यूसीसी पर अमित शाह के बयान पर विपक्ष का पलटवार: कांग्रेस और JMM बोले — जनता अब नहीं होगी दिग्भ्रमित
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने पर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के बयान पर विपक्षी दलों ने 31 अक्टूबर 2026 को तीखी प्रतिक्रिया दी। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेताओं ने एकस्वर में कहा कि जनता अब इस तरह की चुनावी घोषणाओं पर भरोसा नहीं करती।
कांग्रेस का पलटवार: 'भाजपा के दावों में दम नहीं'
पटना में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोध कांत सहाय ने शाह के बयान पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, 'लोकसभा चुनाव में कह रहे थे कि चार सौ सीट जीतकर आएंगे, लेकिन बहुमत भी नहीं मिला। इन लोगों की बात का कोई बहुत महत्व नहीं है।' सहाय का यह बयान इशारा करता है कि विपक्ष BJP की पूर्व चुनावी घोषणाओं को भविष्य के वादों की विश्वसनीयता को परखने की कसौटी बना रहा है।
राकेश सिन्हा की कड़ी चेतावनी: 'यूपी में नहीं बनेगी BJP सरकार'
रांची में कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने और भी तीखे तेवर अपनाए। उन्होंने कहा, 'उत्तर प्रदेश की जनता संजीदा है। वह चढ़ावे की चोरी करने वाली पार्टी, वोट चोरी करने वाली पार्टी को अब सत्ता सौंपने नहीं जा रही है। अब किसी भी मामले में उत्तर प्रदेश की जनता दिग्भ्रमित नहीं होगी और भाजपा की सरकार नहीं बनेगी।'
सिन्हा ने इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा और कहा, 'ज्ञानेश कुमार को जाना होगा। ज्ञानेश कुमार जाएंगे तो भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश में सरकार किसी भी सूरत में नहीं बन पाएगी।' गौरतलब है कि विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग पर इस तरह के सीधे हमले हाल के वर्षों में बढ़े हैं।
JMM का रुख: 'अनर्गल बयानों पर प्रतिक्रिया देना भी उचित नहीं'
रांची में ही JMM नेता मनोज पांडेय ने अमित शाह के यूसीसी संबंधी बयान को 'अनर्गल' करार देते हुए कहा कि ऐसी घोषणाओं पर प्रतिक्रिया देना भी उचित नहीं है। पांडेय ने सवाल उठाया, 'दस साल से शासन में हैं। इस बार आएंगे तो ऐसा कर देंगे, वैसा कर देंगे — ये अनर्गल बातें क्यों करते हैं? जनता इनकी बातें सुनकर हंसती है।'
उन्होंने BJP को सीधे चुनौती देते हुए कहा, 'अरे पहले क्यों नहीं किया? ताकत है तो पहले कर दीजिए। सरकार भी आपकी है, डबल-ट्रिपल इंजन की सरकार है। तो ये झूठे लोग हैं, ये लोग सिर्फ जुमला बोलते हैं।' पांडेय का यह तर्क — कि केंद्र और कई राज्यों में सत्ता होने के बावजूद यूसीसी लागू नहीं की गई — विपक्ष की साझा रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।
यूसीसी विवाद की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की सरगर्मियाँ बढ़ने लगी हैं और BJP पारंपरिक रूप से यूसीसी को अपने चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से रखती रही है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है जहाँ यूसीसी कानून पारित हुआ, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इसे लागू करने की प्रक्रिया अभी भी विचाराधीन है। विपक्ष का आरोप है कि यह एक बार फिर चुनावी 'जुमले' का हिस्सा है।
आगे की राह
गृह मंत्री अमित शाह के बयान और विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया के बाद यूसीसी एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गई है। आलोचकों का कहना है कि जब तक BJP इस मुद्दे पर ठोस विधायी कदम नहीं उठाती, विपक्ष इसे चुनावी वादाखिलाफी के रूप में भुनाता रहेगा।