यूपी में मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति की सीटें दोगुनी, अब ₹60,000 सालाना मिलेंगे किसान-पुत्रों को
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने 18 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बड़े पैमाने पर विस्तारित करते हुए छात्रवृत्ति की निर्धारित सीटें दोगुनी कर दीं और मासिक सहायता राशि ₹3,000 से बढ़ाकर ₹5,000 कर दी। इस संशोधन के बाद उत्तर प्रदेश के किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों को अब प्रत्येक वर्ष ₹60,000 की छात्रवृत्ति मिलेगी, जो पहले ₹36,000 थी — यानी एक वर्ष में ₹24,000 की अतिरिक्त आर्थिक सहायता। यह विस्तार राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के माध्यम से लागू किया जा रहा है।
सीटों में क्या बदलाव हुआ
संशोधित व्यवस्था के तहत प्रत्येक कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि संस्थान में सीटें 45 से बढ़ाकर 90 और प्रत्येक कृषि महाविद्यालय में 15 से बढ़ाकर 30 कर दी गई हैं। राज्य के 11 कृषि विश्वविद्यालयों व संस्थानों और 61 कृषि महाविद्यालयों को मिलाकर कुल निर्धारित सीटें 1,410 से बढ़कर 2,820 हो गई हैं।
पाठ्यक्रमवार विवरण के अनुसार, कृषि विश्वविद्यालयों में कृषि स्नातक के लिए सीटें 25 से 50, गृह विज्ञान स्नातक के लिए 6 से 12, कृषि स्नातकोत्तर के लिए 10 से 20 और गृह विज्ञान स्नातकोत्तर के लिए 4 से 8 की गई हैं। महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर सीटें 10 से 20 और स्नातकोत्तर स्तर पर 5 से 10 हो गई हैं।
पात्रता की शर्तें
योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के निवासी कृषकों और खेतिहर मजदूरों के पुत्र-पुत्रियों तथा उन पर पूर्णतः आश्रित विद्यार्थियों को दिया जाता है। स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट में न्यूनतम 70 प्रतिशत और अन्य बोर्ड से 85 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं। स्नातकोत्तर के लिए स्नातक स्तर पर न्यूनतम 70 प्रतिशत अंक की शर्त रखी गई है।
कृषि के अलावा उद्यान, वानिकी, पशुपालन और संबंधित विषयों में अध्ययनरत पात्र विद्यार्थी भी इस योजना के दायरे में शामिल हैं। चयन मेरिट के आधार पर होता है।
योजना का अब तक का प्रदर्शन
मंडी परिषद के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक इस योजना के तहत कुल 6,454 विद्यार्थियों को लगभग ₹22.90 करोड़ की छात्रवृत्ति दी जा चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब कृषि शिक्षा में युवाओं की रुचि बढ़ाने की चुनौती राष्ट्रीय स्तर पर महसूस की जा रही है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा कृषि प्रदेश है और यहाँ की आबादी का बड़ा हिस्सा आज भी खेती पर निर्भर है। ऐसे में कृषि शिक्षा को प्रोत्साहन देने वाली यह योजना दीर्घकालिक कृषि विकास की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।
सरकार की मंशा और आगे की राह
मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों को उच्च कृषि शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस विस्तार से कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और कृषि आधारित उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार करने की संभावनाएं मजबूत होंगी।
सीटों की संख्या दोगुनी होने और आर्थिक सहायता में वृद्धि के बाद यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि योजना कितने अतिरिक्त परिवारों तक वास्तविक लाभ पहुँचा पाती है — और क्या इसके समानांतर ग्रामीण छात्रों तक जानकारी पहुँचाने की व्यवस्था भी सुदृढ़ की जाती है।