उज्जैन महाकाल मार्ग चौड़ीकरण: मोहन यादव ने जनसहयोग को सराहा, ₹945 करोड़ का एलिवेटेड कॉरिडोर मिला
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 20 अगस्त को धार्मिक नगरी उज्जैन में महाकाल मार्ग चौड़ीकरण परियोजना में स्थानीय नागरिकों के स्वैच्छिक सहयोग की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि नागरिकों ने अपने आवास और संस्थान स्वेच्छा से हटाकर प्रशासन को जो सहयोग दिया है, वह अभूतपूर्व है। इसी दिन उज्जैन को ₹945.20 करोड़ की लागत के 5.30 किलोमीटर लंबे नए एलिवेटेड कॉरिडोर की सौगात भी मिली।
महाकाल मार्ग चौड़ीकरण में जनभागीदारी
मुख्यमंत्री यादव ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में व्यापक बदलाव आया है। उन्होंने कहा, 'सरकार के संकल्प के साथ जनता का संकल्प और बड़ा है।' उज्जैन में सभी धर्म और समाज के लोगों ने मार्ग चौड़ीकरण में सहयोग करते हुए स्वर्णिम उज्जैन बनाने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि कुछ दिनों की कठिनाई के बाद उज्जैन का कायाकल्प होगा।
₹945 करोड़ का एलिवेटेड कॉरिडोर
बुधवार को उज्जैन को ₹945.20 करोड़ की लागत से निर्मित 5.30 किलोमीटर लंबे नए एलिवेटेड कॉरिडोर की सौगात मिली। यह कॉरिडोर महाकाल मंदिर तक पहुँचने के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में भी काम करेगा और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि उज्जैन और इंदौर में मल्टी एलिवेटेड कॉरिडोर जैसे विकास कार्यों में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ
सिंहस्थ-2028 के भव्य आयोजन को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि सिंहस्थ धार्मिक पर्यटन का सबसे बड़ा मेला होगा। गौरतलब है कि वे स्वयं वर्ष 1980 के उज्जैन सिंहस्थ में स्काउट एंड गाइड सदस्य रह चुके हैं। सिंहस्थ 2016 के अनुभव से सीख लेते हुए इस बार रामघाट पर सुविधाएँ और बढ़ाई जा रही हैं। नागपंचमी पर श्रद्धालुओं के प्रबंधन के लिए प्रशासन ने बेहतर इंतज़ाम किए थे।
इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन विकास
मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि सरकार इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है। उज्जैन में रेल और नदी पर आवश्यकतानुसार पुल तैयार किए जा रहे हैं। महाकाल लोक के निर्माण के बाद धार्मिक तीर्थाटन में वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय रोज़गार के अवसर भी बढ़े हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उज्जैन को अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से स्थापित करने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं।