मणिपुर में चार महीने की आर्थिक नाकाबंदी खत्म, UNC ने गुवाहाटी त्रिपक्षीय वार्ता के बाद लिया फैसला
सारांश
मुख्य बातें
यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) — मणिपुर में नागा जनजातियों के सर्वोच्च संगठन — ने शनिवार, 26 सितंबर 2026 को असम के गुवाहाटी में केंद्र सरकार और मणिपुर सरकार के साथ हुई त्रिपक्षीय बैठक के बाद राज्य के दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग चार महीने से जारी आर्थिक नाकाबंदी शाम 6 बजे से स्थगित करने की घोषणा की। यह नाकाबंदी मई 2026 से लागू थी और इसने मणिपुर की दो जीवन-रेखाओं को बुरी तरह बाधित किया था।
बैठक का स्थान और स्वरूप
यह महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय बैठक गुवाहाटी के निकट गरभंगा स्थित BSF गुवाहाटी फ्रंटियर मुख्यालय में आयोजित की गई। मणिपुर गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, बैठक राज्य में मौजूदा कानून-व्यवस्था और शांति-स्थापना उपायों के तहत बुलाई गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के अधिकारियों के साथ मणिपुर सरकार के प्रतिनिधि और UNC नेता इस वार्ता में शामिल हुए।
UNC अध्यक्ष का बयान
UNC अध्यक्ष एनजी लोरहो ने बैठक के बाद जारी बयान में कहा कि मणिपुर सरकार, भारत सरकार और UNC के बीच हुए समझौते के आधार पर परिषद ने शनिवार शाम 6 बजे से आर्थिक नाकाबंदी स्थगित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने आंदोलन के दौरान सभी संबंधित पक्षों द्वारा दिए गए सहयोग और एकजुटता की सराहना भी की।
नाकाबंदी की पृष्ठभूमि
UNC ने यह नाकाबंदी मई 2026 में कंगपोकपी जिले के लेइलोन वाइफेई गाँव से छह नागा नागरिकों के अपहरण के बाद लागू की थी। यह जिला मुख्य रूप से कुकी-जो आदिवासी बाहुल्य है। अपहृत छह ग्रामीणों के शव 10 जून को बरामद किए गए, जिसके बाद मणिपुर के विभिन्न हिस्सों में व्यापक आक्रोश और आंदोलन फैल गया। UNC ने स्पष्ट किया था कि छह नागरिकों की हत्या और अन्य मुद्दों पर ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
आम जनता पर असर
इस नाकाबंदी ने इम्फाल-जिरिबाम राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-37) और इम्फाल-दिमापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-2) — मणिपुर की दो प्रमुख जीवन-रेखाओं — पर आवागमन बाधित कर दिया था। इस भू-आबद्ध (landlocked) पूर्वोत्तर राज्य में आवश्यक वस्तुओं और ईंधन की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई, जिससे कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई। नागा-बहुल क्षेत्रों से गुजरने वाले इन राजमार्गों पर वाहनों और आपूर्ति शृंखला की बाधा ने आम नागरिकों को सबसे अधिक प्रभावित किया।
आगे की राह
इस त्रिपक्षीय बैठक को राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने और व्यापक शांति-निर्माण प्रयासों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि मणिपुर पिछले कुछ वर्षों से जातीय संघर्ष और सामाजिक तनाव से जूझ रहा है, और यह समझौता उस व्यापक संकट के बीच राहत की एक किरण के रूप में आया है। नाकाबंदी हटने के बाद आपूर्ति बहाल होने में कुछ दिन लग सकते हैं, और समझौते की शर्तों के क्रियान्वयन पर सभी पक्षों की नज़र बनी रहेगी।