अंडर-18 हॉकी एशिया कप: पुरुष टीम चैंपियन, महिला टीम ने जीता ब्रॉन्ज; मांडविया ने ₹82.5 लाख से नवाज़ा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने 9 जून 2025 को भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में अंडर-18 एशिया कप में ऐतिहासिक प्रदर्शन करने वाली भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों को सम्मानित किया। पुरुष टीम को ₹61.5 लाख और महिला टीम को ₹21 लाख का पुरस्कार चेक सौंपा गया — कुल ₹82.5 लाख की राशि।
मैदान पर क्या हुआ
जापान के काकामिगाहारा में खेले गए फाइनल में कप्तान केतन कुशवाहा की अगुवाई में भारतीय पुरुष टीम ने मेजबान जापान को 4-1 से पराजित कर अंडर-18 एशिया कप खिताब अपने नाम किया। वहीं, कप्तान स्वीटी कुजुर के नेतृत्व में भारतीय महिला टीम ने ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में कोरिया को 3-0 से हराकर पदक सुनिश्चित किया।
विशेष खिलाड़ियों का सम्मान
खेल मंत्री ने व्यक्तिगत उत्कृष्टता को भी पहचाना। पुरुष वर्ग के सर्वश्रेष्ठ स्कोरर आशीष तानी पूर्ति, महिला वर्ग की सर्वश्रेष्ठ स्कोरर नौशीन नाज़, और सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर आयुष राजक — जिन्होंने टूर्नामेंट में 10 गोल बचाए — को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा, भारतीय हॉकी की पूर्व कप्तान और महिला टीम की कोच रानी रामपाल तथा पुरुष टीम के कोच सरदार सिंह को भी मंत्री ने सम्मानित किया। दोनों दिग्गज खिलाड़ी अब अगली पीढ़ी को तराशने में जुटे हैं।
मांडविया का संदेश
खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए मांडविया ने कहा, 'देश का नाम रोशन करने के लिए दोनों टीमों ने जो कड़ी मेहनत की है, उसके लिए मैं उन्हें बधाई देता हूं। पूरा देश आप पर गर्व करता है। यह तो बस शुरुआत है — कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। जिसने 13 गोल किए हैं, उसे 15 या उससे अधिक गोल करने का लक्ष्य रखना चाहिए। जिसने 10 गोल रोके हैं, उसे विपक्षी टीम को एक भी गोल न करने देने का लक्ष्य रखना चाहिए।'
उन्होंने आगे जोड़ा कि चाहे पढ़ाई हो या खेल, पूरी लगन ज़रूरी है और खिलाड़ियों को अपनी पूरी क्षमता से प्रदर्शन करते हुए अपने परिवार और शुभचिंतकों को गौरवान्वित करते रहना चाहिए।
खेल महाशक्ति की दिशा में प्रतिबद्धता
मांडविया ने यह भी रेखांकित किया कि भारत सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप भारत को एक वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने के लक्ष्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गौरतलब है कि यह जीत ऐसे समय आई है जब भारतीय हॉकी सीनियर स्तर पर भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पकड़ मज़बूत कर रही है — और युवा वर्ग में यह सफलता उस पाइपलाइन को और मज़बूत करती है।
रानी रामपाल और सरदार सिंह जैसे अनुभवी खिलाड़ियों का कोचिंग में आना भारतीय हॉकी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जहाँ मैदानी अनुभव को तकनीकी प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है।