केरल में अवैध अप्रवास नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई: ATS ने कोट्टाराक्कारा से सिंडिकेट सदस्य समेत 9 बांग्लादेशी नागरिक दबोचे
सारांश
मुख्य बातें
एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने केरल के कोल्लम जिले के कोट्टाराक्कारा में एक संयुक्त अभियान चलाकर अवैध अप्रवास सिंडिकेट के एक संदिग्ध सदस्य और नौ बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई राज्य में विदेशी नागरिकों की घुसपैठ और नकली पहचान दस्तावेजों के इस्तेमाल की चल रही जांच का हिस्सा बताई जा रही है।
मुख्य आरोपी कौन है
मुख्य आरोपी की पहचान ममताज बेगम के रूप में हुई है, जो बांग्लादेश के बागेरहाट जिले के मोरेलगंज, चौताबुनिया इलाके के निशानबारिया की रहने वाली है। जांचकर्ताओं के अनुसार, ममताज बेगम ने केरल के विभिन्न हिस्सों में बांग्लादेशी नागरिकों के अवैध प्रवेश और बसने में मुख्य भूमिका निभाई थी। अधिकारियों ने बताया कि वह बचपन से ही अपने माता-पिता के साथ बांग्लादेश से भारत आती-जाती रही है और पिछले 15 वर्षों से पश्चिम बंगाल की सीमा के रास्तों का इस्तेमाल दोनों देशों के बीच आवाजाही के लिए करती रही है।
कबाड़ कारोबार की आड़ में नेटवर्क
शुरुआती जांच के अनुसार, गिरफ्तार किए गए नौ बांग्लादेशी नागरिक कोट्टाराक्कारा में कबाड़ का कारोबार कर रहे थे, जिसे पिछले तीन महीनों से बेगम की देखरेख में चलाया जा रहा था। एजेंसियों को संदेह है कि बेगम ने हाल ही में केरल में अलग-अलग जगहों पर 36 बांग्लादेशी नागरिकों को लाया था, जिनमें से कई उसके नेटवर्क द्वारा संचालित कबाड़ संग्रह और व्यापार के कामों में लगे हुए थे।
फर्जी दस्तावेज और संपत्ति
जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि बेगम ने वोटर आईडी और राशन कार्ड सहित भारतीय पहचान दस्तावेज हासिल कर लिए थे। बाद में उसने करुणागाप्पल्ली और कोल्लम जिले के अन्य हिस्सों में कबाड़ की कई दुकानें खोलीं। बेगम पर अपने व्यावसायिक कामों के लिए तीन ऑटो-रिक्शा खरीदने का भी संदेह है।
तलाशी के दौरान एजेंसियों ने कई अहम दस्तावेज बरामद किए, जिनमें लीज एग्रीमेंट, वाहन के मालिकाना हक के रिकॉर्ड और कारोबार से जुड़े अन्य कागजात शामिल हैं। हिरासत में लिए गए नौ बांग्लादेशी नागरिकों से आधार कार्ड जब्त किए गए — अधिकारियों के अनुसार बरामद आधार कार्डों में से दो असली पाए गए, जबकि बाकी की जांच जारी है। आरोपियों से बांग्लादेशी राष्ट्रीय पहचान पत्र भी बरामद किए गए।
राजनेता और अधिकारियों पर भी जांच
सूत्रों के अनुसार, कुछ स्थानीय मददगारों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांचकर्ता इन आरोपों की पड़ताल कर रहे हैं कि एक राजनेता और कुछ सरकारी अधिकारियों ने बेगम के लिए वोटर आईडी और राशन कार्ड बनवाने में मदद की हो सकती है। दस्तावेज और पहचान से जुड़ी सेवाओं में संदिग्ध भूमिका के कारण एक 'अक्षय केंद्र' भी जांच के दायरे में आ गया है।
आगे क्या होगा
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के मामलों पर केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी बढ़ी हुई है। जांच अभी जारी है और अधिकारियों के अनुसार नेटवर्क के और सदस्यों की तलाश की जा रही है। स्थानीय मददगारों की पहचान के बाद मामले में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।