अंडर-18 एशिया कप हॉकी: भारत ने जापान को हराकर जीता गोल्ड, कोच सरदार सिंह बोले — यह जीत युवाओं को प्रेरित करेगी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पुरुष अंडर-18 हॉकी टीम ने जापान के काकामिगाहारा में आयोजित अंडर-18 पुरुष एशिया कप के फाइनल में मेज़बान जापान को परास्त कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। 8 जून 2026 को भारत लौटी इस टीम का जोरदार स्वागत हुआ। टीम के मुख्य कोच सरदार सिंह ने कहा कि यह जीत इन युवा खिलाड़ियों को आने वाले समय में और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देगी।
कोच सरदार सिंह की प्रतिक्रिया
स्वर्ण पदक जीतकर स्वदेश लौटने के बाद कोच सरदार सिंह ने कहा, 'इस तरह की जीत के बाद देश भर के सभी हॉकी प्रेमी जश्न मनाते हैं और अपना समर्थन दिखाते हैं। खिलाड़ियों में जोश देखना बहुत अच्छा लगता है। जब आप मेडल जीतकर आते हैं, तो आपको काफी प्यार मिलता है।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने टीम को भरपूर प्यार दिया और प्रधानमंत्री ने भी टीम के प्रदर्शन की सराहना की। सरदार ने कहा, 'यह जीत मेरे हिसाब से आने वाले समय में इन खिलाड़ियों को भविष्य के लिए प्रेरित करेगी।'
कप्तान केतन कुशवाहा का बयान
भारतीय पुरुष टीम के कप्तान केतन कुशवाहा ने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनकी अगुवाई में टीम उस भरोसे पर खरी उतरी जो कोच ने सभी खिलाड़ियों पर जताया था। कुशवाहा के अनुसार, टूर्नामेंट के दौरान एक-दूसरे को सहयोग करना सबसे अहम कारक रहा, और चैंपियन बनकर भारत लौटना उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव है।
हैट्रिक हीरो आशीष तानी पूर्ती
फाइनल में जापान के खिलाफ तीन गोल दागने वाले आशीष तानी पूर्ती ने कहा कि गोल्ड जीतकर देश लौटने पर उन्हें बेहद खुशी हो रही है। उन्होंने बताया, 'टीम ने पहले से तय कर लिया था कि देश के लिए गोल्ड जीतकर ही वापस आना है, और हम उस लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहे।' यह जज़्बा पूरे टूर्नामेंट में टीम की ताकत बना रहा।
महिला टीम का ब्रॉन्ज और कप्तान की निराशा
भारतीय महिला अंडर-18 हॉकी टीम इसी टूर्नामेंट में कांस्य पदक जीतकर स्वदेश लौटी। टीम की कप्तान स्वीटी कुजुर ने स्वीकार किया कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि टीम स्वर्ण पदक से चूक गई। उन्होंने कहा कि भारतीय महिला टीम काफी मजबूत थी और गोल्ड जीतने की प्रबल दावेदार थी, लेकिन अपनी कुछ गलतियों के कारण यह सुनहरा अवसर हाथ से निकल गया। गौरतलब है कि पुरुष और महिला दोनों टीमें एक ही टूर्नामेंट से लौटी हैं, जो भारतीय जूनियर हॉकी की गहराई को दर्शाता है।
आगे की राह
यह जीत भारतीय जूनियर हॉकी के लिए एक मज़बूत संकेत है। काकामिगाहारा में मिली यह सफलता इन खिलाड़ियों के लिए सीनियर राष्ट्रीय टीम तक पहुँचने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है। कोच सरदार सिंह के मार्गदर्शन में यह युवा पीढ़ी भारतीय हॉकी के भविष्य की नींव रख रही है।