भारत-बांग्लादेश सीमा से अवैध घुसपैठ कराने वाले सिंडिकेट के 15 दोषियों को 5-5 साल की सजा, UP ATS की बड़ी जीत
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (UP ATS) को मानव तस्करी के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है। लखनऊ स्थित एनआईए/एटीएस विशेष अदालत ने 6 जुलाई को बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को अवैध रूप से भारत में प्रवेश कराने, उनके लिए फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार करने तथा मानव तस्करी के मामले में 15 दोषियों को पाँच-पाँच वर्ष के कारावास और ₹10,000-₹10,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। दोषियों में 13 बांग्लादेशी और 2 रोहिंग्या नागरिक शामिल हैं।
मामले का पूरा घटनाक्रम
26 अक्टूबर 2021 को UP ATS ने पहली कार्रवाई करते हुए मिथुन मंडल, पिंटू दास उर्फ शाओन अहमद, रोनी पाल उर्फ मोहीनूर इस्लाम, बाबी राय उर्फ मेहंदी हसन, विक्रम सिंह, महफूजुर रहमान, समीर मंडल उर्फ टोनी और मोहम्मद जमील उर्फ हरीश उल्लाह को अवैध घुसपैठ, फर्जी भारतीय दस्तावेज रखने और मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद जाँच के दौरान एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा हुआ।
विवेचना में असीदिलु इस्लाम उर्फ विजय दास, हुसैन मोहम्मद फहद उर्फ मानिक दत्ता, अल अमीन अहमद उर्फ राजेश विश्वास, जैबुल इस्लाम उर्फ गोविंदा दास, जमील अहमद उर्फ लाश विश्वास पोराम, राजीब हुसैन उर्फ अजीत दास, सखावत खान उर्फ गोलक मंडल, अलाउद्दीन तारिक उर्फ रिकू विश्वास, अजय घिल्डियाल, नूर अमीन, खोखन सरदार उर्फ कय्यूम सिकदर तथा रतन मंडल के नाम सामने आए, जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
सिंडिकेट कैसे करता था काम
ATS की जाँच में सामने आया कि यह सिंडिकेट भारत-बांग्लादेश सीमा के रास्ते बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारत में घुसाता था। एक बार सीमा पार कराने के बाद उन्हें भारतीय नागरिक के रूप में स्थापित करने के लिए फर्जी आधार कार्ड, पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार किए जाते थे। गिरोह पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवाने और बांग्लादेशी नागरिकों को विदेश भेजने का भी आरोप है।
गौरतलब है कि इस तरह के सिंडिकेट न केवल अवैध प्रवासन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं।
अदालत का फैसला
जाँच पूरी होने के बाद ATS ने सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपत्र दाखिल किया। ATS द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और प्रभावी पैरवी के आधार पर एनआईए/एटीएस न्यायालय, लखनऊ ने सोमवार को 15 आरोपियों को अवैध घुसपैठ, जाली दस्तावेज रखने और मानव तस्करी का दोषी करार दिया।
अदालत ने महफूजुर रहमान, खोखन सरदार उर्फ मोहम्मद कय्यूम अंसारी, जमील अहमद उर्फ पोराम उर्फ लाश विश्वास, अलाउद्दीन तारिक उर्फ रिकू विश्वास, हुसैन मोहम्मद फहद उर्फ मानिक दत्ता, सखावत खान उर्फ गोलक मंडल, अल अमीन अहमद उर्फ राजेश विश्वास, असीदिलु इस्लाम उर्फ विजय दास, जैबुल इस्लाम उर्फ गोविंदा दास, राजीब हुसैन उर्फ अजीत दास, मोहीनूर इस्लाम उर्फ रोनी पाल, मेहंदी हसन उर्फ बाबी राय, शाओन अहमद उर्फ पिंटू दास, नूर अमीन तथा मोहम्मद जमील उर्फ हरीश उल्लाह को पाँच-पाँच वर्ष के कारावास और ₹10,000-₹10,000 के जुर्माने की सजा सुनाई।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर
ATS के अनुसार, यह कार्रवाई अवैध घुसपैठ और मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी उपलब्धि है। यह ऐसे समय में आई है जब भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध प्रवासन और दस्तावेज़ जालसाजी के मामले सुरक्षा एजेंसियों के लिए प्राथमिकता बने हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए पहचान बदलने की यह प्रवृत्ति सुरक्षा तंत्र के लिए दीर्घकालिक चुनौती है।
आगे की कार्रवाई
ATS के अनुसार सभी दोषियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस मामले में अन्य संभावित सदस्यों की तलाश जारी है और जाँच एजेंसियाँ इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय सूत्रों को खंगाल रही हैं।