर्ट में 10 नीतिगत फैसलों का जिक्र है — जिनमें AI चिप निर्यात प्रतिबंध हटाना, $1.4 अरब का हथियार पैकेज और जी-42 को 35,000 एनवीडिया ब्लैकवेल चिप्स की मंजूरी शामिल है।
एमजीएक्स ने WLF के स्टेबलकॉइन USD1 से बाइनेंस में $2 अरब निवेश की घोषणा की; बाइनेंस के खिलाफ SEC का मुकदमा भी वापस लिया गया।
सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने कांग्रेस जाँच की माँग की; ट्रंप प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

अमेरिकी संसद के डेमोक्रेट सांसदों ने 24 जून 2025 को एक विस्तृत रिपोर्ट जारी कर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाए हैं — कि उन्होंने विदेशी वित्तीय हितों को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को प्रभावित करने की अनुमति दी। रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ट्रंप परिवार की क्रिप्टोकरेंसी कंपनी 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' (WLF) में भारी निवेश करने के बाद प्रशासन से कम से कम 10 अनुकूल नीतिगत निर्णय हासिल किए।

मुख्य आरोप और निवेश का विवरण

सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन की अगुवाई में बैंकिंग, हाउसिंग और शहरी मामलों की समिति के सदस्यों द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएई से जुड़े अधिकारियों और संस्थाओं ने ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह से चार दिन पहले WLF में लगभग $50 करोड़ (50 मिलियन डॉलर) का निवेश किया और कंपनी का लगभग आधा हिस्सा अपने नाम कर लिया। WLF की स्थापना ट्रंप और उनके बेटों ने की थी।

रिपोर्ट के अनुसार, इस निवेश को यूएई के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शेख तहनून बिन जायद अल नाहयान का समर्थन प्राप्त था। इस सौदे से ट्रंप परिवार की संस्थाओं को कथित तौर पर कम से कम $18.7 करोड़ और ट्रंप के मध्य-पूर्व दूत एवं WLF के सह-संस्थापक स्टीव विटकॉफ के परिवार को कम से कम $3.1 करोड़ का लाभ हुआ।

नीतिगत निर्णयों पर उठे सवाल

रिपोर्ट में जिन 10 निर्णयों पर सवाल उठाए गए हैं, उनमें शामिल हैं — एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चिप्स के निर्यात पर बाइडेन प्रशासन की पाबंदियाँ हटाना, यूएई के लिए $1.4 अरब के हथियार पैकेज को मंजूरी देना, और यूएई को बड़ी मात्रा में एडवांस्ड अमेरिकी सेमीकंडक्टर उपलब्ध कराने के समझौते करना। इसके अलावा, अमेरिकी AI चिप निर्माता कंपनी सेरेब्रस में यूएई की AI कंपनी जी-42 के निवेश को मंजूरी और जी-42 को 35,000 एडवांस्ड एनवीडिया ब्लैकवेल चिप्स खरीदने की अनुमति भी इस सूची में है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनेंस के खिलाफ सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के मुकदमे को वापस लिया गया, बाइनेंस के संस्थापक चांगपेंग झाओ को राष्ट्रपति की ओर से माफी दी गई, और यूएई एनएसए से जुड़ी निवेश फर्म 'एमजीएक्स' ने WLF के स्टेबलकॉइन 'USD1' का उपयोग कर बाइनेंस में $2 अरब के निवेश की घोषणा की।

जी-42 और चीन से जुड़ी सुरक्षा चिंताएँ

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने पहले जी-42 के चीनी कंपनियों — विशेष रूप से हुआवेई और बीजिंग जीनोमिक्स इंस्टीट्यूट — के साथ कारोबारी संबंधों को लेकर चिंता जताई थी। आलोचकों का कहना है कि इन चिंताओं के बावजूद प्रशासन ने ऐसे फैसले लिए जिनसे यूएई की प्रौद्योगिकी महत्वाकांक्षाओं को फायदा पहुँचा।

वॉरेन का बयान और राजनीतिक दबाव

सीनेटर वॉरेन ने कहा, "अमेरिकी परिवार अपनी नौकरियों, किराने के सामान की बढ़ती कीमतों और बिलों के भुगतान को लेकर चिंतित हैं। वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ऐसे फैसलों से मुनाफा कमा रहे हैं, जिनसे चीन जैसे देशों के लिए हमारी कुछ सबसे संवेदनशील और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी तक पहुँचना आसान हो जाता है।" उन्होंने यह भी कहा कि "हम अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को सबसे ऊँची बोली लगाने वाले के हाथों नहीं बेच सकते।"

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब अमेरिका-यूएई संबंध AI और सेमीकंडक्टर तकनीक के क्षेत्र में तेज़ी से गहरे हो रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप प्रशासन पर व्यावसायिक हितों और नीतिगत निर्णयों के बीच टकराव के आरोप लगे हों।

आगे क्या होगा

डेमोक्रेट सांसदों ने इस मामले में कांग्रेस की जाँच की माँग की है। यह रिपोर्ट फिलहाल आरोप-आधारित है और ट्रंप प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा अमेरिकी संसद में राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या व्यावसायिक संबंधों ने उन्हें प्रभावित किया। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है कि जी-42 को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की चिंताएँ पहले से दर्ज थीं — और फिर भी उसे 35,000 एनवीडिया चिप्स की मंजूरी मिली।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल (WLF) क्या है और यूएई का इससे क्या संबंध है?
WLF एक क्रिप्टोकरेंसी कंपनी है जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके बेटों ने शुरू किया था। रिपोर्ट के अनुसार, यूएई से जुड़ी संस्थाओं ने ट्रंप के शपथ ग्रहण से चार दिन पहले इसमें लगभग $50 करोड़ का निवेश किया और कंपनी का लगभग आधा हिस्सा हासिल कर लिया।
डेमोक्रेट सांसदों ने किन नीतिगत फैसलों पर सवाल उठाए हैं?
रिपोर्ट में कम से कम 10 फैसलों का उल्लेख है — जिनमें AI चिप निर्यात प्रतिबंध हटाना, यूएई के लिए $1.4 अरब का हथियार पैकेज, जी-42 को 35,000 एनवीडिया ब्लैकवेल चिप्स की मंजूरी, बाइनेंस के खिलाफ SEC मुकदमा वापस लेना और बाइनेंस संस्थापक चांगपेंग झाओ को राष्ट्रपति माफी देना शामिल हैं।
इस मामले में जी-42 और चीन का क्या संबंध है?
जी-42 यूएई के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शेख तहनून बिन जायद से जुड़ी अबू धाबी की AI कंपनी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने पहले जी-42 के हुआवेई और बीजिंग जीनोमिक्स इंस्टीट्यूट जैसी चीनी कंपनियों से कारोबारी संबंधों पर चिंता जताई थी।
एलिजाबेथ वॉरेन ने इस मामले में क्या माँग की है?
सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने कांग्रेस जाँच की माँग की है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को सबसे ऊँची बोली लगाने वाले के हाथों नहीं बेचा जा सकता और कांग्रेस को इस मामले में हिम्मत दिखानी होगी।
ट्रंप प्रशासन ने इन आरोपों पर क्या कहा है?
रिपोर्ट जारी होने के समय तक ट्रंप प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह रिपोर्ट फिलहाल डेमोक्रेट सांसदों के आरोपों पर आधारित है।
राष्ट्र प्रेस
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