30 जुलाई 2026
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महिला आरक्षण विधेयक: उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक का SP-कांग्रेस पर 'डबल गेम' का आरोप

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महिला आरक्षण विधेयक: उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक का SP-कांग्रेस पर 'डबल गेम' का आरोप

सारांश

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने SP और कांग्रेस पर महिला आरक्षण विधेयक के खिलाफ संसद में मतदान करने के बाद बाहर विरोध प्रदर्शन करने को 'डबल गेम' करार दिया। 131वाँ संविधान संशोधन विधेयक दो-तिहाई बहुमत न मिलने से पारित नहीं हो सका।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने 30 अप्रैल 2026 को SP और कांग्रेस पर महिला आरक्षण पर 'डबल गेम' का आरोप लगाया।
संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 संसद में दो-तिहाई बहुमत न मिलने से पारित नहीं हो सका।
SP विधायकों ने UP विधानसभा के बाहर ' 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करो ' बैनर लेकर प्रदर्शन किया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कथित तौर पर विधेयक समर्थन के बदले राज्यों की सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि का लिखित आश्वासन देने की पेशकश की थी।
पाठक ने कहा कि SP प्रमुख अखिलेश यादव ने इस प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया था।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने गुरुवार, 30 अप्रैल 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी (SP) पर महिला आरक्षण के मुद्दे पर 'डबल गेम' खेलने का तीखा आरोप लगाया। यह बयान तब आया जब SP विधायक उत्तर प्रदेश विधानसभा के बाहर '33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करो' लिखे बैनर लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। पाठक ने SP और कांग्रेस दोनों पर महिला-विरोधी रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों दलों की नीतियाँ अब पूरी तरह बेनकाब हो चुकी हैं।

मुख्य घटनाक्रम

संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 — जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी कहा जा रहा है — का उद्देश्य संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना और सदन की संख्या बढ़ाना था। हालांकि, व्यापक बहस के बावजूद यह विधेयक संवैधानिक रूप से आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने में विफल रहा और पारित नहीं हो सका।

उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में सदस्यों ने इस विधेयक के देश की सबसे बड़ी पंचायत — यानी संसद — में पारित न होने के बाद उत्पन्न स्थिति पर अपने विचार रखे।

पाठक का SP पर सीधा हमला

उपमुख्यमंत्री पाठक ने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संवैधानिक बहुमत की कमी से भी अटका, जो सत्तारूढ़ गठबंधन की अपनी सीमाओं को भी उजागर करता है। SP और कांग्रेस पर 'डबल गेम' का आरोप राजनीतिक रूप से प्रभावशाली है, परंतु अमित शाह की कथित 50 प्रतिशत सीट-वृद्धि की पेशकश का लिखित प्रमाण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। महिला आरक्षण का मुद्दा दशकों से राजनीतिक दाँव-पेच का शिकार रहा है — इस बार भी असली सवाल यही है कि क्रियान्वयन की इच्छाशक्ति किसके पास है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 क्या है?
यह विधेयक संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने और सदन की संख्या बढ़ाने के लिए लाया गया था। इसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी कहा जा रहा है, लेकिन यह संवैधानिक रूप से आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण पारित नहीं हो सका।
SP पर 'डबल गेम' का आरोप क्यों लगाया गया?
उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के अनुसार, SP विधायकों ने विधानसभा के बाहर 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के समर्थन में प्रदर्शन किया, जबकि संसद में मतदान के दौरान उन्होंने इसी विधेयक के खिलाफ मत दिया। पाठक ने इसे सीधा विरोधाभास बताया।
अमित शाह ने विधेयक पर क्या प्रस्ताव रखा था?
पाठक के बयान के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को एक घंटे की कार्यवाही स्थगन के बदले राज्यों की सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि की गारंटी लिखित में देने की पेशकश की थी। हालांकि, SP प्रमुख अखिलेश यादव ने कथित तौर पर इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।
UP विधानसभा का विशेष सत्र किस मुद्दे पर बुलाया गया?
विशेष सत्र 131वें संविधान संशोधन विधेयक के संसद में पारित न होने के बाद उत्पन्न स्थिति पर विचार-विमर्श के लिए बुलाया गया था। इसमें विधायकों ने इस विषय पर अपने विचार रखे।
महिला आरक्षण विधेयक पारित न होने का क्या कारण रहा?
विधेयक को संवैधानिक रूप से आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं हो सका। व्यापक बहस के बावजूद विपक्षी दलों — विशेषकर SP और कांग्रेस — ने इसका समर्थन नहीं किया, जिससे यह पारित नहीं हो पाया।
राष्ट्र प्रेस
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