ट्रंप के क्रिटिकल मिनरल सौदों पर 54 डेमोक्रेट्स का हमला, हितों के टकराव और टैक्सपेयर जोखिम पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
वॉशिंगटन में 18 अगस्त को 54 हाउस डेमोक्रेट्स ने ट्रंप प्रशासन के क्रिटिकल मिनरल्स (अहम खनिज) समझौतों पर गंभीर सवाल उठाते हुए एक संयुक्त पत्र जारी किया। सांसदों का आरोप है कि ये सौदे राजनीतिक रूप से जुड़े परिवारों को अनुचित लाभ पहुँचा सकते हैं, अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर अरबों डॉलर का बोझ डाल सकते हैं और संसदीय निगरानी को कमज़ोर कर सकते हैं।
पत्र किसे और क्यों लिखा गया
यह पत्र अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो, कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लटनिक और ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट को संबोधित किया गया। इसमें खनिजों की माइनिंग, प्रोसेसिंग और व्यापार से जुड़े समझौतों में पारदर्शिता, मज़दूरों व मानवाधिकारों की सुरक्षा, पर्यावरणीय मानकों और सरकारी धन के उपयोग पर जवाब माँगे गए हैं।
इस पहल की अगुवाई हाउस नेचुरल रिसोर्सेज कमिटी के रैंकिंग सदस्य जेरेड हफमैन, वेज एंड मीन्स ट्रेड सब-कमेटी की रैंकिंग सदस्य लिंडा सांचेज और कांग्रेसमैन जोनाथन जैक्सन ने की। भारतीय-अमेरिकी सांसद रो खन्ना और श्री थानेदार भी हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल रहे।
हितों के टकराव का आरोप
सांसदों ने द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कज़ाकिस्तान में अमेरिकी समर्थन से किए जा रहे क्रिटिकल मिनरल सौदे से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कॉमर्स सेक्रेटरी लटनिक के परिवारों से जुड़ी कंपनियों को सीधा फायदा हो सकता है। पत्र में कहा गया, "अगर मज़बूत पारदर्शिता और जवाबदेही के उपाय न हों, तो इन निवेशों और लोन गारंटी से हितों के टकराव, अपने फायदे के लिए काम करने, खास लोगों को तरजीह देने और निगरानी कमज़ोर होने का खतरा पैदा होता है।"
टैक्सपेयर्स पर आर्थिक जोखिम
डेमोक्रेट सांसदों ने चेताया कि इन समझौतों के तहत डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन और एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक के ज़रिये अमेरिकी टैक्सपेयर्स को अरबों डॉलर के प्रत्यक्ष ऋण और ऋण गारंटी का बोझ उठाना पड़ सकता है। उन्होंने माइनिंग और प्रोसेसिंग कंपनियों में संघीय इक्विटी निवेश पर भी आपत्ति जताई। पत्र में कहा गया, "अगर प्रोजेक्ट सफल होते हैं तो कंपनियाँ मुनाफा रखती हैं, अगर वे नाकाम होते हैं तो टैक्सपेयर्स नुकसान की भरपाई करते हैं।"
कई देशों में समझौतों पर चिंता
सांसदों ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, ज़ाम्बिया, मलेशिया, अर्जेंटीना, इक्वाडोर, कंबोडिया और बांग्लादेश से जुड़े सौदों की भी आलोचना की। उनका आरोप है कि स्टेट डिपार्टमेंट ने ज़ाम्बिया पर मिनरल समझौते पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाने के लिए एचआईवी की दवाएँ और अन्य सहायता रोकने की धमकी दी थी। इसके अलावा, कांगो में माइनिंग ऑपरेशन्स की सुरक्षा कर रही अमेरिकी-समर्थित पैरामिलिट्री फोर्स को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई। अर्जेंटीना, इक्वाडोर, कंबोडिया और बांग्लादेश के साथ व्यापार समझौतों में कथित तौर पर पर्यावरण, श्रम या मानवाधिकारों से जुड़ी कोई बाध्यकारी शर्त नहीं रखी गई।
डेमोक्रेट्स की माँग और आगे की राह
डेमोक्रेट सांसदों ने स्पष्ट किया कि वे क्लीन एनर्जी और टेक्नोलॉजी उद्योगों के लिए अमेरिका की मिनरल सप्लाई चेन मज़बूत करने और चीन पर निर्भरता घटाने के समर्थक हैं — लेकिन वे इसे पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से चाहते हैं। उन्होंने सरकार से एक पारदर्शी वार्ता प्रक्रिया और टिकाऊ खनन के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता की माँग की है। यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब ट्रंप प्रशासन वैश्विक मिनरल सप्लाई चेन में अमेरिकी पकड़ मज़बूत करने की कोशिश तेज़ कर रहा है।