लखनऊ में कमल आकृति का नया विधान भवन: 200 एकड़ में बनेगा परिसर, 2026 में शुरू होगा निर्माण
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को जल्द ही एक नई स्थापत्य पहचान मिलने वाली है। गोमती नगर स्थित सहारा शहर की लगभग 200 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित नए विधान भवन और प्रशासनिक परिसर की डिजाइन अंतिम चरण में पहुँच चुकी है, और निर्माण कार्य अगले वर्ष शुरू होने की संभावना है। प्रस्तावित भवन की संरचना कमल के फूल की पंखुड़ियों से प्रेरित होगी, जो भारतीय संस्कृति, लोकतांत्रिक परंपराओं और आधुनिक तकनीक के समन्वय का प्रतीक बनेगी।
परियोजना की रूपरेखा
सूत्रों के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए देश की 48 प्रमुख कंसल्टेंट संस्थाओं ने अपने-अपने मास्टर प्लान और डिजाइन प्रस्तुत किए थे। इन प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा के बाद अंतिम डिजाइन को लगभग स्वीकृति मिल चुकी है। प्रस्तावित नक्शा लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में भी जमा कराया जा चुका है।
ऊपर से देखने पर मुख्य विधानसभा भवन कमल की पंखुड़ियों के आकार का दिखाई देगा। भवन के केंद्रीय हिस्से में विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही संचालित होगी, जबकि परिसर के चारों ओर प्रशासनिक कार्यालय और अन्य सहायक इकाइयाँ विकसित की जाएँगी।
प्रस्तावित सुविधाएँ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा की गई जानकारी में बताया कि यह विश्वस्तरीय विधायी परिसर निम्नलिखित सुविधाओं से सुसज्जित होगा:
700 सीटों वाला अत्याधुनिक विधानसभा भवन, 200 सीटों वाली विधान परिषद, 1,000 सीटों वाला संयुक्त सत्र सभागार और 5,000 से अधिक वाहनों की पार्किंग व्यवस्था इस परिसर की प्रमुख विशेषताएँ होंगी।
सरकार की मंशा और संदेश
अवस्थी ने कहा कि यह परियोजना 'आधुनिक सुशासन, प्रतिष्ठित आधारभूत संरचना और भविष्य के अनुरूप विकसित हो रही उत्तर प्रदेश की राजधानी की नई पहचान बनेगी।' सरकार का मानना है कि यह परिसर भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित होने वाली राजधानी के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश कई बड़े अवसंरचना प्रोजेक्टों के माध्यम से अपनी राजधानी को राष्ट्रीय स्तर पर पुनर्स्थापित करने में जुटा है। गौरतलब है कि मौजूदा विधान भवन दशकों पुराना है और बढ़ती विधायी एवं प्रशासनिक जरूरतों के लिए अपर्याप्त माना जा रहा है।
आगे की राह
परियोजना के पूरा होने के बाद यह परिसर न केवल प्रदेश की विधायी गतिविधियों का नया केंद्र बनेगा, बल्कि अपनी विशिष्ट वास्तुकला के कारण लखनऊ की पहचान में एक नया अध्याय जोड़ेगा। निर्माण कार्य की आधिकारिक तिथि और कुल लागत की घोषणा अभी बाकी है, जो योजना के अंतिम अनुमोदन के बाद सामने आने की उम्मीद है।